लखनऊ, 12 नवम्बर 2025: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (नई दिल्ली) और राज्य स्वच्छ गंगा मिशन, उत्तर प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में नदी पुनर्जीवन एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली: विज्ञान, समाज और वहनीयता विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से नदियों के पुनर्जीवन, सतत जल प्रबंधन और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना था। देशभर से जल, पर्यावरण, शिक्षा और नीति निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और शोधार्थियों ने इसमें भाग लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि “जब जनता की आस्था, शासन की नीति और विज्ञान की शक्ति एक साथ आती है, तब नदियाँ पुनः जीवनदायिनी बन जाती हैं।”
राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के परियोजना निदेशक श्री जोगिन्दर सिंह ने नदी प्रबंधन में रिवर रिजीम की समझ को अत्यंत आवश्यक बताया और गंगा के उद्गम स्थल गोमुख की अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि गंगा संरक्षण केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक जिम्मेदारी भी है।

कार्यक्रम में ‘जल पुरुष’ श्री राजेन्द्र सिंह के अरवरी नदी पुनर्जीवन प्रयासों का भी उल्लेख किया गया, जिसमें सामुदायिक भागीदारी से हजारों जल संरचनाएँ निर्मित की गईं। इस उदाहरण के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जनसहभागिता ही जल संरक्षण की वास्तविक कुंजी है।
समापन सत्र में यह निष्कर्ष निकला कि नदियों का पुनर्जीवन केवल वैज्ञानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह संस्कृति, समाज और पर्यावरण का संयुक्त आंदोलन है।
सम्मेलन से यह प्रेरक संदेश मिला कि
“जहाँ नदियाँ जीवंत हैं, वहाँ समृद्धि प्रवाहित होती है।”
यह दो दिवसीय सम्मेलन बीबीएयू की ओर से नदियों के सतत संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
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