संसद के बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ हुई। लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने केंद्र सरकार की अब तक की उपलब्धियों, मौजूदा प्राथमिकताओं और आने वाले वर्षों के रोडमैप को विस्तार से देश के सामने रखा। अपने भाषण में उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, आर्थिक मजबूती, राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति और समावेशी विकास को सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताएं बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत आज वैश्विक मंच पर एक मजबूत और आत्मविश्वासी राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। बीते 11 वर्षों में देश की आर्थिक स्थिति पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ हुई है और सरकार ने आम नागरिक के जीवन को आसान बनाने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।
आत्मनिर्भर भारत: आज़ादी की सच्ची भावना
अपने संबोधन की शुरुआत में राष्ट्रपति मुर्मू ने आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा पर ज़ोर देते हुए कहा कि जब तक देश का हर नागरिक आत्मनिर्भर जीवन नहीं जीता, तब तक आज़ादी की भावना अधूरी रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि हर वर्ग को सशक्त बनाना है। उन्होंने बताया कि स्वरोज़गार, स्टार्टअप, स्किल डेवलपमेंट और लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देकर सरकार ने लाखों युवाओं को रोजगार के नए अवसर दिए हैं। “मेक इन इंडिया” और “वोकल फॉर लोकल” जैसी पहलों ने भारतीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाई है।
महंगाई पर नियंत्रण: मध्यम वर्ग और गरीबों को राहत
राष्ट्रपति ने महंगाई दर पर नियंत्रण को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत ने रिकॉर्ड स्तर तक महंगाई को काबू में रखा है, जिससे मध्यम वर्ग और गरीब तबके को सीधा लाभ मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक स्थिरता के साथ-साथ सरकार का फोकस समावेशी विकास पर रहा है, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
आतंकवाद पर सख्त संदेश: कोई समझौता नहीं
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में आतंकवाद पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को दोहराया। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने भारतीय सेना का अद्भुत शौर्य और पराक्रम देखा है। उन्होंने बताया कि आतंकियों के ठिकानों को ध्वस्त किया गया है और आगे भी किसी भी आतंकी हमले का जवाब दृढ़ और निर्णायक तरीके से दिया जाएगा। राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सिंधु जल समझौते से जुड़े फैसले भारत की व्यापक सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रणनीति का हिस्सा हैं।
माओवाद के खिलाफ निर्णायक सफलता
राष्ट्रपति ने माओवाद पर सरकार की सख्त नीति की सराहना करते हुए कहा कि इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि माओवाद प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर अब सिर्फ 8 रह गई है, जिनमें से केवल 3 जिले गंभीर रूप से प्रभावित हैं। अब तक 2,000 से अधिक माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। राष्ट्रपति ने भरोसा जताया कि वह दिन दूर नहीं जब देश से माओवाद और आतंकवाद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
विकसित भारत का सपना: इंफ्रास्ट्रक्चर में ऐतिहासिक निवेश
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सरकार का लक्ष्य भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। इसके लिए बुनियादी ढांचे के विकास पर बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है। उन्होंने बताया कि सोलर पावर सेक्टर में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। अब तक 20 लाख से अधिक सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं, जिससे लाखों परिवार ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भर बने हैं। पूर्वोत्तर भारत में बीते 11 वर्षों में 7,200 किलोमीटर से अधिक राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण हुआ है। रेलवे विकास पर 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है, जिससे कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार हुआ है।
आदिवासी और वंचित वर्गों का उत्थान
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास को देश के हर कोने तक पहुंचाना है। आदिवासी क्षेत्रों के 20 हजार से अधिक गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। अनुसूचित जाति के छात्रों को अब तक 42 हजार करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से वंचित वर्गों को सशक्त किया जा रहा है।
किसान ही विकसित भारत की नींव
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि सरकार खुशहाल किसानों को विकसित भारत की नींव मानती है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत अब तक करीब 4 लाख करोड़ रुपये किसानों के खातों में सीधे ट्रांसफर किए गए हैं। उन्होंने बताया कि ऑयलसीड फसलों के उत्पादन में वृद्धि हुई है और पशुपालन, मत्स्यपालन व मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दिया गया है।
कृषि, मत्स्यपालन और फूड प्रोसेसिंग में उछाल
राष्ट्रपति ने कहा कि 2014 की तुलना में मत्स्यपालन क्षेत्र में 105 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं, देश की फूड प्रोसेसिंग क्षमता में 20 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। सरकार की नीतियों से किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिली है।
महिला सशक्तिकरण: विकास की असली ताकत
महिला सशक्तिकरण को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि देश का विकास तभी संभव है जब सभी नागरिकों को समान अवसर मिलें। अब तक 10 करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जा चुका है और 3 करोड़ महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। 60 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। उन्होंने ‘ड्रोन दीदी’ जैसी योजनाओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि महिलाएं अब टेक्नोलॉजी और उद्यमिता में भी नई पहचान बना रही हैं।
स्पष्ट संदेश: सुरक्षा, समृद्धि और समावेशी विकास
अपने अभिभाषण के अंत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने साफ संकेत दिया कि सरकार का फोकस सुरक्षा, समृद्धि और समावेशी विकास पर है। उन्होंने कहा कि भारत आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र के रूप में दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
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