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लखनऊ में चाइनीज़ मांझे का कहर: प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले युवक की दर्दनाक मौत

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राजधानी लखनऊ में एक बार फिर चाइनीज़ मांझा जानलेवा साबित हुआ है। मंगलवार को एक दर्दनाक हादसे में प्राइवेट कंपनी में काम करने वाले युवक की गला कटने से मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब युवक सड़क से गुजर रहा था और अचानक चाइनीज़ मांझा उसकी गर्दन में फंस गया। घटना के तुरंत बाद घायल युवक को पीजीआई ट्रामा सेंटर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है। लोग प्रशासन से चाइनीज़ मांझे पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

कैसे हुआ दर्दनाक हादसा?

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवक रोज की तरह अपने काम से लौट रहा था। रास्ते में अचानक हवा में लटक रहा चाइनीज़ मांझा उसकी गर्दन में उलझ गया, जिससे उसका गला बुरी तरह कट गया। घटना इतनी अचानक और तेज थी कि युवक को संभलने का मौका तक नहीं मिला। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उसे नजदीकी अस्पताल और फिर पीजीआई ट्रामा सेंटर पहुंचाया, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

PGI ट्रामा सेंटर में मौत की पुष्टि

पीजीआई ट्रामा सेंटर के डॉक्टरों ने बताया कि युवक को बेहद गंभीर हालत में लाया गया था। उसकी गर्दन पर गहरा कट था, जिससे काफी खून बह चुका था। डॉक्टरों की टीम ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन चोट अत्यधिक गंभीर होने के कारण कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई।

मृतक की पहचान और पारिवारिक स्थिति

मृतक की पहचान एक निजी कंपनी में काम करने वाले युवक के रूप में हुई है। वह अपने परिवार का मुख्य कमाने वाला सदस्य था। घटना की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि चाइनीज़ मांझा खुलेआम बिक रहा है, जबकि प्रशासन को पहले से पता है कि यह कितना खतरनाक है।

इलाके में आक्रोश, सख्त कार्रवाई की मांग

इस दर्दनाक हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि:

  • चाइनीज़ मांझे पर पूरी तरह प्रतिबंध के बावजूद इसकी बिक्री जारी है
  • पुलिस और प्रशासन की लापरवाही के कारण ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं
  • दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए

स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो वे प्रदर्शन और आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

पहले भी हो चुके हैं कई हादसे

यह कोई पहला मामला नहीं है। लखनऊ ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों और देश के अन्य हिस्सों में भी चाइनीज़ मांझे से कई दर्दनाक हादसे हो चुके हैं। पिछले कुछ वर्षों में:

  • कई बाइक सवारों की गर्दन कटने से मौत
  • बच्चों और बुजुर्गों के गंभीर रूप से घायल होने
  • पक्षियों के बड़ी संख्या में मारे जाने

जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

क्यों खतरनाक है चाइनीज़ मांझा?

चाइनीज़ मांझा नायलॉन और सिंथेटिक फाइबर से बना होता है, जिसमें अक्सर कांच या धातु के कण मिले होते हैं। इसकी धार इतनी तेज होती है कि:

  • यह इंसानी त्वचा को आसानी से काट सकता है
  • गले, हाथ या चेहरे पर लगने से जानलेवा चोट पहुंच सकती है
  • पक्षियों की तुरंत मौत हो जाती है

यही वजह है कि भारत के कई राज्यों में इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है।

प्रतिबंध के बावजूद क्यों बिक रहा है मांझा?

सरकारी आदेशों के बावजूद चाइनीज़ मांझा चोरी-छिपे बाजार में बिक रहा है। इसे:

  • ऑनलाइन प्लेटफॉर्म
  • स्थानीय दुकानों
  • अस्थायी ठेलों

के जरिए बेचा जा रहा है।

प्रशासन समय-समय पर छापेमारी और जब्ती अभियान चलाता है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।

प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल

हर हादसे के बाद प्रशासन जांच और कार्रवाई का आश्वासन देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर सख्ती की कमी साफ नजर आती है। लोगों का कहना है कि:

  • सिर्फ त्योहारों के समय ही अभियान तेज होता है
  • उसके बाद फिर से बिक्री शुरू हो जाती है
  • दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिलती, जिससे हौसले बुलंद रहते हैं

आम लोगों के लिए सुरक्षा सुझाव

जब तक प्रशासन पूरी तरह इस खतरे को खत्म नहीं कर पाता, तब तक आम लोगों को खुद सतर्क रहने की जरूरत है।

सावधानियां:

  • बाइक चलाते समय फुल फेस हेलमेट पहनें
  • गर्दन को ढकने के लिए स्कार्फ या कॉलर जैकेट का प्रयोग करें
  • बच्चों को खुले मैदानों में पतंग उड़ाने दें
  • सड़क पर लटकते धागों से दूरी बनाए रखें

क्या कहता है कानून?

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चाइनीज़ मांझे के निर्माण, बिक्री, भंडारण और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके उल्लंघन पर:

  • भारी जुर्माना
  • जेल की सजा
  • और माल जब्ती

जैसी सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।

लगातार हो रहे हादसे, फिर भी सबक नहीं

सबसे दुखद बात यह है कि लगातार मौतों और हादसों के बावजूद चाइनीज़ मांझे की बिक्री बंद नहीं हो पा रही है। इससे साफ है कि:

  • कानून का डर खत्म हो चुका है
  • प्रशासनिक निगरानी कमजोर है

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