उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से जुड़ी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया अपने अहम पड़ाव पर पहुंच चुकी है। दावे और आपत्तियों पर सुनवाई का आज अंतिम दिन माना जा रहा है, लेकिन इसी बीच बड़ी खबर यह है कि समय-सीमा बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने इस संबंध में निर्वाचन आयोग (ECI) को प्रस्ताव भेजा है, जिसमें दावे-आपत्तियों और नोटिस पर सुनवाई दोनों की समय-सीमा बढ़ाने का अनुरोध किया गया है।
क्या है SIR और क्यों है यह जरूरी?
SIR यानी Special Intensive Revision एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके तहत मतदाता सूची को पूरी तरह अपडेट किया जाता है। इसमें तीन प्रमुख काम होते हैं:
- नए मतदाताओं के नाम जोड़ना
- अपात्र या मृत मतदाताओं के नाम हटाना
- नाम, पता, उम्र जैसी जानकारियों में संशोधन
इस बार प्रदेश भर से बड़ी संख्या में आवेदन आए हैं, जिससे चुनाव आयोग पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।
दावे-आपत्तियों की सुनवाई का आखिरी दिन
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, SIR में दावे और आपत्तियों की सुनवाई का आज अंतिम दिन है। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होनी थी। हालांकि, अधिकारियों के मुताबिक, इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदनों को देखते हुए तय समय में सभी मामलों का निपटारा कर पाना मुश्किल हो रहा है।
नोटिस पर सुनवाई 27 फरवरी तक
सूत्रों के अनुसार, जिन मामलों में मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं, उन पर सुनवाई 27 फरवरी तक प्रस्तावित है। यही वजह है कि राज्य निर्वाचन कार्यालय ने आयोग से समय-सीमा बढ़ाने की औपचारिक मांग की है।
निर्वाचन आयोग को भेजा गया प्रस्ताव
यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्वाचन आयोग को भेजे प्रस्ताव में कहा है कि:
- दावे-आपत्तियों की संख्या अपेक्षा से अधिक है
- कई जिलों में सत्यापन का काम अभी पूरा नहीं हुआ है
- तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से समय बढ़ाना जरूरी है
आयोग से आग्रह किया गया है कि दोनों प्रक्रियाओं दावे-आपत्तियों और नोटिस सुनवाई की समय-सीमा बढ़ाई जाए।
6 मार्च को नहीं होगी अंतिम मतदाता सूची?
अगर निर्वाचन आयोग इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो इसका सीधा असर अंतिम मतदाता सूची की तारीख पर पड़ेगा। पहले योजना थी कि 6 मार्च को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी जाएगी, लेकिन समय-सीमा बढ़ने की स्थिति में यह तारीख आगे खिसक सकती है।
कितने बड़े स्तर पर चल रही है प्रक्रिया?
इस बार SIR के तहत:
- लाखों नए मतदाता आवेदन
- बड़ी संख्या में नाम हटाने के अनुरोध
- पते और उम्र से जुड़े संशोधन
जैसे आवेदन आए हैं। खासतौर पर शहरी इलाकों और युवा मतदाताओं से जुड़े मामलों की संख्या ज्यादा बताई जा रही है।
जिलों से क्या रिपोर्ट आ रही है?
कई जिलों के निर्वाचन अधिकारियों ने राज्य मुख्यालय को रिपोर्ट भेजकर बताया है कि:
- फील्ड वेरिफिकेशन में समय लग रहा है
- कुछ क्षेत्रों में दस्तावेजों की जांच लंबित है
- बीएलओ (Booth Level Officer) पर कार्यभार ज्यादा है
इन्हीं कारणों से समय बढ़ाने की मांग को जरूरी माना जा रहा है।
पारदर्शिता और निष्पक्षता पर जोर
निर्वाचन आयोग की प्राथमिकता यह है कि मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध और पारदर्शी हो। जल्दबाजी में प्रक्रिया पूरी करने से गलतियां होने की आशंका रहती है, जो चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं।
मतदाताओं के लिए क्या मायने?
अगर आपने:
- हाल ही में वोटर आईडी के लिए आवेदन किया है
- नाम या पते में सुधार कराया है
- किसी गलत प्रविष्टि पर आपत्ति दर्ज की है
तो आपके लिए यह समय-सीमा बढ़ना राहत भरी खबर हो सकती है।
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