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जयपुर में बड़ा ट्रैप: ED से जुड़ा अधिकारी रिश्वत लेते पकड़ा गया

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Source: AI
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राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की टीम ने एक बड़े ट्रैप ऑपरेशन में प्रवर्तन निदेशालय से जुड़े एक अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान उत्तम पांडेय के रूप में हुई है, जो कथित तौर पर राहत दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की मांग कर रहा था। जयपुर में की गई इस कार्रवाई में आरोपी को 13 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया। इस पूरे ऑपरेशन को एसीबी की स्पेशल यूनिट-द्वितीय ने अंजाम दिया। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने पहले 20 लाख रुपये की मांग की थी, लेकिन बाद में सौदेबाजी के बाद रकम 13 लाख रुपये पर तय हुई। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसियों की सक्रियता को भी दिखाती है, क्योंकि शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने पूरे मामले का सत्यापन कर ट्रैप की योजना बनाई और आरोपी को रंगे हाथों पकड़ लिया।

कहाँ और कैसे हुई गिरफ्तारी

यह कार्रवाई जयपुर में की गई, जहां एसीबी की स्पेशल यूनिट ने होटल अशोका के पास जाल बिछाया। आरोपी को परिवादी से रिश्वत लेते समय रंगे हाथों पकड़ लिया गया। जानकारी के अनुसार, आरोपी उत्तम पांडेय मूल रूप से अयोध्या जिले के ग्राम सरई पाण्डेयपुर, पोस्ट बदनापुर का निवासी है। एसीबी की टीम लंबे समय से आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। जैसे ही आरोपी ने रिश्वत की राशि स्वीकार की, टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।

शिकायत से शुरू हुई जांच

इस पूरे मामले की शुरुआत 30 दिसंबर 2025 को हुई थी, जब पीड़ित ने एसीबी जयपुर में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि वर्ष 2022 में उसने एक निजी कंपनी QFX Pvt. Ltd. में निवेश किया था, जहां उसके साथ धोखाधड़ी हो गई। इसके बाद आरोपी उत्तम पांडेय ने उससे संपर्क किया और खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के चंडीगढ़ कार्यालय से जुड़ा अधिकारी बताया। आरोपी ने दावा किया कि वह इस मामले में उसका नाम हटवा सकता है और उसे राहत दिला सकता है, लेकिन इसके बदले रिश्वत की मांग की।

पहले मांगे 20 लाख रुपये

शिकायत के अनुसार, आरोपी ने शुरुआत में 20 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में कई दौर की बातचीत के बाद यह रकम पहले 15 लाख रुपये और अंत में 13 लाख रुपये तय की गई। पीड़ित ने जब देखा कि आरोपी लगातार पैसे मांग रहा है, तो उसने इसकी जानकारी एसीबी को दी और लिखित शिकायत दर्ज कराई।

एसीबी ने किया सत्यापन

शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने पहले पूरे मामले का सत्यापन किया। जांच के दौरान यह पाया गया कि आरोपी वास्तव में रिश्वत मांग रहा है। इसके बाद एसीबी की टीम ने ट्रैप की योजना बनाई। यह पूरी कार्रवाई उपमहानिरीक्षक पुलिस अनिल कयाल के सुपरविजन में की गई। ऑपरेशन का नेतृत्व स्पेशल यूनिट-द्वितीय के उप अधीक्षक पुलिस विजय सिंह ने किया।

होटल अशोका के पास बिछाया गया जाल

एसीबी की टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए होटल अशोका के पास जाल बिछाया। जैसे ही आरोपी ने रिश्वत की राशि ली, टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। इस दौरान आरोपी के पास से कुल 13 लाख रुपये बरामद किए गए।

ऐसे बरामद हुई रिश्वत की रकम

एसीबी अधिकारियों के अनुसार आरोपी के पास से कुल 13 लाख रुपये की रिश्वत राशि बरामद हुई। इसमें से

  • 2 लाख रुपये नकद
  • 11 लाख रुपये अन्य माध्यम से

बरामद किए गए। पूरी कार्रवाई के दौरान एसीबी की टीम ने सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया।

वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कार्रवाई

यह पूरी कार्रवाई एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस स्मिता श्रीवास्तव की निगरानी में की गई। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस मामले में और लोग भी शामिल हैं।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज

एसीबी ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपी से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

आगे पढ़िए: Opener बने finisher, सैमसन की तूफानी पारी, भारत सेमीफाइनल में

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