The Journalist News (Lucknow): उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में एक आत्महत्या के मामले ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आर्म्ड पुलिस ट्रेनिंग सेंटर (APTC) में तैनात एक आईपीएस अधिकारी पर मृतक के परिजनों ने प्रताड़ना और मारपीट के गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना के बाद परिवार ने निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। वहीं, मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। मृतक की पहचान शैलेन्द्र पाल के रूप में हुई है , जो कथित तौर पर संबंधित आईपीएस अधिकारी के सरकारी आवास पर खाना बनाने का कार्य करते थे। परिजनों का आरोप है कि लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के चलते शैलेन्द्र ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली।
पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप
मृतक की पत्नी का आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से उनके पति को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। उनका कहना है कि कुछ समय पहले आईपीएस अधिकारी के सरकारी आवास पर चोरी की घटना हुई थी, जिसके बाद संदेह के आधार पर शैलेन्द्र पाल को पूछताछ के लिए ले जाया गया। परिवार के अनुसार, एक दिन कुछ लोग जीप से आए और शैलेन्द्र को अपने साथ ले गए। इसके बाद उनका मोबाइल फोन बंद हो गया और करीब दो दिनों तक उनका कोई पता नहीं चला। जब वे वापस घर लौटे तो उनके शरीर पर चोट के कई निशान दिखाई दिए।

मारपीट और धमकी का आरोप
पत्नी का आरोप है कि घर लौटने के बाद शैलेन्द्र ने बताया था कि उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें किसी से इस बारे में कुछ भी न बताने की धमकी दी गई। परिवार का यह भी आरोप है कि उनकी नौकरी और वेतन को लेकर भी दबाव बनाया गया, जिससे वे मानसिक रूप से बेहद परेशान थे। परिजनों का कहना है कि लगातार प्रताड़ना और भय के कारण शैलेन्द्र अवसाद में चले गए और अंततः उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया।
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परिवार ने की निष्पक्ष जांच की मांग
घटना के बाद मृतक के परिजन दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। परिवार ने यह भी मांग की है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कराई जाए ताकि निष्पक्षता बनी रहे।
जांच के बाद ही होगी सच्चाई स्पष्ट
फिलहाल इस मामले में लगाए गए आरोप परिजनों के दावे हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। संबंधित अधिकारियों या पुलिस विभाग की ओर से यदि कोई आधिकारिक बयान जारी किया जाता है, तो उससे मामले की स्थिति और स्पष्ट होगी। किसी भी संवेदनशील मामले में निष्पक्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही जिम्मेदारी तय की जाती है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है।
मामले पर सबकी नजर
यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। मानवाधिकार, प्रशासनिक जवाबदेही और कर्मचारियों के साथ व्यवहार जैसे मुद्दों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि जांच में प्रताड़ना या अन्य अनियमितताओं के आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल परिवार न्याय की मांग कर रहा है, जबकि प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि मामले की पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जाए ताकि तथ्यों के आधार पर सच्चाई सामने आ सके और दोषी पाए जाने पर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित हो।
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