प्रयागराज इलाहाबाद विश्वविद्यालय (Allahabad University) में उस समय हड़कंप मच गया जब यूजीसी के समर्थन में शांतिपूर्वक बैठक कर रहे दलित छात्रों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया गया। इस हमले में एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में तनाव का माहौल बन गया और छात्रों में भारी आक्रोश देखने को मिला। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, छात्र विश्वविद्यालय परिसर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के समर्थन में एक शांतिपूर्ण बैठक कर रहे थे। इसी दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने अचानक हमला बोल दिया। देखते ही देखते लाठी-डंडों से छात्रों को पीटना शुरू कर दिया गया, जिससे अफरा-तफरी मच गई।
शांतिपूर्ण बैठक में अचानक हमला, मची भगदड़
छात्रों का कहना है कि बैठक पूरी तरह शांतिपूर्ण थी और इसका उद्देश्य यूजीसी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना था। इसी बीच कुछ बाहरी लोगों ने वहां पहुंचकर विवाद शुरू कर दिया और देखते ही देखते मामला हिंसा में बदल गया। हमलावरों ने लाठी और डंडों से छात्रों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, जिससे कई छात्र चोटिल हो गए। इस दौरान एक दलित छात्र को गंभीर चोटें आईं, जिसे तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद परिसर में भगदड़ मच गई और छात्र अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए।
घायल छात्र की हालत स्थिर, अस्पताल में भर्ती
घायल छात्र को विश्वविद्यालय प्रशासन और साथियों की मदद से नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक छात्र की हालत फिलहाल स्थिर है, लेकिन उसे सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं। छात्र संगठनों का आरोप है कि हमला जानबूझकर और साजिश के तहत किया गया, ताकि दलित छात्रों की आवाज को दबाया जा सके।
छात्रों का आरोप – दलित आवाज दबाने की कोशिश
घटना के बाद दलित छात्र संगठनों में भारी आक्रोश देखने को मिला। छात्रों ने कहा कि यह हमला सिर्फ एक बैठक पर नहीं, बल्कि दलित समाज की आवाज पर हमला है। छात्र नेताओं का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में दलित छात्रों को बार-बार निशाना बनाया जा रहा है और उनकी मांगों को दबाने के लिए हिंसा का सहारा लिया जा रहा है। छात्रों ने मांग की कि:
- दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी हो
- विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए
- पीड़ित छात्र को न्याय और मुआवजा दिया जाए
विश्वविद्यालय प्रशासन की सफाई
मामले पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि घटना की जांच शुरू कर दी गई है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि कैंपस में शांति व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसी को भी कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
पुलिस जांच में जुटी, सीसीटीवी खंगाले जा रहे
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और हमलावरों की पहचान की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। फिलहाल विश्वविद्यालय परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि कोई और अप्रिय घटना न हो।
छात्र संगठनों का प्रदर्शन, कार्रवाई की मांग
घटना के विरोध में विभिन्न छात्र संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि अगर जल्द न्याय नहीं मिला तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे।
बार-बार क्यों हिंसा का शिकार बन रहे छात्र?
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इससे पहले भी छात्रों के साथ हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर विश्वविद्यालय परिसर जैसे शैक्षणिक स्थान पर बार-बार ऐसी घटनाएं क्यों हो रही हैं? विशेषज्ञों का मानना है कि:
- प्रशासनिक लापरवाही
- सुरक्षा इंतजामों की कमी
- बाहरी तत्वों की घुसपैठ
इन वजहों से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं।
सामाजिक संगठनों ने की निंदा
कई सामाजिक और दलित संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। संगठनों ने कहा कि शिक्षा के मंदिर में इस तरह की हिंसा बेहद शर्मनाक है और इससे लोकतांत्रिक मूल्यों को ठेस पहुंचती है।
क्या बोले छात्र नेता?
छात्र नेता ने कहा,
हम यूजीसी के समर्थन में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे थे। हम पर हमला कर यह साफ कर दिया गया कि कुछ लोग दलित छात्रों की आवाज दबाना चाहते हैं। हम डरेंगे नहीं और न्याय के लिए लड़ते रहेंगे।
आगे पढ़िए: BTS का ऐतिहासिक कमबैक: Gwanghwamun Square से Netflix पर LIVE, ARIRANG से मचेगा दुनियाभर में धमाल
Leave a comment