आँसुओं और सन्नाटे के बीच अंतिम विदाई
बारामती चार्टर विमान हादसे में जान गंवाने वाली पायलट शांभवी पाठक को मंगलवार को दिल्ली के लोधी रोड श्मशान घाट में अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान माहौल बेहद गमगीन रहा। परिवार, रिश्तेदार, दोस्त और विमानन जगत से जुड़े लोग नम आंखों के साथ उन्हें अंतिम विदा देने पहुंचे। श्मशान घाट में सन्नाटा पसरा था। हर चेहरा दुख और सदमे से भरा हुआ था। जब शांभवी की चिता जली, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। परिवार ने टूटे दिल के साथ अपनी बेटी को आखिरी अलविदा कहा।
कैसे हुआ था बारामती चार्टर विमान हादसा
यह हादसा बारामती में एक चार्टर विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से जुड़ा है। हादसे में पायलट शांभवी पाठक की मौके पर ही मौत हो गई थी। यह खबर सामने आते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई थी। विमानन क्षेत्र में शांभवी को एक होनहार और अनुशासित पायलट के रूप में जाना जाता था। उनकी असमय मौत ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे एविएशन समुदाय को गहरा झटका दिया है।
शांभवी पाठक: एक सपना जो अधूरा रह गया
शांभवी पाठक ने बहुत कम उम्र में ही पायलट बनने का सपना देखा था। कड़ी मेहनत, अनुशासन और लगन के बल पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। वह अपने प्रोफेशन को लेकर बेहद गंभीर और समर्पित थीं। उनके करीबी बताते हैं कि शांभवी हमेशा उड़ान को केवल नौकरी नहीं, बल्कि जुनून मानती थीं। वह नई पीढ़ी की उन महिलाओं में शामिल थीं, जो पारंपरिक सीमाओं को तोड़कर आसमान में अपनी पहचान बना रही थीं।
लोधी रोड श्मशान घाट पर भावुक माहौल
लोधी रोड श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया। जैसे ही पार्थिव शरीर को चिता पर रखा गया, परिवार के सदस्य खुद को संभाल नहीं पाए। मां की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे, वहीं पिता गहरी खामोशी में डूबे हुए दिखाई दिए। भाई-बहन और रिश्तेदारों ने कांपते हाथों से अंतिम संस्कार की रस्में निभाईं।
“हमारी बेटी हमेशा जिंदा रहेगी”
परिवार के एक सदस्य ने रोते हुए कहा,
“शांभवी सिर्फ हमारी बेटी नहीं थी, वह हमारा गर्व थी। आज वह हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी यादें हमेशा हमारे साथ रहेंगी।” उनके शब्द सुनकर वहां मौजूद लोग भी खुद को रोक नहीं पाए और माहौल और भी ज्यादा गमगीन हो गया।
दोस्तों और सहकर्मियों ने दी श्रद्धांजलि
अंतिम संस्कार में शांभवी के कई दोस्त और सहकर्मी भी मौजूद रहे। कुछ ने फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि दी, तो कुछ ने नम आंखों से मौन रखा। एक सहकर्मी ने कहा,
“शांभवी एक बेहद प्रोफेशनल पायलट थीं। उन्होंने हमेशा सेफ्टी और जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी। उनका जाना हम सभी के लिए अपूरणीय क्षति है।”
हादसे ने उठाए कई सवाल
इस दर्दनाक हादसे के बाद चार्टर विमानों की सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल उठने लगे हैं। विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि हादसे की निष्पक्ष और गहन जांच बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके। हालांकि, जांच से जुड़ी प्रक्रिया जारी है और संबंधित एजेंसियां मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही हैं।
सोशल मीडिया पर शोक की लहर
शांभवी पाठक के निधन की खबर के बाद सोशल मीडिया पर भी शोक की लहर देखने को मिली। कई लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि देश ने एक होनहार पायलट खो दी। कुछ यूजर्स ने लिखा कि शांभवी जैसी बेटियां समाज के लिए प्रेरणा होती हैं, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए हर चुनौती का सामना करती हैं।
महिला पायलट्स के लिए प्रेरणा थीं शांभवी
भारत में महिला पायलट्स की संख्या लगातार बढ़ रही है और शांभवी पाठक इस बदलाव का एक मजबूत चेहरा थीं। उनकी कहानी कई युवा लड़कियों के लिए प्रेरणा थी, जो एविएशन सेक्टर में करियर बनाना चाहती हैं। उनकी असमय मौत ने इस पूरे समुदाय को गहरे सदमे में डाल दिया है।
जांच और आगे की प्रक्रिया
हादसे के कारणों को जानने के लिए संबंधित जांच एजेंसियां तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही हैं। विमान की स्थिति, मौसम, तकनीकी खराबी और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखते हुए रिपोर्ट तैयार की जा रही है। परिवार ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
अंतिम विदाई, लेकिन यादें हमेशा रहेंगी
लोधी रोड श्मशान घाट में अंतिम संस्कार के बाद शांभवी पाठक पंचतत्व में विलीन हो गईं, लेकिन उनकी यादें, उनका जुनून और उनका संघर्ष हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा। एक ऐसी बेटी, एक ऐसी पायलट, जिसने आसमान को छूने का सपना देखा और उसे पूरा भी किया।
आगे पढ़िए: सोना-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट, बाजार खुलते ही मची अफरा-तफरी
Leave a comment