बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली में प्रेम-विवाह के महज दो महीने बाद IVRI के संविदाकर्मी की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पहले इसे आत्महत्या माना गया, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने हत्या की पुष्टि कर दी। पुलिस ने पत्नी और उसके परिवार को आरोपी बनाते हुए जांच तेज कर दी है।
क्या है पूरा मामला
बरेली स्थित भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) में संविदाकर्मी के तौर पर काम करने वाले 33 वर्षीय जितेंद्र यादव की गला दबाकर हत्या कर दी गई। शव को कमरे में फंदे से लटका दिया गया, ताकि मामला आत्महत्या का लगे।
शुरुआत में परिजनों ने भी इसे आत्महत्या समझा और पुलिस को सूचना दी। पत्नी ज्योति प्रजापति और उसके परिजनों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
पोस्टमॉर्टम में खुला राज
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद पूरा मामला पलट गया। रिपोर्ट में साफ हुआ कि जितेंद्र की गला दबाकर हत्या की गई थी। इसके बाद पुलिस ने केस में हत्या की धारा बढ़ा दी।
एसपी सिटी मानुष पारीक के निर्देश पर इज्जतनगर पुलिस ने जांच तेज कर दी है। इंस्पेक्टर विजेंद्र सिंह के नेतृत्व में महिला पुलिस ने ज्योति से पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि उसके परिवार वालों को भी बुलाया गया है।
संपत्ति को लेकर था विवाद
मृतक के भाई अजय कुमार ने बताया कि जितेंद्र और ज्योति की दो महीने पहले प्रेम-विवाह हुआ था। शादी के बाद दोनों इज्जतनगर के कैलाशपुरम इलाके में किराये के मकान में रह रहे थे।
आरोप है कि ज्योति और उसके परिवार वाले जितेंद्र पर पुश्तैनी जमीन बेचकर मकान और कार खरीदने का दबाव बना रहे थे। जितेंद्र ने इस बारे में अपनी मां और भाई को पहले ही बता दिया था और किसी अनहोनी की आशंका भी जताई थी
कार और मकान की जिद
परिजनों का कहना है कि समझाने के बावजूद ज्योति अपनी मांगों पर अड़ी रही। विरोध करने पर वह दहेज के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देती थी और भाई के जरिए मानसिक प्रताड़ना दिलवाती थी।
जाति को लेकर भी तनाव
पुलिस जांच में सामने आया है कि जितेंद्र और ज्योति पिछले सात साल से एक-दूसरे को जानते थे। हालांकि, विजातीय विवाह से ज्योति के परिजन खुश नहीं थे। आशंका जताई जा रही है कि पहले हत्या की गई और फिर सबूत मिटाने के लिए शव को फंदे से लटका दिया गया।
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