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FIR के बाद मनोज बाजपेयी का बड़ा बयान, हटेगा प्रमोशनल कंटेंट

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विवादित फिल्म “घूसखोर पंडित” को लेकर लखनऊ में FIR दर्ज होने के बाद अब अभिनेता मनोज बाजपेयी का पहला आधिकारिक बयान सामने आया है। सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखते हुए मनोज बाजपेयी ने कहा है कि वह सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान करते हैं और किसी की धार्मिक या सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का उनका कोई इरादा नहीं था। उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब फिल्म को लेकर देशभर में चर्चा तेज है और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

क्या है पूरा मामला?

फिल्म “घूसखोर पंडित” के प्रमोशनल पोस्टर और टाइटल को लेकर कुछ संगठनों और व्यक्तियों ने आपत्ति जताई थी। आरोप लगाया गया कि फिल्म का नाम एक विशेष समुदाय की छवि को नकारात्मक रूप में पेश करता है। इसी को लेकर लखनऊ में फिल्म से जुड़े लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई, जिसके बाद यह मामला और गंभीर हो गया।

मनोज बाजपेयी का पहला बयान

FIR दर्ज होने के बाद मनोज बाजपेयी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि:

“मैं सभी लोगों की भावनाओं का सम्मान करता हूं। किसी भी समुदाय या वर्ग को ठेस पहुंचाने का मेरा कोई इरादा नहीं था।”

उन्होंने आगे कहा कि जनभावनाओं को देखते हुए फिल्म के प्रमोशनल मटीरियल को हटाने का फैसला लिया गया है।

प्रमोशनल मटीरियल हटाने का फैसला

मनोज बाजपेयी ने साफ किया कि यह फैसला पूरी तरह से जनभावनाओं के सम्मान में लिया गया है। फिल्म से जुड़े पोस्टर, टीज़र या अन्य प्रचार सामग्री, जिन पर आपत्ति जताई गई थी, उन्हें हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह कदम ऐसे वक्त पर उठाया गया है, जब विवाद लगातार बढ़ता जा रहा था और सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर बहस तेज हो चुकी थी।

FIR में क्या आरोप?

लखनऊ में दर्ज FIR में आरोप लगाया गया है कि फिल्म का नाम और प्रचार सामग्री:

  • धार्मिक भावनाओं को आहत करती है
  • एक विशेष समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचाती है
  • समाज में वैमनस्य फैलाने का कारण बन सकती है

हालांकि, अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी की खबर सामने नहीं आई है।

कानूनी मोर्चे पर अगला कदम?

कानूनी जानकारों के मुताबिक, FIR दर्ज होने के बाद अब:

  • पुलिस मामले की प्राथमिक जांच करेगी
  • फिल्म निर्माताओं से जवाब मांगा जा सकता है
  • प्रमोशनल कंटेंट की समीक्षा होगी

अगर जांच में कोई गंभीर तथ्य सामने आता है, तो आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ते विवाद

पिछले कुछ वर्षों में फिल्मों के नाम, डायलॉग और कंटेंट को लेकर विवाद बढ़े हैं। सोशल मीडिया के दौर में किसी भी फिल्म का छोटा सा हिस्सा भी तेजी से वायरल हो जाता है, जिससे विवाद गहराता चला जाता है। “घूसखोर पंडित” का मामला भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है, जहां टाइटल और प्रतीकों को लेकर आपत्ति सामने आई है।

सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया

मनोज बाजपेयी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं दो हिस्सों में बंटी नजर आईं:

  • कुछ यूजर्स ने उनके बयान और फैसले का समर्थन किया
  • वहीं कुछ लोगों का कहना है कि फिल्म के नाम पर पहले ही विचार किया जाना चाहिए था

हालांकि, बयान के बाद विवाद की तीव्रता कुछ हद तक कम होती दिख रही है।

आगे पढ़िए: पत्तियों की समय-सीमा बढ़ाने की तैयारी, CEO ने EC को भेजा प्रस्ताव, 6 मार्च को मतदाता सूची पर असर।

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