लखनऊ : प्रदेश की योगी सरकार अपनी “ज़ीरो टॉलरेंस नीति” पर कायम रहते हुए भ्रष्टाचार के मामलों में लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में समाज कल्याण विभाग ने बड़ी कार्यवाही करते हुए भ्रष्टाचार में लिप्त चार अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है, जबकि तीन सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन से कटौती करने का आदेश दिया गया है।
इन मामलों की जांच समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण की निगरानी में की गई, जिसमें कई वर्षों से दबे भ्रष्टाचार के मामले उजागर हुए। विभागीय जांच के बाद न केवल बर्खास्तगी की कार्यवाही हुई, बल्कि संबंधित अधिकारियों से सरकारी धन की वसूली और एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।

जिन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
मीना श्रीवास्तव (तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी, श्रावस्ती)
- तैनाती अवधि: मार्च 2008 से 12 अप्रैल 2012
- आरोप: मुख्यमंत्री महामाया गरीब आर्थिक मदद योजना में फर्जी आवेदन, खातों में हेरफेर और छात्रवृत्ति की धनराशि में गड़बड़ी।
- कार्यवाही: सेवा से बर्खास्तगी।
करुणेश त्रिपाठी (तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी, मथुरा)
- निजी आई.टी.आई. संस्थानों को अनियमित रूप से छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान।
- 11 मान्यताविहीन संस्थानों को ₹2.53 करोड़ का भुगतान।
- 2 वर्ष से लेकर 51 वर्ष तक के “छात्रों” को दाखिला दिखाकर धनराशि का गबन।
- कार्यवाही: बर्खास्तगी और ₹19.25 करोड़ की वसूली का आदेश।
संजय कुमार ब्यास (तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी, हापुड़)
- शासनादेश की अवहेलना कर ₹2.74 करोड़ सीधे शिक्षण संस्थानों के खातों में ट्रांसफर।
- छात्रवृत्ति के रिकॉर्ड में कूटरचना (फर्जीवाड़ा) कर धोखाधड़ी।
- कार्यवाही: बर्खास्तगी और ₹3.23 करोड़ की वसूली का निर्देश।
राजेश कुमार (तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी, शाहजहांपुर)
- राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना में अपात्र व्यक्तियों को लाभ पहुंचाया।
- कार्यवाही: बर्खास्तगी और ₹2.52 करोड़ की वसूली का आदेश।
सेवानिवृत्त अधिकारियों पर भी गिरी गाज
श्रीभगवान (तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी, औरैया)
- वृद्धावस्था पेंशन में लाभार्थियों के खातों में हेरफेर।
- ₹33.47 लाख की शासकीय क्षति पाई गई।
- कार्यवाही: ₹20 लाख की वसूली, पेंशन से 10% स्थायी कटौती।
विनोद शंकर तिवारी (सेवानिवृत्त अधिकारी, मथुरा)
- 11 मान्यताविहीन संस्थानों को ₹2.53 करोड़ का भुगतान।
- 5133 छात्रों को बिना परीक्षा में शामिल हुए ₹9.69 करोड़ की छात्रवृत्ति।
- कार्यवाही: पेंशन से 50% स्थायी कटौती, ₹1.96 करोड़ की वसूली।
उमा शंकर शर्मा (सेवानिवृत्त अधिकारी, मथुरा)
- आई.टी.आई. संस्थानों में स्वीकृत सीटों से अधिक छात्रों के नाम पर ₹88.94 लाख की अनियमित भुगतान।
- कार्यवाही: पेंशन से 50% कटौती और ₹88.94 लाख की वसूली।

विभागीय मंत्री का बयान
समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण ने कहा, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। जो भी मामले वर्षों से दबे हुए हैं, उन सभी में शीघ्र कार्रवाई कर एफआईआर दर्ज की जाएगी।”
आगे पढ़िए : सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दिया स्कूलों और अस्पतालों से आवारा कुत्ते हटाने का आदेश?
Leave a comment