उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार सुबह अचानक भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए, जिससे शहर में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया। सुबह के समय धरती हिलने का एहसास होते ही लोग अपने घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, इस भूकंप की तीव्रता रिच्टर स्केल पर 3.7 मापी गई, जबकि इसका केंद्र उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित था। भूकंप की गहराई लगभग 10 किलोमीटर बताई गई है।
सुबह-सुबह हिली धरती, लोगों में दहशत
सुबह के शांत माहौल में जब अचानक हल्के झटके महसूस हुए, तो लोग घबरा गए। कई इलाकों में लोगों ने फर्नीचर, खिड़कियों और दरवाजों में कंपन महसूस किया। कुछ सेकंड तक धरती कांपती रही, जिसके बाद स्थिति सामान्य हो गई। हालांकि, भूकंप की तीव्रता कम होने के कारण किसी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं है, लेकिन झटकों ने लोगों को डरा जरूर दिया।
गोंडा रहा भूकंप का केंद्र
NCS के अनुसार, भूकंप का केंद्र उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में था। जमीन के अंदर इसकी गहराई करीब 10 किलोमीटर रही, जिसकी वजह से इसके झटके आसपास के कई जिलों में महसूस किए गए। लखनऊ के अलावा बाराबंकी, अयोध्या, बहराइच, सीतापुर और आसपास के इलाकों में भी हल्के झटके महसूस किए जाने की खबरें सामने आई हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों ने साझा किए अनुभव
भूकंप के झटकों के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर लोग अपने अनुभव साझा करने लगे। कई यूजर्स ने लिखा कि सुबह अचानक पलंग और कुर्सी हिलने लगी, जिससे वे घबरा गए। कुछ लोगों ने इसे हल्का लेकिन डराने वाला अनुभव बताया।
प्रशासन अलर्ट, स्थिति पर नजर
भूकंप के बाद जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमें तैयार हैं। प्रशासन की ओर से लोगों से शांत रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की गई है।

क्यों आते हैं भूकंप?
भूकंप धरती की टेक्टोनिक प्लेट्स में होने वाली हलचल की वजह से आता है। जब ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं या खिसकती हैं, तो धरती के अंदर जमा ऊर्जा अचानक बाहर निकलती है, जिससे जमीन हिलती है। उत्तर भारत का बड़ा हिस्सा भूकंपीय जोन-III और जोन-IV में आता है, जो इसे भूकंप के लिहाज से संवेदनशील बनाता है।
उत्तर प्रदेश में पहले भी आ चुके हैं झटके
यह पहली बार नहीं है जब उत्तर प्रदेश में भूकंप के झटके महसूस किए गए हों। इससे पहले भी लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी और गोरखपुर जैसे शहरों में हल्के से मध्यम तीव्रता के भूकंप दर्ज किए जा चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में लगातार हो रही भूगर्भीय गतिविधियों का असर मैदानी इलाकों तक महसूस किया जाता है।
भूकंप के दौरान क्या करें, क्या न करें?
विशेषज्ञों के अनुसार, भूकंप के समय कुछ सावधानियां अपनाकर जान-माल के नुकसान को कम किया जा सकता है:
क्या करें:
- मजबूत मेज या टेबल के नीचे छिप जाएं
- सिर और गर्दन को ढककर रखें
- खुले स्थान में हों तो इमारतों से दूर रहें
क्या न करें:
- लिफ्ट का इस्तेमाल न करें
- खिड़कियों और भारी वस्तुओं के पास न खड़े हों
- घबराहट में दौड़ें नहीं
लोगों ने ली राहत की सांस
करीब कुछ सेकंड तक झटके महसूस होने के बाद जब सबकुछ सामान्य हुआ, तो लोगों ने राहत की सांस ली। कई इलाकों में लोग कुछ देर तक घरों के बाहर खड़े रहे और स्थिति सामान्य होने के बाद ही अंदर लौटे।
विशेषज्ञों की राय
भूकंप विशेषज्ञों का कहना है कि 3.7 तीव्रता का भूकंप आमतौर पर नुकसानदेह नहीं होता, लेकिन यह भविष्य के लिए चेतावनी जरूर हो सकता है। ऐसे में लोगों को भूकंप से जुड़ी सुरक्षा गाइडलाइन के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
आने वाले समय में सतर्कता जरूरी
हालांकि इस भूकंप से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन प्रशासन और विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंपीय गतिविधियों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इमारतों की मजबूती, आपदा प्रबंधन की तैयारी और आम जनता की जागरूकता बेहद जरूरी है।
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