साउथ गोवा आज ऐतिहासिक पल का साक्षी बना, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान राम की एशिया की ‘सबसे ऊंची’ मूर्ति का अनावरण किया। इस भव्य आयोजन में दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं, स्थानीय निवासियों और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ी, और पूरा माहौल “जय श्री राम” के नारों से गूंज उठा। यह भव्य प्रतिमा न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि गोवा की सांस्कृतिक धरोहर में एक नया अध्याय भी जोड़ती है। आधुनिक तकनीक, पारंपरिक शिल्पकला और विशाल आकार का अद्भुत संगम इस प्रतिमा को विशेष बनाता है। ऊंचाई की दृष्टि से यह एशिया की शीर्ष राम मूर्तियों में शामिल हो चुकी है, जिससे गोवा का धार्मिक पर्यटन और भी मजबूत होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान राम भारत की सांस्कृतिक आत्मा हैं, और उनके आदर्श आज भी हर भारतीय को प्रेरित करते हैं। उन्होंने इस प्रतिमा को ‘नए भारत की नई आस्था का प्रतीक’ बताया। कार्यक्रम के दौरान मंत्रोच्चार, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और दीप प्रज्वलन ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में भी इस अवसर को लेकर भारी उत्साह देखने को मिला। कई लोगों ने इसे गोवा के पर्यटन और धार्मिक पहचान को वैश्विक मंच पर और ऊंचा उठाने वाला कदम बताया। इस भव्य अनावरण के साथ साउथ गोवा एक नए आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। आने वाले दिनों में यह स्थान न केवल श्रद्धालुओं, बल्कि शोधकर्ताओं, कलाकारों और पर्यटकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण आकर्षण बन सकता है।
एक अद्भुत सांस्कृतिक धरोहर का उदय
साउथ गोवा के सुरम्य वातावरण में स्थापित यह विशाल प्रतिमा आधुनिक इंजीनियरिंग और पारंपरिक भारतीय शिल्पकला का अद्भुत मिश्रण है। इसकी ऊंचाई, सूक्ष्म नक्काशी, और दिव्यता इसे सामान्य मूर्ति से कहीं अधिक बड़ा प्रतीक बनाती है। क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रतिमा गोवा के पर्यटन को नई पहचान देगी और देश–विदेश से लाखों भक्तों को आकर्षित करेगी।

PM मोदी का संबोधन, ‘राम भारत की आत्मा हैं’
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान राम सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि भारतीय मर्यादा, न्याय और आदर्श जीवन का प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि देश में हो रहे विकास कार्यों और सांस्कृतिक पुनर्जागरण के पीछे यही रामायण के आदर्श प्रेरणा देते हैं।मोदी ने कहा कि यह प्रतिमा “नए भारत की नई सोच और सनातन संस्कृति के सामर्थ्य” का परिचायक है।
गोवा बना आध्यात्मिक केंद्र
प्रतिमा के लोकार्पण के बाद पूरा गोवा उत्सव के रंग में रंग गया। हजारों दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार, और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने वातावरण को और भी पवित्र बना दिया। स्थानीय समुदाय ने इसे गोवा की पहचान को वैश्विक स्तर पर ऊंचा उठाने वाला क्षण बताया।व्यापारियों और पर्यटन से जुड़े लोगों का मानना है कि इस प्रतिमा के कारण गोवा में धार्मिक पर्यटन में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। समुद्र, प्रकृति और संस्कृति का अनोखा संगम अब भक्ति का पवित्र केंद्र भी बन चुका है।
कला, आस्था और आधुनिक भारत का संगम
इस प्रतिमा में सिर्फ ऊंचाई ही नहीं, बल्कि वह भाव भी छिपा है जो भारत की सांस्कृतिक आत्मा को सदियों से जीवित रखे हुए है। मूर्ति की हर रेखा, हर भाव, हर मुद्रा एक संदेश देती है “धर्म, साहस और मर्यादा का मार्ग ही सर्वोच्च है।”
नया आकर्षण, नई पहचान
साउथ गोवा की यह राम प्रतिमा अब आने वाले वर्षों में न सिर्फ भक्तों का, बल्कि इतिहासकारों, शिल्पकारों और पर्यटकों का भी प्रमुख आकर्षण बनने जा रही है। यह स्थान अब ऐसी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक तीर्थस्थली बन चुका है, जिसका असर दूर तक महसूस किया जाएगा।
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