लखनऊ: उत्तर प्रदेश बीजेपी में नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। संगठन ने प्रांतीय परिषद के 327 सदस्यों का चयन पूरा कर लिया है और चुनाव प्रक्रिया अंतिम चरण में है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को चुनाव अधिकारी बनाया गया है, और माना जा रहा है कि वे लखनऊ पहुंचने के बाद किसी भी दिन चुनाव की औपचारिक घोषणा कर सकते हैं।
चूंकि 16 दिसंबर से खरमास शुरू हो रहा है, इसलिए अध्यक्ष की घोषणा उससे पहले होना लगभग तय मानी जा रही है।
बीजेपी के अंदरूनी सूत्रों और दिल्ली की राजनीतिक गतिविधियों के अनुसार, अब रेस सिर्फ तीन नामों पर आकर टिक गई है।
निरंजन ज्योति महिला + OBC + RSS कनेक्शन, सबसे मजबूत दावेदार
पूर्व केंद्रीय मंत्री और ओबीसी (मल्लाह) समुदाय से आने वाली निरंजन ज्योति इस रेस में सबसे आगे मानी जा रही हैं।
उनका प्रोफ़ाइल 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी की चुनावी रणनीति के बिल्कुल अनुकूल माना जा रहा है।

क्यों हैं सबसे आगे?
- OBC (मल्लाह) समुदाय से आती हैं, बड़ा वोटबैंक
- महिला चेहरा, बीजेपी पहली बार यूपी को महिला प्रदेश अध्यक्ष दे सकती है
- हाल में उन्होंने जे.पी. नड्डा से मुलाकात की, जिससे राजनीतिक संकेत और मजबूत हुए
- RSS की बेहद करीबी, संघ कार्यक्रमों में लगातार सक्रिय
- हिंदुत्व की मुखर प्रचारक, कई बार मंचों पर आग्रही भाषण देती रही हैं
- सरकार और संगठन दोनों में अनुभव
निरंजन ज्योति का नाम इसलिए भी जोर पकड़ रहा है क्योंकि बीजेपी महिला और OBC समीकरण दोनों को एक साथ साधने की कोशिश में है।
पंकज चौधरी सातवीं बार सांसद, अमित शाह के साथ गोपनीय बैठक ने वजन बढ़ाया
पूर्व केंद्रीय मंत्री और महराजगंज लोकसभा क्षेत्र से सातवीं बार सांसद बने पंकज चौधरी अचानक इस रेस में बेहद मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं।

क्यों चर्चा में हैं?
- सूत्रों के अनुसार दिल्ली में अमित शाह के साथ ‘गोपनीय बैठक‘ राजनीतिक गलियारों में बड़ी चर्चा
- पटेल (कुर्मी) समुदाय से आते हैं, पूर्वांचल में निर्णायक प्रभाव
- सात बार के सांसद, संगठन और संसदीय अनुभव दोनों का संगम
- कार्यकर्ताओं में उनकी गहरी पकड़
- केंद्रीय नेतृत्व के भरोसेमंद चेहरे के तौर पर पहचाने जाते हैं
- भाजपा के कुर्मी वोटबैंक को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं
सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह के साथ हुई ‘गोपनीय बैठक’ के बाद न सिर्फ दिल्ली बल्कि पूरे संगठन में चर्चा का रुख अचानक बदल गया है।
बी.एल. वर्मा कद, कनेक्शन और संगठन का तगड़ा अनुभव
केंद्रीय राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा लंबे समय से संगठन के एक भरोसेमंद, शांत और बेहद प्रभावशाली नेता रहे हैं।

क्यों रेस में मजबूती से कायम हैं?
- बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल के साथ वर्षों तक संगठनात्मक तालमेल
- केंद्र में उच्च नेतृत्व के साथ मजबूत संबंध
- ओबीसी समाज में उनकी अच्छी पकड़
- संगठन का गहरा अनुभव और शांत नेतृत्व शैली
वर्मा हाईकमान का “सुरक्षित और स्थिर विकल्प” माने जाते हैं, कम बोलते हैं, पर संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं।
दिल्ली में बीते कुछ दिनों से लगातार बंद कमरों में मीटिंग और सियासी हलचल तेज है।

सूत्रों का दावा है कि इस बार यूपी बीजेपी अध्यक्ष के चयन को खुद अमित शाह करीब से मॉनिटर कर रहे हैं। अंतिम फैसला अभी भी शाह के ‘संकेत’ का इंतजार कर रहा है। दिल्ली के गलियारों में तो यहाँ तक कहा जा रहा है-
“होइहि सोइ जो अमित शाह रचि राखा”, यानी हाईकमान की मुहर पड़े बिना कुछ तय नहीं माना जाएगा।
आगे भी पढ़े: इंडिगो संकट! क्या बदल रही है भारत की नंबर-1 एयरलाइन की किस्मत?
Leave a comment