करीब 20 साल के लंबे इंतजार और कई दौर की बातचीत के बाद भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आखिरकार फाइनल हो गया है। इस डील को अब तक की सबसे बड़ी व्यापारिक संधियों में गिना जा रहा है, जिसका सीधा फायदा भारतीय ऑटो सेक्टर और कार खरीदारों को मिलेगा।
इस समझौते के तहत भारत में आयात होने वाली यूरोपियन कारों पर लगने वाला भारी टैक्स अब बड़ी कटौती के साथ कम कर दिया गया है, जिससे लग्ज़री कारें पहले के मुकाबले काफी सस्ती हो सकती हैं
पीएम मोदी बोले- ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार दिया है।
मंगलवार को डील की घोषणा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह समझौता दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच साझेदारी को नई ऊंचाई देगा और ग्लोबल सप्लाई चेन को मजबूत करेगा।
पीएम मोदी ने कहा,
“यह मुक्त व्यापार समझौता दुनिया भर के निवेशकों और कारोबारियों के लिए भारत पर भरोसा और मजबूत करेगा।”
उन्होंने इसे भारत की बढ़ती वैश्विक आर्थिक ताकत का प्रतीक बताया।
कार खरीदारों के लिए सबसे बड़ी खबर
इस FTA की सबसे बड़ी हेडलाइन कार इंपोर्ट ड्यूटी में भारी कटौती है-
- टैक्स में कटौती:
यूरोप से आने वाली कारों पर आयात शुल्क 110% से घटाकर सिर्फ 10% कर दिया गया है। - कोटा तय:
यह छूट सालाना 2.5 लाख कारों तक सीमित होगी। यानी हर साल पहली 2,50,000 यूरोपियन कारों पर ही कम टैक्स लागू होगा। - किन कंपनियों को फायदा:
फॉक्सवैगन, रेनो, मर्सिडीज-बेंज और BMW जैसी कंपनियों को भारतीय बाजार में बड़ा फायदा मिलेगा।
इलेक्ट्रिक वाहनों को राहत नहीं
हालांकि इस खुशी के बीच एक अहम बात यह भी है कि इस FTA में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) को फिलहाल कोई राहत नहीं दी गई है।
सूत्रों के मुताबिक, टेस्ला समेत यूरोप की ईवी कंपनियों को अभी भी मौजूदा टैक्स स्ट्रक्चर के तहत ही भारत में गाड़ियां बेचनी होंगी।
समझौते तक पहुंचने में कितना वक्त लगा?
- शुरुआत: 2007
- बातचीत रुकी: 2013
- दोबारा शुरू: जून 2022
- डील फाइनल: 2026
इस समझौते के साथ भारत, जापान और दक्षिण कोरिया के बाद तीसरा एशियाई देश बन गया है जिसने यूरोपीय संघ के साथ इतना बड़ा व्यापार समझौता किया है।
व्यापार का गणित
यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों के बीच कुल 190 अरब डॉलर का व्यापार हुआ, जिसमें करीब 136 अरब डॉलर का माल व्यापार शामिल है।
इस नई डील के बाद द्विपक्षीय व्यापार के और तेज़ी से बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
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