Parle-G: हर भारतीय के बचपन का स्वाद
देश में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जिसने कभी Parle-G Biscuit न खाया हो। बचपन में स्कूल से लौटकर दूध के साथ, परीक्षा के दिनों में देर रात पढ़ते वक्त या आज भी सुबह की चाय के साथ Parle-G हर दौर में भारतीय घरों का हिस्सा रहा है। लेकिन अब इसी Parle-G से जुड़ी एक खबर सामने आई है, जिसने लाखों लोगों को भावुक कर दिया है। मुंबई के विले पार्ले (ईस्ट) में स्थित Parle-G की वह फैक्ट्री, जहां से इस मशहूर बिस्किट का सफर शुरू हुआ था, अब तोड़ दी जाएगी। यह फैक्ट्री करीब 97 साल पुरानी है और इसे लेकर लोग कह रहे हैं यह एक युग का अंत है।
1929 में शुरू हुई थी कहानी
Parle-G Biscuit की यह ऐतिहासिक फैक्ट्री ब्रिटिश काल में बनी थी। साल 1929, जब भारत अंग्रेजों की गुलामी में था, तब मुंबई के विले पार्ले इलाके में इस फैक्ट्री की स्थापना की गई थी। शुरुआत में यहां बिस्किट नहीं, बल्कि मिठाइयां और टॉफियां बनाई जाती थीं। बाद में, करीब एक दशक के भीतर, Parle Products ने यहां से बिस्किट का उत्पादन शुरू किया। उस दौर में इसका मकसद ब्रिटिश बिस्कुट का एक भारतीय विकल्प तैयार करना था। धीरे-धीरे यह बिस्कुट आम लोगों की पहुंच में आया और फिर इतिहास बन गया।
पारले ग्लूको से Parle-G तक का सफर
शुरुआती दिनों में इस फैक्ट्री में बनने वाले बिस्कुट को Parle Gluco Biscuit कहा जाता था। 1980 के दशक में इसका नाम बदलकर Parle-G Biscuit कर दिया गया। यहां “G” का मतलब है Genius यानी एक ऐसा बिस्कुट जो स्वाद के साथ-साथ ऊर्जा और पोषण का भी प्रतीक बने। नाम बदलने के बाद Parle-G ने सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी मजबूत पहचान बना ली।
क्यों कहा जा रहा है इसे “एक युग का अंत”?
यह वही फैक्ट्री है, जहां से Parle-G Biscuit ने अपनी यात्रा शुरू की थी। दशकों तक यह इमारत लाखों टन बिस्कुट बनाने की गवाह रही। लेकिन अब इस ऐतिहासिक इमारत को ध्वस्त किया जाएगा। यही वजह है कि लोग इसे सिर्फ एक बिल्डिंग का टूटना नहीं, बल्कि भावनाओं से जुड़ी विरासत का अंत मान रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग इसे लेकर भावुक पोस्ट कर रहे हैं और अपने बचपन की यादें साझा कर रहे हैं।
आखिर क्यों तोड़ी जा रही है फैक्ट्री?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विले पार्ले स्थित इस फैक्ट्री में साल 2016 से बिस्किट का उत्पादन बंद हो चुका था। यानी करीब एक दशक से यहां कोई प्रोडक्शन नहीं हो रहा था। अब Parle Products ने फैसला लिया है कि इस पुरानी फैक्ट्री की इमारत को गिराकर उसकी जगह एक बड़ा कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी को Ministry of Environment, Forest and Climate Change (MoEFCC) के तहत State Environmental Impact Assessment Authority (SEIAA) से मंजूरी भी मिल चुकी है। यह मंजूरी 7 जनवरी को दी गई थी। कंपनी ने इस प्रोजेक्ट का प्रस्ताव साल 2025 में जमा किया था, जिसे अब हरी झंडी मिल गई है।
3961.39 करोड़ रुपये का मेगा प्रोजेक्ट
जानकारी के अनुसार, सबसे पहले इस 97 साल पुरानी फैक्ट्री को पूरी तरह गिराया जाएगा। इसके बाद यहां एक भव्य कमर्शियल कॉम्प्लेक्स का निर्माण होगा।
- प्रोजेक्ट की कुल लागत: ₹3961.39 करोड़
- कुल जमीन: लगभग 5.44 हेक्टेयर
- कुल निर्माण क्षेत्र: 1,90,360.52 वर्ग मीटर
क्या-क्या बनेगा इस कॉम्प्लेक्स में?
प्रस्ताव के अनुसार, इस कमर्शियल प्रोजेक्ट में:
- चार बड़ी इमारतें
- दो अलग-अलग पार्किंग टावर
- दो बेसमेंट
- रिटेल शॉप्स
- फूड कोर्ट
- रेस्टोरेंट
- अन्य व्यावसायिक दुकानें
शामिल होंगी। यह इलाका आने वाले समय में मुंबई के बड़े कमर्शियल हब्स में शामिल हो सकता है।
एयरपोर्ट के पास होने से ऊंचाई पर सीमा
विले पार्ले इलाका एयरपोर्ट के बेहद करीब है। इसी वजह से Airport Authority of India (AAI) ने यहां बनने वाली इमारतों की ऊंचाई को लेकर NOC जारी की थी।
- एक बिल्डिंग की ऊंचाई: 30.40 मीटर
- दूसरी बिल्डिंग की ऊंचाई: 28.81 मीटर
हालांकि, पर्यावरणीय क्लीयरेंस दस्तावेजों के अनुसार, कंपनी ने अपनी एक इमारत की ऊंचाई 30.70 मीटर करने की मांग की है, जो तय सीमा से 0.30 मीटर ज्यादा है।
Parle-G Biscuit का मालिक कौन है?
Parle-G Biscuit का मालिकाना हक चौहान परिवार के पास है।
- कंपनी की स्थापना: 1929
- संस्थापक: मोहनलाल दयाल चौहान
- वर्तमान चेयरमैन और एमडी: विजय चौहान
शरद चौहान और राज चौहान भी कंपनी के संचालन में अहम भूमिका निभाते हैं। चौहान परिवार मूल रूप से गुजरात के वलसाड जिले से ताल्लुक रखता है।
विरासत बनाम विकास की बहस
इस फैसले के बाद एक बहस भी छिड़ गई है क्या ऐसी ऐतिहासिक इमारतों को संरक्षित किया जाना चाहिए था? कुछ लोग इसे आधुनिकीकरण की जरूरत बता रहे हैं, तो कुछ इसे इतिहास मिटाने जैसा मान रहे हैं। हालांकि, कंपनी का कहना है कि समय के साथ बदलाव जरूरी है और यह प्रोजेक्ट भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है।
यादों में हमेशा जिंदा रहेगी Parle-G की यह फैक्ट्री
भले ही विले पार्ले की यह ऐतिहासिक फैक्ट्री अब जमीन पर नहीं रहेगी, लेकिन Parle-G Biscuit की कहानी, उसका स्वाद और उससे जुड़ी यादें हमेशा भारतीयों के दिलों में जिंदा रहेंगी। यह सिर्फ एक बिस्कुट नहीं, बल्कि एक पीढ़ी की पहचान है।
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