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FD छोड़ शेयर बाजार में दौड़े भारतीय, RBI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

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यह डायलॉग साल 2020 में आई चर्चित वेब सीरीज Scam 1992 का सबसे मशहूर संवाद बन गया था। हर्षद मेहता का किरदार निभाने वाले प्रतीक गांधी ने यह लाइन शेयर बाजार में उतरते वक्त कही थी। तब यह सिर्फ एक डायलॉग था, लेकिन अब यही सोच भारतीय निवेशकों की असली पहचान बनती जा रही है। अब भारतीय फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और बचत खाते से बाहर निकलकर शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड जैसे जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। इसकी पुष्टि खुद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की हालिया रिपोर्ट करती है, जो देश में निवेश के बदलते ट्रेंड की पूरी तस्वीर पेश करती है।


RBI की रिपोर्ट क्या कहती है?

रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2012 में भारतीय अपनी कुल बचत का करीब 57.9% हिस्सा बैंक जमा (FD और सेविंग अकाउंट) में रखते थे। लेकिन वित्त वर्ष 2025 तक यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 35.2% रह गया है। इसका साफ मतलब है कि अब लोग पारंपरिक निवेश विकल्पों से हटकर ज्यादा रिटर्न देने वाले साधनों की ओर बढ़ रहे हैं।


शेयर बाजार में निवेश क्यों बढ़ा?

पिछले एक दशक में डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल ट्रेडिंग ऐप, आसान KYC प्रक्रिया और निवेश जागरूकता अभियानों ने आम लोगों के लिए शेयर बाजार को बेहद सरल बना दिया है। अब निवेश के लिए:

  • ब्रोकर के ऑफिस जाने की जरूरत नहीं
  • मोबाइल ऐप से चंद मिनटों में डीमैट अकाउंट
  • 100 रुपये से भी म्यूचुअल फंड SIP शुरू

इन सुविधाओं ने निवेश को आम आदमी की पहुंच में ला दिया है।


शेयर और म्यूचुअल फंड में हिस्सेदारी कितनी बढ़ी?

RBI के आंकड़ों के अनुसार:

  • मार्च 2025 तक कुल घरेलू वित्तीय संपत्तियों में शेयर और म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी 23% तक पहुंच गई है।
  • छह साल पहले यह सिर्फ 15.7% थी।

यानी महज कुछ वर्षों में करीब 7% की सीधी छलांग देखने को मिली है।


आम लोगों की हिस्सेदारी में बड़ा उछाल

भारतीय शेयर बाजार में आम निवेशकों की सीधी हिस्सेदारी:

  • वित्त वर्ष 2014 में 8% से कम
  • सितंबर 2025 तक बढ़कर करीब 9.6%

वहीं म्यूचुअल फंड के जरिए इनडायरेक्ट हिस्सेदारी लगभग तीन गुना बढ़कर 9.2% तक पहुंच गई है। इसका अर्थ है कि अब लोग सीधे शेयर खरीदने के साथ-साथ म्यूचुअल फंड के जरिए भी इक्विटी में निवेश कर रहे हैं।


घरेलू बचत का ट्रेंड कैसे बदला?

RBI के अनुसार:

  • वित्त वर्ष 2012 में कुल घरेलू वित्तीय बचत में शेयर और म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी करीब 2% थी।
  • वित्त वर्ष 2025 में यह आंकड़ा 15.2% से ज्यादा हो गया।

यानी निवेश का पैटर्न पूरी तरह बदल चुका है।


क्या लोग बैंक से पैसा निकाल रहे हैं?

वित्त वर्ष 2022 में बैंक डिपॉजिट का हिस्सा गिरकर 31.95% के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था। इससे यह सवाल उठा कि क्या लोग बैंकों से दूरी बना रहे हैं? लेकिन इकनॉमिक सर्वे के मुताबिक यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, लोग बैंकों को पूरी तरह छोड़ नहीं रहे, बल्कि: अपनी बचत को विविध (diversify) कर रहे हैं FD के साथ-साथ शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में भी निवेश जोड़ रहे हैं यानी अब निवेश की सोच एकतरफा नहीं बल्कि मल्टी-डायमेंशनल हो गई है।


जोखिम के बावजूद क्यों बढ़ा निवेश?

शेयर बाजार में रिटर्न की संभावना ज्यादा होती है, लेकिन जोखिम भी अधिक रहता है। इसके बावजूद भारतीय क्यों आगे बढ़ रहे हैं? इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:

  • FD पर कम ब्याज दर

बैंकों की FD पर ब्याज दरें लंबे समय से 5% से 7% के बीच सीमित रही हैं, जो महंगाई को मात नहीं दे पातीं।

  • शेयर बाजार में बेहतर रिटर्न

पिछले 10-15 वर्षों में Nifty और Sensex ने औसतन 12-15% सालाना रिटर्न दिया है।

  • म्यूचुअल फंड की आसान SIP

₹500 से SIP शुरू होने से मध्यम वर्ग और युवाओं की भागीदारी बढ़ी।

  • सोशल मीडिया और फाइनेंशियल एजुकेशन

YouTube, Instagram, और FinTech प्लेटफॉर्म ने निवेश को सरल भाषा में समझाया।


युवा निवेशक बन रहे गेम चेंजर

आज 18-35 वर्ष की उम्र के युवा निवेशक शेयर बाजार की सबसे बड़ी ताकत बन चुके हैं।

  • स्टूडेंट
  • फ्रेश ग्रेजुएट
  • स्टार्टअप प्रोफेशनल
  • IT सेक्टर कर्मचारी

ये सभी अब निवेश को भविष्य की सुरक्षा मानते हैं, न कि केवल अमीर बनने का जरिया।


डिजिटल प्लेटफॉर्म ने बदली तस्वीर

Zerodha, Groww, Upstox, Angel One जैसे प्लेटफॉर्म्स ने:

  • अकाउंट खोलना आसान
  • रियल टाइम ट्रेडिंग
  • शैक्षणिक कंटेंट
  • लो ब्रोकरेज

के जरिए निवेश को आम आदमी तक पहुंचाया।


बॉन्ड और सुरक्षित विकल्पों से दूरी क्यों?

RBI की रिपोर्ट बताती है कि फिलहाल कम जोखिम वाले बॉन्ड प्रोडक्ट्स में निवेश घटा है। इसकी वजह:

  • कम रिटर्न
  • जटिल प्रक्रिया
  • कम तरलता (Liquidity)

लोग अब तेजी से पैसा बढ़ाने वाले विकल्प चाहते हैं।


आंकड़े जो कहानी खुद बयां करते हैं

  • 2014 में आम लोगों की कुल इक्विटी होल्डिंग: 8 लाख करोड़ रुपये
  • सितंबर 2025 तक: करीब 84 लाख करोड़ रुपये

यानी 10 गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी।


क्या यह ट्रेंड सुरक्षित है?

विशेषज्ञों का मानना है कि:

“शेयर बाजार में निवेश अच्छी बात है, लेकिन बिना जानकारी और प्लानिंग के किया गया निवेश भारी नुकसान दे सकता है।”

इसलिए जरूरी है:

  • लॉन्ग टर्म सोच
  • SIP के जरिए निवेश
  • पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन
  • भावनाओं में बहकर ट्रेडिंग से बचाव

सरकार की भूमिका

सरकार और SEBI लगातार:

  • निवेशक जागरूकता अभियान
  • डिजिटल सेफ्टी
  • फ्रॉड रोकथाम
  • सरल KYC नियम

के जरिए निवेश को सुरक्षित बनाने पर जोर दे रहे हैं।

आगे पढ़िए: Epstein Files में PM मोदी का नाम? MEA ने दिया करारा जवाब

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