The Journalist News (Lucknow): राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे आमरण अनशन ने अब राजनीतिक हलकों का भी ध्यान अपनी ओर खींचना शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार, काकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दिपके ने मंगलवार को आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद से उनके आवास पर मुलाकात कर आंदोलन को समर्थन देने का अनुरोध किया। बताया जा रहा है कि चंद्रशेखर आजाद बुधवार को जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात करेंगे। यह आंदोलन पिछले 17 दिनों से आमरण अनशन के रूप में जारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं और सरकार से सकारात्मक पहल की अपेक्षा रखते हैं।

जंतर-मंतर पर जारी है धरना
दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहा है। वर्तमान में यहां अभिजीत दिपके के नेतृत्व में आंदोलन जारी है। आंदोलन में पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सहित कई अन्य प्रदर्शनकारी भी शामिल बताए जा रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है, जिसके चलते उन्होंने आमरण अनशन का रास्ता अपनाया है। हालांकि, प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

चंद्रशेखर आजाद से मांगा समर्थन
सूत्रों के अनुसार, अभिजीत दिपके ने चंद्रशेखर आजाद से मुलाकात कर आंदोलन के उद्देश्यों की जानकारी दी और समर्थन का अनुरोध किया। इसके बाद यह जानकारी सामने आई कि चंद्रशेखर आजाद जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात करेंगे और उनकी बात सुनेंगे। हालांकि, इस मुलाकात के बाद चंद्रशेखर आजाद की ओर से आंदोलन को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
आगे पढ़िए: यूपी समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव को लेकर बढ़ा सस्पेंस, समय से पहले होंगे या तय समय पर?
आंदोलन को मिल सकता है राजनीतिक बल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि किसी बड़े राजनीतिक दल या नेता का खुला समर्थन मिलता है तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक चर्चा मिल सकती है। चंद्रशेखर आजाद की जंतर-मंतर यात्रा को भी इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि उनका समर्थन केवल नैतिक होगा या आंदोलन को लेकर आगे कोई राजनीतिक रणनीति भी बनाई जाएगी।
प्रशासन की नजर
जंतर-मंतर पर चल रहे लंबे अनशन को देखते हुए दिल्ली पुलिस और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को सामान्य रखा गया है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सरकार के सामने रख रहे हैं।
आगे की स्थिति पर रहेगी नजर
अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि चंद्रशेखर आजाद के जंतर-मंतर पहुंचने के बाद आंदोलन को कितना राजनीतिक समर्थन मिलता है और सरकार की ओर से इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। यदि विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन बढ़ता है तो आंदोलन की दिशा और प्रभाव दोनों बदल सकते हैं।
Leave a comment