The Journalist News (Lucknow): उत्तर प्रदेश का वाराणसी शहर 16 जुलाई को ग्रामीण विकास और पंचायत सशक्तिकरण का राष्ट्रीय केंद्र बनने जा रहा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होने वाले ‘पंच सम्मेलन’ में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तराखंड के लगभग 500 ग्राम पंचायत प्रधान एक मंच पर जुटेंगे। सम्मेलन का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को अधिक सशक्त, पारदर्शी, जवाबदेह और विकासोन्मुख बनाना है। यह सम्मेलन ग्रामीण शासन प्रणाली को मजबूत करने के साथ-साथ ‘विकसित ग्राम-विकसित भारत’ के लक्ष्य को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इसमें विभिन्न राज्यों के पंचायत प्रतिनिधि अपने अनुभव साझा करेंगे और ग्रामीण विकास की नई रणनीतियों पर विचार-विमर्श करेंगे।
वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों की रहेगी मौजूदगी
सम्मेलन में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ग्रामीण विकास विभाग की संयुक्त सचिव रोहिणी आर. भाजीभाकरे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी, नीति विशेषज्ञ और विकास क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि भाग लेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सम्मेलन पंचायत प्रतिनिधियों को नई योजनाओं, नीतियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की बेहतर समझ विकसित करने में मदद करेंगे।

वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 पर होगा विशेष फोकस
सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायतों की संस्थागत क्षमता को मजबूत करना है। ग्राम प्रधानों को अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों, विकसित ग्राम पंचायत योजना, विभिन्न सरकारी योजनाओं के बेहतर समन्वय (कन्वर्जेंस), पारदर्शिता, जवाबदेही और साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। सरकार का मानना है कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में पंचायतों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और उन्हें आधुनिक प्रशासनिक तकनीकों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
तकनीकी सत्रों में साझा होंगे नवाचार और सफल मॉडल
सम्मेलन के दौरान जीआईजेड (GIZ), प्रदान (PRADAN) और राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (NIRDPR) के विशेषज्ञ विभिन्न तकनीकी सत्रों को संबोधित करेंगे। इन सत्रों में डिजिटल गवर्नेंस, ग्राम विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, सामुदायिक भागीदारी, वित्तीय प्रबंधन, सामाजिक जवाबदेही और स्थानीय स्तर पर नवाचार जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तराखंड के ग्राम प्रधान अपने-अपने क्षेत्रों में लागू सफल विकास मॉडल, नवाचार और जमीनी अनुभव साझा करेंगे, ताकि अन्य पंचायतें भी उनसे सीख लेकर बेहतर कार्यप्रणाली अपना सकें।
चार राज्यों से आएंगे 500 पंचायत प्रतिनिधि
सम्मेलन में चार राज्यों से बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी होगी।
- उत्तर प्रदेश – 350 ग्राम प्रधान
- बिहार – 75 ग्राम प्रधान
- झारखंड – 50 ग्राम प्रधान
- उत्तराखंड – 25 ग्राम प्रधान
इन प्रतिनिधियों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान से पंचायत स्तर पर बेहतर प्रशासनिक मॉडल विकसित करने में सहायता मिलेगी।
‘विकसित ग्राम-विकसित भारत’ को मिलेगी नई दिशा
ग्रामीण विकास मंत्रालय का मानना है कि यदि ग्राम पंचायतें मजबूत होंगी तो ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंचेगा। सम्मेलन के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों को नीति निर्माण, योजना क्रियान्वयन, पारदर्शिता और जनभागीदारी के आधुनिक तरीकों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि पंचायतों की संस्थागत क्षमता बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी। वाराणसी में आयोजित होने वाला यह ‘पंच सम्मेलन’ केवल एक बैठक नहीं, बल्कि ग्राम स्वराज, स्थानीय शासन और ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे विभिन्न राज्यों के बीच सहयोग बढ़ेगा और गांवों के समग्र विकास के लिए नई रणनीतियों को लागू करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
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