The Journalist News (Lucknow): केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उद्योग जगत से कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से कृषि अनुसंधान, किसानों के सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास में अधिक निवेश करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि “देश हमें सब कुछ देता है, इसलिए हम भी देश को कुछ लौटाना सीखें।” भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा आयोजित CSR कॉन्क्लेव-2026 को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक सीधे किसानों तक पहुंचे। उन्होंने उद्योग जगत, वैज्ञानिक समुदाय और सरकार के बीच मजबूत साझेदारी पर जोर देते हुए कहा कि “विज्ञान से किसान तक” की सोच ही भारत की कृषि को नई दिशा दे सकती है।
CSR केवल दायित्व नहीं, राष्ट्र निर्माण का माध्यम
शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी के ट्रस्टीशिप सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि उद्योगों और कंपनियों के पास उपलब्ध संसाधन केवल उनके नहीं, बल्कि समाज की भी अमानत हैं। इसलिए CSR को केवल कानूनी बाध्यता के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के नैतिक दायित्व के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि उद्योग जगत कृषि अनुसंधान, किसानों के प्रशिक्षण, ग्रामीण शिक्षा और नवाचार में निवेश करेगा तो इसका लाभ पूरे देश को मिलेगा।

एग्रीटेक और स्टार्टअप को मिलेगा नया प्रोत्साहन
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि CSR फंड के माध्यम से एग्रीटेक स्टार्टअप, ड्रोन तकनीक, कृषि कौशल विकास, फूड प्रोसेसिंग और एग्री-बिजनेस जैसे क्षेत्रों को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीकों के उपयोग से खेती अधिक उत्पादक और लाभदायक बनेगी। इससे युवाओं को कृषि क्षेत्र में नए रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी प्राप्त होंगे।
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महिला किसानों और SHGs पर विशेष फोकस
शिवराज सिंह चौहान ने ‘ड्रोन दीदी’ जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये पहल ग्रामीण भारत में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। उन्होंने उद्योग जगत से आग्रह किया कि वे अपनी CSR योजनाओं में महिला किसानों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और ग्रामीण उद्यमिता को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को गति मिलेगी।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए टिकाऊ खेती जरूरी
केंद्रीय मंत्री ने बदलते जलवायु संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य की कृषि को जलवायु-अनुकूल, टिकाऊ और पर्यावरण हितैषी बनाना होगा। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैविक कार्बन बढ़ाने, पोषणयुक्त खाद्यान्न उत्पादन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष बल दिया। साथ ही बिना परीक्षण के उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से बचने की सलाह देते हुए कहा कि स्वस्थ मिट्टी ही स्वस्थ समाज की आधारशिला है।
CSR से विकसित भारत का सपना होगा साकार
अपने संबोधन के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने उद्योग जगत से अपील की कि वे कानून के तहत निर्धारित 2 प्रतिशत CSR को केवल औपचारिकता न मानें, बल्कि इसे किसानों, कृषि अनुसंधान और ग्रामीण विकास में निवेश का प्रभावी माध्यम बनाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार, वैज्ञानिक संस्थानों और निजी क्षेत्र की साझेदारी भारतीय कृषि को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और विकसित भारत के निर्माण का सपना तेजी से साकार होगा।
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