उत्तर प्रदेश विधानसभा के आगामी बजट सत्र से पहले आज विधानसभा परिसर में कार्य मंत्रणा समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है। यह बैठक विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की अध्यक्षता में सुबह 11 बजे होगी। बैठक में बजट सत्र की अवधि, सदन की कार्यवाही का स्वरूप और प्रमुख विषयों पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इसी के आधार पर यह तय होगा कि बजट सत्र कितने दिनों तक चलेगा, किन तारीखों पर सदन की बैठकें होंगी और सरकार किन विधायी कार्यों को प्राथमिकता देगी।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना करेंगे बैठक की अध्यक्षता
कार्य मंत्रणा समिति की इस बैठक की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना करेंगे। अध्यक्ष के रूप में यह उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी है कि सदन की कार्यवाही सुचारू और लोकतांत्रिक तरीके से संचालित हो। सूत्रों के मुताबिक, सतीश महाना बैठक में सभी दलों को समान अवसर देने और उनकी बातों को सुनने पर विशेष जोर देंगे। उनका प्रयास रहेगा कि सत्र की कार्यवाही बिना किसी बाधा के पूरी हो और सदन का अधिकतम समय जनहित के मुद्दों पर चर्चा में लगे।
सदन की अवधि तय करने पर होगा मंथन
आज की बैठक का सबसे अहम एजेंडा आगामी बजट सत्र की अवधि तय करना है। आमतौर पर बजट सत्र विधानसभा का सबसे महत्वपूर्ण सत्र माना जाता है, जिसमें राज्य सरकार अपने वार्षिक आय-व्यय का लेखा-जोखा पेश करती है। बैठक में इस बात पर चर्चा होगी कि:
- बजट सत्र कितने दिनों का होगा
- कितने कार्यदिवस रखे जाएंगे
- अवकाश और सप्ताहांत को कैसे समायोजित किया जाएगा
- प्रश्नकाल और शून्यकाल की समय-सीमा क्या होगी
विपक्षी दल आमतौर पर लंबी अवधि की मांग करते हैं ताकि अधिक से अधिक मुद्दों पर चर्चा हो सके, जबकि सरकार समयबद्ध कार्यवाही पर जोर देती है।
सभी दलों के नेता रहेंगे मौजूद
कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में सत्तारूढ़ दल के साथ-साथ विपक्ष के सभी प्रमुख दलों के नेता मौजूद रहेंगे। इनमें समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और अन्य सहयोगी दलों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।बैठक में सभी दलों को अपने सुझाव रखने का अवसर मिलेगा। विपक्षी दल खास तौर पर कानून-व्यवस्था, महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और विकास कार्यों को लेकर चर्चा की मांग कर सकते हैं।
बजट सत्र को लेकर बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
बजट सत्र से पहले ही प्रदेश की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। सत्तारूढ़ दल जहां अपने विकास कार्यों और योजनाओं को सदन में प्रमुखता से रखने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति बना रहा है। कार्य मंत्रणा समिति की बैठक को इसी राजनीतिक तैयारी का पहला औपचारिक कदम माना जा रहा है।
बजट सत्र में क्या रहेगा खास
सूत्रों के अनुसार, इस बार के बजट सत्र में राज्य सरकार:
- बुनियादी ढांचे के विकास
- युवाओं के लिए रोजगार योजनाएं
- किसानों के लिए राहत पैकेज
- शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए नई घोषणाएं
जैसे विषयों को प्रमुखता से रख सकती है। विधानसभा में बजट पेश किए जाने के बाद उस पर विस्तृत चर्चा होगी, जिसके लिए पर्याप्त समय तय करना कार्य मंत्रणा समिति की जिम्मेदारी होगी।
सदन की सुचारू कार्यवाही पर रहेगा जोर
हाल के वर्षों में कई बार विधानसभा सत्रों के दौरान हंगामे और बाधाओं के चलते सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई है। ऐसे में इस बार बैठक में इस बात पर भी चर्चा हो सकती है कि सदन को सुचारू रूप से कैसे चलाया जाए। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना पहले भी कई बार सभी दलों से सहयोग की अपील कर चुके हैं ताकि लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन हो सके।
विपक्ष की संभावित रणनीति
विपक्षी दल इस बजट सत्र को सरकार को घेरने का बड़ा अवसर मान रहे हैं। संभावना है कि वे:
- कानून-व्यवस्था की स्थिति
- भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं
- महंगाई और बिजली दरों
- किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों
को प्रमुखता से उठाएंगे। इसी वजह से विपक्ष लंबे सत्र और अधिक चर्चा समय की मांग कर सकता है।
सरकार का फोकस: विकास और बजट
सरकार की ओर से बैठक में शामिल नेता यह प्रयास करेंगे कि बजट सत्र व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से चले। सरकार का फोकस बजट पारित कराने के साथ-साथ विधायी कार्यों को पूरा करने पर रहेगा। सरकार यह भी चाहेगी कि प्रश्नकाल और चर्चाओं के दौरान विकास कार्यों और योजनाओं को जनता के सामने प्रभावी ढंग से रखा जाए।
कार्य मंत्रणा समिति की भूमिका क्यों अहम
कार्य मंत्रणा समिति को विधानसभा की “टाइम मैनेजमेंट बॉडी” कहा जाता है। यह तय करती है कि:
- कौन सा विषय कब चर्चा में आएगा
- सरकार और विपक्ष को कितना समय मिलेगा
- किन विधेयकों को प्राथमिकता दी जाएगी
इसी वजह से बजट सत्र से पहले इस समिति की बैठक को बेहद अहम माना जाता है।
बैठक के बाद क्या होगा अगला कदम
आज की बैठक के बाद कार्य मंत्रणा समिति की सिफारिशें विधानसभा सचिवालय को भेजी जाएंगी। इसके आधार पर:
- सत्र का आधिकारिक कैलेंडर जारी होगा
- विधायी कार्यसूची तय की जाएगी
- विधायकों को सत्र की तारीखों की सूचना दी जाएगी
इसके बाद बजट सत्र की औपचारिक घोषणा की जाएगी।
आगे पढ़िए: आयुर्वेदिक कॉलेज प्राचार्य रिजल्ट जारी, मचा हड़कंप
Leave a comment