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विधानमंडल का बजट सत्र कल से, 11 फरवरी को पेश होगा 9 लाख करोड़ का बजट

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Source: Amar Ujala
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उत्तर प्रदेश विधानमंडल का बजट सत्र कल से शुरू होने जा रहा है। इस सत्र के दौरान 11 फरवरी को राज्य सरकार विधानसभा में वार्षिक बजट पेश करेगी। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस बार का बजट करीब 9 लाख करोड़ रुपये का होगा, जो अब तक के सबसे बड़े बजटों में से एक माना जा रहा है। सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस बजट का मुख्य फोकस प्रदेश के समग्र विकास और आम जनता की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर रहेगा। खासतौर पर सड़क, पुल, शहरी विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर खर्च किए जाने की संभावना है।

विकास को प्राथमिकता, जनता पर रहेगा फोकस

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बजट तैयार करते समय सरकार ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि विकास योजनाओं का सीधा लाभ आम लोगों तक पहुंचे। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि मजबूत बुनियादी ढांचा न सिर्फ आर्थिक विकास को गति देता है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करता है। इसी वजह से इस बार के बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जा रही है।

इंफ्रास्ट्रक्चर पर सबसे बड़ा दांव

अनुमान है कि कुल बजट का करीब 25 प्रतिशत हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया जाएगा। इसमें शामिल होंगे:

  • नई सड़कों और हाईवे का निर्माण
  • पुल और फ्लाईओवर परियोजनाएं
  • औद्योगिक कॉरिडोर का विस्तार
  • स्मार्ट सिटी योजनाओं को गति
  • ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सुधार

सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर हिस्से को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाए, ताकि व्यापार, उद्योग और आम लोगों की आवाजाही आसान हो सके।

शिक्षा क्षेत्र को मिलेगा 15 प्रतिशत बजट

बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए लगभग 15 प्रतिशत हिस्सेदारी तय किए जाने का अनुमान है। सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और आधुनिक जरूरतों के अनुरूप ढांचे को मजबूत करने पर जोर दे सकती है। संभावित घोषणाओं में शामिल हो सकते हैं:

  • सरकारी स्कूलों का कायाकल्प
  • कॉलेज और विश्वविद्यालयों में नई सुविधाएं
  • डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा
  • शिक्षकों की ट्रेनिंग और नियुक्ति
  • तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा पर जोर

सरकार का मानना है कि शिक्षा में निवेश से ही भविष्य की मजबूत नींव रखी जा सकती है।

कृषि पर 12 प्रतिशत खर्च का अनुमान

प्रदेश की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है, ऐसे में बजट में कृषि क्षेत्र को भी अहम स्थान दिया गया है। अनुमान के मुताबिक, कुल बजट का 12 प्रतिशत हिस्सा कृषि से जुड़ी योजनाओं पर खर्च किया जाएगा। इसमें शामिल हो सकते हैं:

  • सिंचाई परियोजनाएं
  • किसानों को सब्सिडी और सहायता
  • फसल बीमा योजनाएं
  • आधुनिक खेती को बढ़ावा
  • कृषि बाजारों का विकास

सरकार का फोकस किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने पर रहेगा।

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 8 प्रतिशत बजट

कोविड के बाद से स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकारें ज्यादा सतर्क हुई हैं। इस बार के बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए लगभग 8 प्रतिशत राशि आवंटित किए जाने का अनुमान है। संभावित प्राथमिकताएं:

  • जिला अस्पतालों का सुदृढ़ीकरण
  • नए मेडिकल कॉलेज
  • ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की मजबूती
  • आधुनिक उपकरण और सुविधाएं
  • मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम

सरकार का लक्ष्य है कि आम लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर 5 प्रतिशत खर्च

बजट में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए करीब 5 प्रतिशत राशि खर्च किए जाने की संभावना है। इसमें शामिल होंगी:

  • वृद्धावस्था पेंशन
  • विधवा और दिव्यांग पेंशन
  • गरीब और कमजोर वर्गों के लिए योजनाएं
  • महिला कल्याण कार्यक्रम

सरकार का दावा है कि इन योजनाओं के जरिए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सहायता पहुंचाई जाएगी।

वित्तीय संतुलन बनाए रखने की चुनौती

जहां एक ओर सरकार विकास पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर वित्तीय संतुलन बनाए रखना भी उसके लिए बड़ी चुनौती है। सूत्रों के अनुसार, सरकार बजट घाटे को नियंत्रित रखने और राजकोषीय अनुशासन का पालन करने की कोशिश करेगी। इसके लिए:

  • राजस्व बढ़ाने के उपाय
  • खर्चों पर नियंत्रण
  • योजनाओं की प्रभावी निगरानी

जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

बजट सत्र को लेकर राजनीतिक सरगर्मी

बजट सत्र से पहले प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ दल जहां इस बजट को विकासोन्मुखी और जनकल्याणकारी बताने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति बना रहा है। विपक्ष की ओर से:

  • महंगाई
  • बेरोजगारी
  • कानून-व्यवस्था
  • किसानों की समस्याएं

जैसे मुद्दों को उठाए जाने की संभावना है।

विधानसभा में तीखी बहस के आसार

बजट पेश होने के बाद उस पर विस्तृत चर्चा होगी। माना जा रहा है कि विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। विपक्ष बजट को लेकर सवाल उठाएगा, जबकि सरकार अपनी नीतियों और योजनाओं का बचाव करेगी। विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका इस दौरान अहम होगी, ताकि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चल सके।

आम जनता की उम्मीदें

आम लोगों को इस बजट से कई उम्मीदें हैं। खासतौर पर:

  • रोजगार के नए अवसर
  • बेहतर सड़क और परिवहन
  • शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार
  • किसानों को राहत

जैसे मुद्दों पर लोगों की नजरें टिकी हैं। सरकार भी यह दावा कर रही है कि बजट में हर वर्ग का ध्यान रखा गया है।

आगे पढ़िए: लखनऊ: बजट सत्र से पहले विधानसभा में आज कार्य मंत्रणा समिति की अहम बैठक

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