राजधानी लखनऊ में पतंगबाजी के दौरान इस्तेमाल हो रहे खतरनाक मांझे से होने वाली घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला नाका की ओर जाने वाले फ्लाईओवर का है, जहां अचानक सड़क पर गिरे पतंग के मांझे की चपेट में आने से एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों ने घायल युवक को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ दिनों में राजधानी के अलग-अलग इलाकों, खासकर फ्लाईओवर और मुख्य सड़कों पर, मांझे से घायल होने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद सुरक्षा और बचाव के पुख्ता इंतजाम न होने से लोगों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।
नाका फ्लाईओवर पर हुआ हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, युवक बाइक से नाका की ओर जा रहा था। तभी अचानक सड़क के बीच हवा में लटकता हुआ पतंग का मांझा उसकी गर्दन और हाथ के पास आ गया। मांझा इतना तेज और धारदार था कि युवक संभल भी नहीं पाया और घायल हो गया। घटना के तुरंत बाद राहगीरों ने बाइक रुकवाई और युवक को सड़क किनारे बैठाया। कुछ लोगों ने पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी, जबकि अन्य ने खुद के स्तर पर प्राथमिक मदद पहुंचाई।
अचानक गिरा मांझा बना हादसे की वजह
स्थानीय लोगों का कहना है कि फ्लाईओवर पर अक्सर पतंग का मांझा हवा में लटकता रहता है। कई बार पतंग कटने के बाद मांझा अचानक नीचे गिर जाता है, जिससे बाइक सवार, साइकिल सवार और पैदल चलने वाले लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं। इस मामले में भी बताया जा रहा है कि ऊपर किसी छत या खुले स्थान से उड़ाई जा रही पतंग अचानक कट गई और उसका मांझा सीधे सड़क पर गिर गया, जिससे यह हादसा हुआ।
फ्लाईओवर बन रहे हैं सबसे खतरनाक जगह
लखनऊ में मांझे से होने वाली अधिकांश घटनाएं फ्लाईओवर पर ही सामने आ रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि:
- फ्लाईओवर खुले और ऊंचे होते हैं
- हवा की रफ्तार ज्यादा रहती है
- पतंग का मांझा लंबे समय तक हवा में लटका रहता है
- बाइक और कार की रफ्तार ज्यादा होती है
इन परिस्थितियों में मांझा बेहद जानलेवा साबित हो रहा है।
पहले भी हो चुके हैं कई हादसे
पिछले कुछ समय में राजधानी के हजरतगंज, आलमबाग, चारबाग, नाका और गोमतीनगर जैसे इलाकों से भी मांझे से घायल होने की खबरें सामने आ चुकी हैं। कई मामलों में लोगों की गर्दन, हाथ और चेहरे पर गंभीर कट लगे हैं। कुछ घटनाओं में पक्षियों के घायल होने और मरने की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे पर्यावरण प्रेमियों और पशु अधिकार संगठनों में भी नाराजगी है।
सुरक्षा इंतजामों की कमी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लगातार घटनाएं हो रही हैं, तो फ्लाईओवर और मुख्य सड़कों पर सुरक्षा और बचाव के इंतजाम क्यों नहीं किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि:
- कहीं भी चेतावनी बोर्ड नहीं लगे हैं
- पुलिस की नियमित गश्त नहीं दिखती
- प्रतिबंधित मांझे की खुलेआम बिक्री हो रही है
- फ्लाईओवर पर किसी तरह की सेफ्टी वायर या नेट नहीं लगाए गए हैं
इन सब वजहों से आम लोगों की जान खतरे में पड़ी हुई है।
प्रतिबंध के बावजूद बिक रहा खतरनाक मांझा
हालांकि प्रशासन की ओर से पहले ही साफ किया जा चुका है कि चाइनीज मांझा और अन्य धारदार सिंथेटिक मांझा प्रतिबंधित है, लेकिन हकीकत में यह अब भी बाजार में आसानी से मिल रहा है। स्थानीय दुकानदारों और अस्थायी ठेलों पर खुलेआम पतंग और मांझा बिकता नजर आता है। कई लोग सस्ते और मजबूत मांझे के लालच में खतरनाक मांझे का इस्तेमाल कर रहे हैं।
पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल
घटनाओं के बाद अक्सर पुलिस की ओर से जांच और कार्रवाई की बात कही जाती है, लेकिन जमीन पर इसका असर कम ही नजर आता है। लोगों का कहना है कि:
- कुछ दिनों की सख्ती के बाद कार्रवाई ठंडी पड़ जाती है
- छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई होती है, लेकिन सप्लाई चेन पर नहीं
- जागरूकता अभियान बेहद सीमित हैं
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कब तक लोग इसी तरह घायल होते रहेंगे।
आम लोगों में डर और नाराजगी
इन घटनाओं के बाद खासतौर पर दोपहिया वाहन चालकों में डर का माहौल है। लोग गर्दन पर कपड़ा, दुपट्टा या स्कार्फ बांधकर निकलने को मजबूर हैं। एक स्थानीय युवक ने कहा, “अब सड़क पर चलना भी सुरक्षित नहीं रह गया है। कब कहां से मांझा आ जाए, कोई भरोसा नहीं।
प्रशासन को उठाने होंगे सख्त कदम
लोगों की मांग है कि प्रशासन अब सिर्फ चेतावनी नहीं, बल्कि सख्त कदम उठाए। इसमें शामिल हो सकता है:
- खतरनाक मांझे की बिक्री पर कड़ी कार्रवाई
- पतंगबाजी के समय विशेष निगरानी
- फ्लाईओवर पर सुरक्षा इंतजाम
- जागरूकता अभियान
जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाना मुश्किल होगा।
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