पटना
बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियां ज़ोरों पर हैं। चुनाव आयोग ने दो चरणों में मतदान कराने की घोषणा की है। पहला चरण 6 नवंबर को और दूसरा चरण 11 नवंबर को होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी। राज्य की 243 सीटों पर मुकाबला दिलचस्प होने वाला है क्योंकि बहुमत के लिए किसी भी दल को 122 सीटों की जरूरत होगी।
प्रमुख राजनीतिक समीकरण
सत्ता पक्ष में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यू) (JDU) की अगुवाई में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) मैदान में है, जबकि विपक्षी खेमे में राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस और अन्य दल मिलकर महागठबंधन या इंडिया गठबंधन (INDIA bloc) के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। दोनों गठबंधनों ने सीट बंटवारे की रणनीति लगभग तय कर ली है और उम्मीदवारों की सूची भी जारी कर दी है।
मुख्य मुद्दे और चुनौतियाँ
इस चुनाव में मुख्य मुद्दे बेरोजगारी, शिक्षा, महंगाई और विकास कार्यों की रफ्तार हैं। युवा मतदाता इस बार अहम भूमिका निभाने वाले हैं क्योंकि राज्य में 18 से 35 वर्ष के वोटरों की संख्या सबसे अधिक है। इसके अलावा, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था जैसे विषय भी चर्चा में हैं।
चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए नई तकनीक और अतिरिक्त बूथों की व्यवस्था की है। नकदी, शराब और अवैध तरीकों से वोटरों को प्रभावित करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस बार लगभग 7.4 करोड़ मतदाता अपने प्रतिनिधि चुनने के लिए वोट डालेंगे।
राज्य की राजनीति में यह चुनाव एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार फिर से सत्ता में लौटेगी या तेजस्वी यादव की RJD को मौका मिलेगा, यह आने वाला वक्त बताएगा। जनता की उम्मीदें इस बार विकास और रोज़गार से जुड़ी हैं। कुल मिलाकर, 2025 का बिहार चुनाव सिर्फ राजनीतिक परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य की दिशा तय करेगा।
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