केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने आयुष और पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को अभूतपूर्व बढ़ावा देने का ऐलान किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों, पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब और आयुष फार्मेसियों के व्यापक अपग्रेडेशन की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना, देश को मेडिकल टूरिज्म का वैश्विक केंद्र बनाना और स्वास्थ्य क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
आयुष सेक्टर को क्यों मिल रहा है बड़ा बूस्ट?
बीते कुछ वर्षों में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की लोकप्रियता देश ही नहीं, विदेशों में भी तेजी से बढ़ी है। कोविड महामारी के बाद लोगों का झुकाव नेचुरल और होलिस्टिक ट्रीटमेंट की ओर और अधिक बढ़ा है। सरकार का मानना है कि आयुष सेक्टर में निवेश बढ़ाकर न केवल बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकती हैं, बल्कि भारत को मेडिकल टूरिज्म का वैश्विक हब भी बनाया जा सकता है।
तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया कि देश में तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (All India Institute of Ayurveda – AIIA) स्थापित किए जाएंगे। इन संस्थानों में:
- आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं
- आयुर्वेदिक उपचार
- अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक लैब
- पोस्ट-केयर और पुनर्वास केंद्र
मौजूद होंगे, जिससे मरीजों को समग्र और इंटीग्रेटेड हेल्थकेयर सेवाएं मिल सकें। इन संस्थानों का उद्देश्य आयुर्वेद को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़ना और रिसर्च व ट्रेनिंग को बढ़ावा देना है।
पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब होंगे विकसित
बजट में सरकार ने पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित करने में राज्यों की मदद करने का प्रस्ताव रखा है। ये हब:
- आयुष केंद्र
- आधुनिक डायग्नोस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर
- पोस्ट-केयर और रिहैबिलिटेशन फैसिलिटी
- मेडिकल टूरिज्म से जुड़ी सेवाएं
से लैस होंगे। इन हबों का मकसद समग्र स्वास्थ्य सेवा वितरण का विस्तार करना और देश को मेडिकल टूरिज्म के वैश्विक नक्शे पर मजबूती से स्थापित करना है।
मेडिकल टूरिज्म को मिलेगा जबरदस्त बढ़ावा
भारत पहले से ही सस्ते और उच्च गुणवत्ता वाले इलाज के कारण मेडिकल टूरिज्म के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बन चुका है। अब सरकार का फोकस है:
- आयुर्वेदिक उपचार
- पंचकर्म
- योग थेरेपी
- वेलनेस ट्रीटमेंट
को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना। इन पांच मेडिकल हब के जरिए विदेशी मरीजों को आधुनिक चिकित्सा के साथ आयुष आधारित उपचार की सुविधा मिलेगी, जिससे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि और मजबूत होगी।
अपग्रेड होंगी आयुष फार्मेसियां और लैब
बजट 2026 में आयुष फार्मेसियों और दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं (Drug Testing Laboratories) को अपग्रेड करने का भी बड़ा ऐलान किया गया है। इस योजना के तहत:
- आधुनिक मशीनें
- हाई-टेक टेस्टिंग फैसिलिटी
- बेहतर क्वालिटी कंट्रोल
- रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर
तैयार किया जाएगा, जिससे आयुष दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके। सरकार का लक्ष्य है कि भारतीय आयुष उत्पाद वैश्विक मानकों पर खरे उतरें और निर्यात को बढ़ावा मिले।
रोजगार के नए अवसर
इस पूरी पहल से हजारों नए रोजगार अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इनमें शामिल हैं:
- आयुर्वेद डॉक्टर
- योग ट्रेनर
- फार्मासिस्ट
- लैब टेक्नीशियन
- नर्सिंग स्टाफ
- रिसर्च स्कॉलर
- हेल्थ टूरिज्म प्रोफेशनल
विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य इकोसिस्टम को मजबूत करेगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खोलेगी।
छोटे टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत
बजट 2026 में सरकार ने छोटे टैक्सपेयर्स को भी बड़ी राहत देने का ऐलान किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा:
“मैं छोटे टैक्सपेयर्स के लिए एक नई स्कीम का प्रस्ताव करती हूं, जिसमें एक नियम-आधारित ऑटोमेटेड प्रोसेस के जरिए कम या शून्य डिडक्शन सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।”
इसका मतलब है कि अब करदाताओं को:
- असेसिंग ऑफिसर के पास आवेदन देने
- लंबी प्रक्रिया से गुजरने
- बार-बार दस्तावेज जमा करने
की जरूरत नहीं होगी।
Form 15G और 15H को लेकर बड़ा बदलाव
वित्त मंत्री ने एक और अहम ऐलान करते हुए कहा कि:
“डिपॉजिटरी को इन्वेस्टर से Form 15G और Form 15H स्वीकार करने और इसे सीधे संबंधित कंपनियों तक पहुंचाने की सुविधा दी जाएगी।”
इससे उन टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिलेगी, जिनकी कई कंपनियों में सिक्योरिटीज होल्डिंग होती है। अब उन्हें अलग-अलग कंपनियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, जिससे:
- समय की बचत
- कागजी कार्रवाई में कमी
- तेज प्रोसेसिंग
सुनिश्चित होगी।
हेल्थ सेक्टर के लिए क्यों अहम है यह बजट?
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट 2026 में आयुष और हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया गया यह निवेश दीर्घकालिक विकास के लिए बेहद अहम है। इसके फायदे:
- ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं
- इलाज की लागत में कमी
- मेडिकल टूरिज्म से विदेशी मुद्रा अर्जन
- रोजगार सृजन
- पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक पहचान
आयुष सेक्टर से आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम
सरकार का यह कदम ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन के अनुरूप है, क्योंकि:
- घरेलू दवा उद्योग को बढ़ावा
- आयुष उत्पादों का निर्यात
- लोकल फार्मेसी नेटवर्क का विस्तार
भारत को हेल्थकेयर और वेलनेस इंडस्ट्री में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मदद करेगा।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञों का कहना है कि:
“तीन नए आयुर्वेद संस्थान और मेडिकल हब भारत की पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।”
वहीं टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार:
“छोटे टैक्सपेयर्स के लिए ऑटोमेटेड प्रोसेस टैक्स सिस्टम को अधिक सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनाएगा।”
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