सोने की कीमतों में जो तेजी दिख रही है, वह अचानक नहीं है। इसके पीछे वैश्विक राजनीति, युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता और सेंट्रल बैंकों की रणनीति छिपी है। बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं कि गोल्ड महंगा क्यों हो रहा है, बल्कि यह भी है कि क्या यह आने वाले बड़े बदलाव का संकेत है।
सोना क्यों बन गया ग्लोबल सेफ हेवन?
बीते कुछ वर्षों में सोना सिर्फ एक कीमती धातु नहीं रहा। यह अब ग्लोबल पॉलिटिक्स, युद्ध और आर्थिक अस्थिरता का सबसे भरोसेमंद पैमाना बन चुका है। निवेशकों से लेकर दुनियाभर के सेंट्रल बैंक तक, सभी इसे सेफ हेवन मान रहे हैं।
भारत इसका बड़ा उदाहरण है।
- 2020: भारत का गोल्ड रिजर्व 661 टन
- 2025: बढ़कर 879 टन
सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया के कई देश तेजी से अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। पिछले पांच सालों में गोल्ड ने शेयर बाजार समेत कई एसेट क्लास को पीछे छोड़ दिया है।
सेंट्रल बैंक क्यों खरीद रहे हैं भारी मात्रा में सोना?
सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी का सबसे बड़ा कारण सेंट्रल बैंकों की खरीदारी है।
- 2022 से 2024 के बीच दुनिया के सेंट्रल बैंकों ने करीब 3200 टन सोना खरीदा
- रूस, चीन, भारत और तुर्किये इस लिस्ट में सबसे आगे
- कई देश धीरे-धीरे अपने फॉरेन रिजर्व में डॉलर की हिस्सेदारी घटा रहे हैं
यह साफ करता है कि गोल्ड अब सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि सरकारी रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है।
संकट के समय सोना क्यों चमकता है?
इतिहास गवाह है कि जब भी दुनिया में बड़ा संकट आया, सोने की कीमतें आसमान छूने लगीं।
- 1970 का दशक: ईरान क्रांति, योम किपूर वॉर
- 2008: लेहमन ब्रदर्स संकट
- 2022: रूस-यूक्रेन युद्ध
अनिश्चितता के दौर में लोग ऐसी संपत्ति चाहते हैं जो अपनी वैल्यू बनाए रखे और सोना इसमें सबसे आगे है
ब्रेटन वुड्स से निक्सन शॉक तक
1944 के ब्रेटन वुड्स एग्रीमेंट में डॉलर को गोल्ड से जोड़ा गया।
उस समय अमेरिका के पास दुनिया का लगभग 66% गोल्ड रिजर्व था।
लेकिन 1971 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने डॉलर को गोल्ड से अलग कर दिया इसे निक्सन शॉक कहा जाता है।
इसके बाद:
- अमेरिका को ज्यादा पैसा छापने की आजादी मिली
- डॉलर पर कई देशों का भरोसा कमजोर हुआ
- 1971 से 1980 के बीच गोल्ड 38 डॉलर से बढ़कर 636 डॉलर प्रति औंस पहुंच गया
डॉलर सिस्टम पर क्यों बढ़ रहा डर?
हाल के वर्षों में डॉलर को लेकर चिंता बढ़ी है।
- रूस, चीन, भारत और ब्राजील US ट्रेजरी होल्डिंग घटा रहे हैं
- 2022 में अमेरिका ने रूस के करीब 300 बिलियन डॉलर फ्रीज किए
इस घटना ने कई देशों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि उनके रिजर्व भी कभी खतरे में पड़ सकते हैं।
गोल्ड ऐसा एसेट है जिसे न आसानी से फ्रीज किया जा सकता है, न किसी एक देश की पॉलिसी पर इसकी वैल्यू निर्भर करती है।सोने की कीमतों में जो तेजी दिख रही है, वह अचानक नहीं है। इसके पीछे वैश्विक राजनीति, युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता और सेंट्रल बैंकों की रणनीति छिपी है। बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं कि गोल्ड महंगा क्यों हो रहा है, बल्कि यह भी है कि क्या यह आने वाले बड़े बदलाव का संकेत है?
सोना क्यों बन गया ग्लोबल सेफ हेवन?
बीते कुछ वर्षों में सोना सिर्फ एक कीमती धातु नहीं रहा। यह अब ग्लोबल पॉलिटिक्स, युद्ध और आर्थिक अस्थिरता का सबसे भरोसेमंद पैमाना बन चुका है। निवेशकों से लेकर दुनियाभर के सेंट्रल बैंक तक, सभी इसे सेफ हेवन मान रहे हैं।
भारत इसका बड़ा उदाहरण है।
- 2020: भारत का गोल्ड रिजर्व 661 टन
- 2025: बढ़कर 879 टन
सिर्फ भारत ही नहीं, दुनिया के कई देश तेजी से अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। पिछले पांच सालों में गोल्ड ने शेयर बाजार समेत कई एसेट क्लास को पीछे छोड़ दिया है।
सेंट्रल बैंक क्यों खरीद रहे हैं भारी मात्रा में सोना?
सोने की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी का सबसे बड़ा कारण सेंट्रल बैंकों की खरीदारी है।
- 2022 से 2024 के बीच दुनिया के सेंट्रल बैंकों ने करीब 3200 टन सोना खरीदा
- रूस, चीन, भारत और तुर्किये इस लिस्ट में सबसे आगे
- कई देश धीरे-धीरे अपने फॉरेन रिजर्व में डॉलर की हिस्सेदारी घटा रहे हैं
यह साफ करता है कि गोल्ड अब सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि सरकारी रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है।
संकट के समय सोना क्यों चमकता है?
इतिहास गवाह है कि जब भी दुनिया में बड़ा संकट आया, सोने की कीमतें आसमान छूने लगीं।
- 1970 का दशक: ईरान क्रांति, योम किपूर वॉर
- 2008: लेहमन ब्रदर्स संकट
- 2022: रूस-यूक्रेन युद्ध
अनिश्चितता के दौर में लोग ऐसी संपत्ति चाहते हैं जो अपनी वैल्यू बनाए रखे और सोना इसमें सबसे आगे है
ब्रेटन वुड्स से निक्सन शॉक तक
1944 के ब्रेटन वुड्स एग्रीमेंट में डॉलर को गोल्ड से जोड़ा गया।
उस समय अमेरिका के पास दुनिया का लगभग 66% गोल्ड रिजर्व था।
लेकिन 1971 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने डॉलर को गोल्ड से अलग कर दिया, इसे निक्सन शॉक कहा जाता है।
इसके बाद:
- अमेरिका को ज्यादा पैसा छापने की आजादी मिली
- डॉलर पर कई देशों का भरोसा कमजोर हुआ
- 1971 से 1980 के बीच गोल्ड 38 डॉलर से बढ़कर 636 डॉलर प्रति औंस पहुंच गया
डॉलर सिस्टम पर क्यों बढ़ रहा डर?
हाल के वर्षों में डॉलर को लेकर चिंता बढ़ी है।
- रूस, चीन, भारत और ब्राजील US ट्रेजरी होल्डिंग घटा रहे हैं
- 2022 में अमेरिका ने रूस के करीब 300 बिलियन डॉलर फ्रीज किए
इस घटना ने कई देशों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि उनके रिजर्व भी कभी खतरे में पड़ सकते हैं।
गोल्ड ऐसा एसेट है जिसे न आसानी से फ्रीज किया जा सकता है, न किसी एक देश की पॉलिसी पर इसकी वैल्यू निर्भर करती है।
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