जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के ऊपरी और दुर्गम इलाकों में आतंकियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ ने एक बार फिर घाटी में सुरक्षा हालात को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस मुठभेड़ में भारतीय सेना के आठ जवान घायल हो गए हैं। यह मुठभेड़ कई घंटों तक चली, जिसके बाद पूरे इलाके में सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, आतंकियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिलने के बाद सेना ने ऑपरेशन ‘त्राशी-I’ के तहत इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। इसी दौरान आतंकियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में मुठभेड़ शुरू हो गई।
ऑपरेशन ‘त्राशी-I’ के दौरान आतंकियों ने खोली फायरिंग
सेना से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा बल जब किश्तवाड़ के ऊंचाई वाले जंगलों में तलाशी ले रहे थे, तभी छिपे आतंकियों ने अचानक गोलियां चलानी शुरू कर दीं। सुरक्षा बलों ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। दोनों ओर से हुई भारी फायरिंग के कारण मुठभेड़ लंबी खिंच गई। बताया जा रहा है कि यह इलाका घने जंगलों और पहाड़ी रास्तों से घिरा हुआ है, जिससे आतंकियों को छिपने और जगह बदलने में आसानी मिलती है। यही वजह है कि ऑपरेशन को बेहद सतर्कता के साथ अंजाम दिया जा रहा है।
घायल जवानों को तुरंत दिया गया इलाज
मुठभेड़ के दौरान घायल हुए सभी आठ जवानों को तुरंत प्राथमिक उपचार दिया गया। इसके बाद उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। सेना के अधिकारियों के अनुसार, सभी जवानों की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है और वे खतरे से बाहर हैं। सेना की मेडिकल टीम लगातार जवानों की सेहत पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी जवान की हालत गंभीर नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है।

इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज, अतिरिक्त बल तैनात
मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को चारों ओर से घेर लिया है।
- अतिरिक्त सेना और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है
- जंगलों और ऊंचाई वाले इलाकों में सघन तलाशी अभियान जारी है
- ड्रोन और तकनीकी संसाधनों की भी मदद ली जा रही है
सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि इलाके में एक से अधिक आतंकी मौजूद हो सकते हैं, जो किसी बड़े हमले की फिराक में थे।
किश्तवाड़ और आसपास के इलाकों में हाई अलर्ट
घटना के बाद किश्तवाड़ जिले और आसपास के क्षेत्रों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस को भी अलर्ट पर रखा गया है। संवेदनशील इलाकों में नाकाबंदी बढ़ा दी गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। स्थानीय लोगों से भी अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सुरक्षा बलों को पूरा सहयोग दें।
क्यों संवेदनशील है किश्तवाड़ का इलाका?
किश्तवाड़ जिला लंबे समय से सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माना जाता रहा है।
- घने जंगल
- दुर्गम पहाड़
- सीमावर्ती इलाकों से नजदीकी
इन कारणों से आतंकी अक्सर इस क्षेत्र को छिपने और मूवमेंट के लिए इस्तेमाल करते हैं। पहले भी यहां कई बार आतंकियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ हो चुकी है।
आतंकियों की तलाश जारी, ऑपरेशन अभी खत्म नहीं
सुरक्षा एजेंसियों ने साफ किया है कि ऑपरेशन ‘त्राशी-I’ अभी जारी है और तब तक चलेगा जब तक इलाके को पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं कर दिया जाता। अधिकारियों का कहना है कि आतंकियों को किसी भी कीमत पर भागने नहीं दिया जाएगा।
सुरक्षा एजेंसियों का बयान
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया,
“इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की पुख्ता जानकारी मिली थी। उसी के आधार पर ऑपरेशन चलाया गया। हमारे जवानों ने बहादुरी से मोर्चा संभाला है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।”
आतंकवाद के खिलाफ सेना का सख्त रुख
भारतीय सेना और सुरक्षा बल लगातार आतंकवाद के खिलाफ सख्त अभियान चला रहे हैं। हाल के महीनों में जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी मॉड्यूल ध्वस्त किए गए हैं। किश्तवाड़ की यह मुठभेड़ भी उसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है।
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