इंदौर संभाग में दूषित पेयजल की समस्या थमने का नाम नहीं ले रही है। इंदौर शहर के बाद अब महू (Mhow) में भी इस गंभीर समस्या ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। महू कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र के पट्टी बाजार, चंदर मार्ग और मोती महल इलाकों में दूषित पानी पीने से अब तक 25 से ज्यादा लोग बीमार हो चुके हैं। इनमें से 9 मरीजों की हालत को देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
अचानक बिगड़ी लोगों की तबीयत
बुधवार देर शाम इन इलाकों में रहने वाले लोगों को अचानक उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत होने लगी। शुरुआत में कुछ ही मरीज सामने आए, लेकिन कुछ ही घंटों में बीमार लोगों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। हालात बिगड़ते देख स्थानीय लोगों ने तुरंत प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी। रात होते-होते स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि कई परिवार अपने बीमार परिजनों को लेकर अस्पताल पहुंचने लगे। प्राथमिक जांच में यह साफ हुआ कि अधिकतर मरीजों में फूड पॉयजनिंग या जलजनित संक्रमण जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं।
आधी रात को अस्पताल पहुंचे कलेक्टर
सूचना मिलते ही कलेक्टर शिवम वर्मा देर रात खुद महू पहुंचे। उन्होंने अस्पताल पहुंचकर भर्ती मरीजों से मुलाकात की, उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और डॉक्टरों को बेहतर इलाज के निर्देश दिए। इसके बाद कलेक्टर ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थानीय लोगों से बातचीत की और पूरे मामले की जानकारी ली। कलेक्टर शिवम वर्मा ने मौके पर ही अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि लोगों की सेहत से जुड़ा मामला बेहद गंभीर है और इसमें त्वरित कार्रवाई जरूरी है।
विधायक उषा ठाकुर भी मौके पर पहुंचीं
घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय विधायक उषा ठाकुर भी देर रात अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने भर्ती मरीजों से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। इसके बाद उन्होंने दूषित पानी से प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। विधायक उषा ठाकुर ने प्रशासन से जल्द से जल्द समस्या के स्थायी समाधान की मांग की और कहा कि आम जनता के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
दूषित पानी बना बीमारी की वजह
प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि पेयजल सप्लाई लाइन में गंदा पानी मिलने की वजह से यह संक्रमण फैला है। महू कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र में कई जगह पुरानी पाइपलाइनें हैं, जिनमें लीकेज या सीवरेज लाइन से पानी मिलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दूषित पानी से इस तरह के संक्रमण तेजी से फैलते हैं, खासकर जब बड़ी संख्या में लोग एक ही स्रोत से पानी का उपयोग कर रहे हों।
कलेक्टर के सख्त निर्देश
कलेक्टर शिवम वर्मा ने महू कैंटोनमेंट बोर्ड को तुरंत:
- पानी के सैंपल लेने,
- पूरी पाइपलाइन की जांच करने,
- और प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छता सुनिश्चित करने
के सख्त निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
डोर-टू-डोर सर्वे की शुरुआत
प्रशासन ने फैसला लिया है कि शुक्रवार सुबह से प्रभावित इलाकों में डोर-टू-डोर सर्वे शुरू किया जाएगा। इस सर्वे के दौरान:
- जिन लोगों में हल्के लक्षण पाए जाएंगे,
- उन्हें घर पर ही दवाएं दी जाएंगी,
- और गंभीर लक्षण वालों को तुरंत अस्पताल भेजा जाएगा।
CMHO डॉ. माधव हसानी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर कैंप कर रही हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
मरीजों की स्थिति पर प्रशासन की नजर
कलेक्टर शिवम वर्मा ने लोगों को आश्वस्त किया है कि फिलहाल कोई भी मरीज अति गंभीर स्थिति में नहीं है। अस्पताल में भर्ती मरीजों में से कुछ को गुरुवार या शुक्रवार तक डिस्चार्ज किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शासन और प्रशासन की टीम पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त मेडिकल स्टाफ और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं
गौरतलब है कि इससे पहले भी इंदौर संभाग में दूषित पानी से बीमारियों के मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में महू की यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी मानी जा रही है कि पेयजल व्यवस्था की नियमित जांच और रखरखाव बेहद जरूरी है।
लोगों में डर और नाराजगी
घटना के बाद स्थानीय लोगों में डर और नाराजगी दोनों देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से पानी की गुणवत्ता को लेकर शिकायत कर रहे थे, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि पाइपलाइन की पूरी तरह जांच हो और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
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