वैश्विक रेटिंग एजेंसी Moody’s ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक सकारात्मक रिपोर्ट जारी की है। एजेंसी का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.4% रहेगी। इस रफ्तार के साथ भारत G-20 देशों में सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
G-20 में भारत की मजबूत स्थिति
Moody’s के मुताबिक, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत की ग्रोथ अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर बनी रहेगी। मजबूत घरेलू मांग और नीतिगत सुधार भारत की अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं।
घरेलू खपत और नीतिगत सुधार बने ग्रोथ की रीढ़
रिपोर्ट में Moody’s ने कहा है कि भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे घरेलू खपत और सरकार के नीतिगत सुधार अहम भूमिका निभा रहे हैं।
एजेंसी ने खास तौर पर:
- सितंबर 2025 में GST युक्तिकरण
- व्यक्तिगत आयकर सीमा में बढ़ोतरी
का जिक्र किया है। इन कदमों से लोगों की क्रय शक्ति बढ़ी, जिससे खपत आधारित विकास को मजबूती मिली।
सरकारी अनुमान से थोड़ा कम, लेकिन तस्वीर मजबूत
हालांकि Moody’s का 6.4% का अनुमान सरकार के अनुमान से थोड़ा कम है।
- आर्थिक सर्वे में सरकार ने FY27 के लिए 6.8% से 7.2% ग्रोथ का अनुमान लगाया था।
- चालू वित्त वर्ष 2025-26 में GDP ग्रोथ 7.4% रहने की उम्मीद है, जो 2024-25 की 6.5% ग्रोथ से ज्यादा है।
बैंकिंग सेक्टर: मजबूती बरकरार, MSME पर नजर
Moody’s ने भारतीय बैंकिंग सिस्टम को लेकर भी भरोसा जताया है:
- लोन ग्रोथ: FY27 में 11-13% तक पहुंचने की उम्मीद
- कॉरपोरेट बैलेंस शीट: मजबूत, जिससे लोन क्वालिटी बेहतर
- MSME सेक्टर: कुछ दबाव की आशंका, लेकिन बैंकों के पास पर्याप्त रिजर्व मौजूद
एजेंसी का कहना है कि कुल मिलाकर बैंकिंग सिस्टम झटकों को झेलने की स्थिति में है
RBI और ब्याज दरों पर Moody’s की राय
Moody’s के अनुसार, RBI ने 2025 में अब तक 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती कर पॉलिसी रेट को 5.25% पर ला दिया है।
एजेंसी का मानना है कि:
निष्कर्ष
Moody’s की रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत है।
संरचनात्मक सुधार, घरेलू मांग और सरकारी समर्थन के चलते आने वाले समय में भी भारत की ग्रोथ कहानी कायम रहने की उम्मीद है।
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