प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पे चर्चा (Pariksha Pe Charcha) के 9वें संस्करण में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से सीधा संवाद करते हुए परीक्षा के दबाव, पढ़ाई से जुड़े तनाव और जीवन की चुनौतियों पर खुलकर बात की। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने साफ संदेश दिया कि परीक्षा जीवन का एक हिस्सा है, पूरी जिंदगी नहीं। हर साल आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम देशभर के छात्रों के लिए एक भरोसेमंद मंच बन चुका है, जहां प्रधानमंत्री न केवल पढ़ाई से जुड़े सवालों के जवाब देते हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और संतुलित जीवन पर भी जोर देते हैं।
बोर्ड परीक्षाओं को लेकर माता-पिता को खास सलाह
प्रधानमंत्री मोदी ने खास तौर पर कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर माता-पिता की भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि कई बार घर का माहौल ही बच्चों के लिए सबसे बड़ा तनाव बन जाता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे परीक्षा के समय घर में अनावश्यक सख्ती न बढ़ाएं।
“परीक्षा के नाम पर बच्चों पर नियमों की बौछार करना, समय से पहले कर्फ्यू लगाना या हर वक्त पढ़ाई की याद दिलाना सही तरीका नहीं है,” पीएम मोदी ने कहा।
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि परिवारों को चाहिए कि वे घर का वातावरण शांत, सकारात्मक और खुशहाल बनाए रखें।
“पढ़ाई के लिए खुशहाल माहौल जरूरी है। परीक्षा हो या न हो, घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहनी चाहिए,” उन्होंने कहा।
दबाव से आत्मविश्वास और एकाग्रता पर असर
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी समझाया कि घर में लगातार बना रहने वाला दबाव बच्चों के आत्मविश्वास और एकाग्रता को प्रभावित करता है। जब बच्चे खुद को हर वक्त आंके जाने की स्थिति में पाते हैं, तो वे खुलकर सोच नहीं पाते। उन्होंने कहा कि बच्चों को यह भरोसा मिलना चाहिए कि उनके माता-पिता और परिवार उनके साथ खड़े हैं, चाहे नतीजा कुछ भी हो। भावनात्मक समर्थन, दोस्तों से बातचीत और परिवार का विश्वास ये सभी चीजें बच्चों को तनाव से निपटने में मदद करती हैं।
शिक्षकों की भूमिका पर भी खुलकर बोले पीएम
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों की भूमिका को भी उतना ही अहम बताया। उन्होंने कहा कि अच्छे शिक्षक वही होते हैं जो यह समझते हैं कि हर बच्चा एक जैसा नहीं होता।
“कुछ बच्चे जल्दी सीखते हैं, कुछ धीरे। शिक्षक का काम है यह पहचानना कि किस छात्र को किस तरह पढ़ाया जाए,” पीएम मोदी ने कहा।
उन्होंने बताया कि जब शिक्षक छात्रों से साफ और सरल संवाद करते हैं और पढ़ाने का तरीका बच्चों के अनुसार बदलते हैं, तो न केवल विषय समझ में आता है, बल्कि छात्रों का प्रदर्शन भी बेहतर होता है।
रूटीन, भावनात्मक संतुलन और जीवन का उद्देश्य
परीक्षा पे चर्चा के दौरान बातचीत सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं रही। चर्चा में दैनिक आदतें, स्वस्थ रूटीन, भावनात्मक संतुलन और परीक्षा से परे जीवन के उद्देश्य जैसे अहम विषय भी शामिल रहे। प्रधानमंत्री ने छात्रों को सलाह दी कि वे खुद को केवल अंकों से न आंकें। जीवन में सफलता के कई रास्ते होते हैं और हर व्यक्ति की यात्रा अलग होती है। उन्होंने कहा कि जब छात्र अपने दिनचर्या को संतुलित रखते हैं सही नींद, हल्का व्यायाम, समय पर पढ़ाई और थोड़ी मस्ती तो मानसिक स्वास्थ्य अपने आप बेहतर होता है।
परीक्षा से आगे की सोच जरूरी
प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को यह समझाने की कोशिश की कि परीक्षा सिर्फ एक पड़ाव है।
“अगर परीक्षा को जीवन और मृत्यु का सवाल बना दिया गया, तो सीखने की खुशी खत्म हो जाती है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने बच्चों को अपनी रुचियों को पहचानने, खुद से संवाद करने और धीरे-धीरे आगे बढ़ने की सलाह दी।
क्या है परीक्षा पे चर्चा?
परीक्षा पे चर्चा एक वार्षिक कार्यक्रम है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से संवाद करते हैं। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को शैक्षणिक दबाव, मानसिक तनाव और दैनिक जीवन की समस्याओं से निपटने के लिए व्यावहारिक समाधान देना है। यह कार्यक्रम पिछले कई वर्षों से छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय रहा है और इसे एक भरोसेमंद मार्गदर्शन मंच माना जाता है।
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