जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है यह बात भारत दशकों से कहता आया है। पाकिस्तान इस सच्चाई को नकारता रहा है, लेकिन अब इस मुद्दे पर सबसे स्पष्ट और कड़ा समर्थन भारत को उस देश से मिला है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा सुपरपावर माना जाता है संयुक्त राज्य अमेरिका। अमेरिका के US Trade Representative (USTR) कार्यालय द्वारा जारी किए गए भारत के आधिकारिक नक्शे में जम्मू-कश्मीर को पूरी तरह भारत का हिस्सा दिखाया गया है। खास बात यह है कि इसमें वह इलाका भी भारत का ही हिस्सा दर्शाया गया है, जिस पर पाकिस्तान अवैध रूप से कब्जा जमाए बैठा है, यानी पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (Pok)।
अमेरिकी नक्शा, जिसमें कोई भ्रम नहीं
इस नक्शे में न तो कोई स्टार मार्किंग है, न ही कोई विवादित टिप्पणी। सिर्फ ठोस तथ्य। जम्मू-कश्मीर को भारत के एक संघ शासित क्षेत्र के रूप में दर्शाया गया है। यह सीधा संकेत है कि अमेरिका:
- भारत के आधिकारिक राजनीतिक नक्शे से सहमत है
- पाकिस्तान के दावों को आधारहीन मानता है
- कश्मीर पर किसी तीसरे पक्ष की थ्योरी को समर्थन नहीं देता

वॉशिंगटन का साफ संदेश
अमेरिका ने बिना किसी बयानबाजी के अपने रुख को स्पष्ट कर दिया है। यह कदम बताता है कि अमेरिकी नेतृत्व:
- ज़मीनी हकीकत को मानता है
- भारत की संप्रभुता का सम्मान करता है
- दशकों से चली आ रही पाकिस्तानी कहानी को स्वीकार नहीं करता
यह फैसला नीतिगत और रणनीतिक दोनों ही स्तरों पर भारत के लिए अहम माना जा रहा है।
इस्लामाबाद के लिए बड़ी शर्मिंदगी
यह घटनाक्रम पाकिस्तान के लिए किसी कूटनीतिक झटके से कम नहीं है। खासकर ऐसे समय में, जब पाकिस्तान हाल के महीनों में अमेरिका से नजदीकियां बढ़ाने की कोशिश कर रहा था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने वॉशिंगटन के कई दौरे किए। मुनीर, जो हाल ही में खुद को फील्ड मार्शल कहने लगे हैं, अमेरिका के सत्ता गलियारों में सक्रिय लॉबिंग करते दिखे।
लेकिन पाकिस्तान की कोशिशें बेअसर
इन तमाम कोशिशों के बावजूद, अमेरिका ने पाकिस्तान की उस मांग को नहीं माना, जिसमें वह कश्मीर को “विवादित क्षेत्र” के तौर पर दिखवाना चाहता था। यह साफ हो गया कि:
- अमेरिका अब झूठे दावों को दोहराने के मूड में नहीं
- भारत के खिलाफ किसी एजेंडे का हिस्सा नहीं बनना चाहता
पाकिस्तान में सत्ता संतुलन पर भी सवाल
पाकिस्तान की हालिया कूटनीतिक गतिविधियों से यह भी संकेत मिला कि वहां सत्ता संतुलन बदल रहा है। सेना प्रमुख आसिम मुनीर खुद को वास्तविक सत्ता केंद्र के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि चुनी हुई सरकार पीछे छूटती दिख रही है। यह स्थिति अमेरिका समेत पश्चिमी देशों के लिए भी चिंता का विषय रही है।
फिर भी अमेरिका की पाकिस्तान में दिलचस्पी क्यों?
यह सच है कि अमेरिका के पाकिस्तान में कुछ रणनीतिक हित बने हुए हैं:
- दुर्लभ खनिज (Rare Earth Minerals)
- सैन्य उपकरणों की बिक्री
- क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन
लेकिन अमेरिका ने यह भी साफ कर दिया है कि रणनीतिक हितों का मतलब यह नहीं कि वह गलत दावों का समर्थन करे।
बड़ा संदेश: भारत का कोई विकल्प नहीं
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा संदेश यही है कि:
- पाकिस्तान अमेरिका के लिए एक interest हो सकता है
- लेकिन भारत अमेरिका के लिए एक irreplaceable global partner है
चाहे इंडो-पैसिफिक रणनीति हो, चीन का मुकाबला, टेक्नोलॉजी, या वैश्विक व्यापार भारत की भूमिका केंद्रीय बनी हुई है।
भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूती
अमेरिका का यह कदम भारत-अमेरिका संबंधों को और मजबूत करता है। यह दर्शाता है कि:
- दोनों देशों के बीच रणनीतिक भरोसा गहरा है
- संवेदनशील मुद्दों पर भी अमेरिका भारत के साथ खड़ा है
यह फैसला भविष्य की कूटनीति में भी भारत के लिए मिसाल बनेगा।
पाकिस्तान में गूंजेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम:
- इस्लामाबाद के पावर कॉरिडोर तक गूंजेगा
- पाकिस्तान की विदेश नीति पर सवाल खड़े करेगा
- अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी स्थिति कमजोर करेगा
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