इस जीत की कहानी साल 1973 से शुरू होती है, जब लखनऊ में विमेंस क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ इंडिया की स्थापना की गई थी। इसके संस्थापक सचिव महेंद्र कुमार शर्मा थे, जिनका सपना था भारत की बेटियों को क्रिकेट के मंच पर पहचान दिलाना।
महिला क्रिकेट की जड़ें इससे भी गहरी हैं। साल 1913 में ऑस्ट्रेलिया की एक टीचर ऐन केलवे ने केरल के कोट्टायम स्थित बेकर मेमोरियल स्कूल में लड़कियों के लिए क्रिकेट को अनिवार्य किया था। उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि एक सदी बाद भारत की बेटियां उन्हीं के देश ऑस्ट्रेलिया को हराकर ‘सपनों के फाइनल’ में विश्व विजेता बनेंगी।

रोमांचक फाइनल में भारत की शानदार जीत
भारत और साउथ अफ्रीका के बीच खेले गए इस रोमांचक मुकाबले ने करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों की धड़कनें बढ़ा दीं। मैच के आखिरी ओवर तक सस्पेंस बरकरार रहा, लेकिन भारतीय महिला टीम ने जबर्दस्त प्रदर्शन करते हुए शानदार जीत दर्ज की।
देशभर में जश्न और बॉलीवुड की प्रतिक्रियाएं
इस जीत के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल है। सोशल मीडिया पर बधाइयों का तांता लगा है।
अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने इंस्टाग्राम पर लिखा— “आप चैंपियन हैं, ये सच में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है।”
करीना कपूर खान ने भी लिखा— “गर्व है हमारी बेटियों पर! आपने इतिहास रच दिया।”
देशभर में लोग “भारत माता की जय” और “चैंपियंस ऑफ द वर्ल्ड” के नारों से सड़कों पर उतर आए हैं।

25 साल पुराने वर्ल्ड कप इतिहास में सुनहरा अध्याय
विमेंस क्रिकेट वर्ल्ड कप के 25 साल के इतिहास में यह जीत भारत के लिए बेहद खास रही। टीम ने न सिर्फ साउथ अफ्रीका को मात दी, बल्कि महिला क्रिकेट के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अपना नाम दर्ज कराया।
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