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उत्तर प्रदेश को मिला आयुष का पहला विश्वविद्यालय, कल होगा महायोगी गुरु गोरक्षनाथ आयुष विश्वविद्यालय का भव्य उद्घाटन

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महायोगी गुरु गोरक्षनाथ आयुष विश्वविद्यालय
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गोरखपुर, उत्तर प्रदेश: स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर को जल्द ही महायोगी गुरु गोरक्षनाथ आयुष विश्वविद्यालय का तोहफा मिलने वाला है। यह विश्वविद्यालय न केवल आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, योग और प्राकृतिक चिकित्सा जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की उच्च शिक्षा और शोध का प्रमुख केंद्र बनेगा, बल्कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ इन विधाओं के समन्वय की दिशा में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा।

लोकार्पण से पूर्व जोरों पर तैयारियां, मंत्री ने की स्थलीय समीक्षा

विश्वविद्यालय के लोकार्पण समारोह से पूर्व तैयारियों का जायजा लेने सोमवार को राज्य के आयुष मंत्री डॉ. दया शंकर मिश्रा ‘दयालु’ ने स्वयं स्थल पर पहुंचकर निरीक्षण किया। उन्होंने राष्ट्रपति की प्रस्तावित उपस्थिति को देखते हुए कार्यक्रम की प्रत्येक बारीकी की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में प्रस्तावित राष्ट्रपति फ्लीट रूट, पौधरोपण स्थल, स्विस कॉटेज/सेफ हाउस, मुख्य मंच, दर्शक दीर्घा सहित तमाम स्थानों की तैयारियों का गहन निरीक्षण किया।

राष्ट्रपति के अवलोकन हेतु मॉडल तैयार करने के निर्देश

निरीक्षण के दौरान मंत्री डॉ. मिश्रा ने विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति को निर्देश दिए कि राष्ट्रपति को संस्थान की संरचना और कार्यशैली समझाने हेतु एक 3D मॉडल तैयार किया जाए। इस मॉडल में विश्वविद्यालय के प्रमुख भवनों जैसे कि अकादमिक ब्लॉक, ओपीडी, आईपीडी, ऑपरेशन थिएटर, पंचकर्म केंद्र आदि को दर्शाया जाए ताकि आगंतुकों को विश्वविद्यालय की व्यापकता और उद्देश्य की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

11,500 वर्ग फीट में बन रहा है विशाल पंडाल

गौरतलब है कि उद्घाटन समारोह के लिए विश्वविद्यालय परिसर में 11,500 वर्ग फीट क्षेत्रफल में जर्मन हैंगर पंडाल तैयार किया जा रहा है। कार्यक्रम का मुख्य मंच 60 फीट लंबा, 40 फीट चौड़ा और 8 फीट ऊंचा होगा। इसे प्रशासनिक भवन के सामने पश्चिम दिशा में तैयार किया जा रहा है। वहीं, वीआईपी मेहमानों के लिए स्विस कॉटेज और सुरक्षित आवासीय सुविधाओं की भी व्यवस्था की जा रही है।

सुरक्षा, स्वच्छता और लोगों की सुविधा सर्वोपरि

डॉ. मिश्रा ने विश्वविद्यालय प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि लोकार्पण समारोह में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। उन्होंने कहा कि सुरक्षा, स्वच्छता और आमजन की सुविधा को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, आगंतुकों के लिए पीने के पानी, बैठने की उचित व्यवस्था, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और मार्गदर्शन सहायता काउंटर भी लगाए जाएं।

आयुष और आधुनिक चिकित्सा का समन्वय बनेगा विश्वविद्यालय की विशेषता

यह विश्वविद्यालय न केवल पारंपरिक आयुष पद्धतियों की शिक्षा और शोध को बढ़ावा देगा, बल्कि उसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी सहयोग के साथ आधुनिक चिकित्सा प्रणाली से जोड़ेगा। डॉ. मिश्रा ने बताया कि आने वाले वर्षों में इस संस्थान को ऐसा विकसित किया जाएगा जहां आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धतियों के विद्यार्थी, शोधकर्ता और चिकित्सक एक साझा मंच पर काम कर सकें।

पूर्वांचल को मिलेगा विशेष लाभ

पूर्वांचल क्षेत्र लंबे समय से एक ऐसे संस्थान की आवश्यकता महसूस कर रहा था जो आयुष शिक्षा में उत्कृष्टता प्रदान कर सके। यह विश्वविद्यालय गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज और बलरामपुर जैसे जिलों के हजारों विद्यार्थियों को घर के पास उच्च शिक्षा की सुविधा देगा। इसके साथ ही यहां से प्रशिक्षित चिकित्सक ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर सकेंगे।

रोजगार और स्टार्टअप्स को मिलेगा बढ़ावा

यह विश्वविद्यालय न केवल शिक्षा का केंद्र होगा, बल्कि आयुष आधारित स्टार्टअप्स, चिकित्सा उत्पादों, पंचकर्म टूरिज्म और वेलनेस इंडस्ट्री को भी बढ़ावा देगा। युवाओं के लिए यह नए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर खोलेगा।

डॉ. दया शंकर मिश्रा की भूमिका रही निर्णायक

इस ऐतिहासिक परियोजना की दिशा तय करने और उसके क्रियान्वयन में आयुष मंत्री डॉ. दया शंकर मिश्रा ‘दयालु’ की सक्रिय भूमिका सराहनीय रही है। उनका लक्ष्य केवल एक भव्य विश्वविद्यालय बनवाना नहीं, बल्कि एक ऐसा संस्थान खड़ा करना है जो आने वाली पीढ़ियों को स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाए।

अंतरराष्ट्रीय स्तर की सोच, स्थानीय जड़ों से जुड़ी दृष्टि

डॉ. मिश्रा ने कहा कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां आज पूरी दुनिया में स्वीकार्यता प्राप्त कर रही हैं। ऐसे में यह विश्वविद्यालय “लोकल टू ग्लोबल” की सोच को साकार करेगा। यहां से निकले चिकित्सक और शोधकर्ता न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी अपनी पहचान बनाएंगे।

इसका भव्य लोकार्पण समारोह आने वाले दिनों में भारत के स्वास्थ्य शिक्षा क्षेत्र की नई दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है।

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