The Journalist News Lucknow: तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में सोमवार को एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण देखने को मिला, जब राज्य के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने भारतीय शतरंज के युवा सितारे और ग्रैंडमास्टर आर. प्रग्नानंद को उनके अभूतपूर्व प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें नॉर्वे चेस टूर्नामेंट में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने पर दिया गया, जिसमें उन्होंने दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों को पछाड़ते हुए खिताब अपने नाम किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रग्नानंद को ₹50 लाख का नकद पुरस्कार प्रदान किया। यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि का प्रतीक था, बल्कि भारतीय शतरंज के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को भी दर्शाता है।
नॉर्वे चेस में ऐतिहासिक जीत
आर. प्रग्नानंद ने नॉर्वे चेस टूर्नामेंट के फाइनल राउंड में जर्मनी के मजबूत खिलाड़ी विंसेंट कीमर को हराकर खिताब अपने नाम किया। यह जीत भारतीय शतरंज इतिहास में एक मील का पत्थर मानी जा रही है, क्योंकि वे इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट को जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं। इस टूर्नामेंट में उन्होंने कई दिग्गज खिलाड़ियों को मात दी, जिनमें दुनिया के नंबर एक माने जाने वाले मैग्नस कार्लसन जैसे खिलाड़ी भी शामिल थे। इस प्रदर्शन ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय शतरंज जगत में एक नई पहचान दिलाई है। प्रग्नानंद ने स्वयं इस जीत को अपने करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि बताया है। उनके अनुसार, इस स्तर के खिलाड़ियों को हराना और लगातार उच्च दबाव में प्रदर्शन करना उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण और यादगार अनुभव रहा।

मुख्यमंत्री विजय का सम्मान समारोह
चेन्नई स्थित सचिवालय में आयोजित इस सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रग्नानंद को सम्मानित करते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और प्रग्नानंद जैसे खिलाड़ी भारत का भविष्य हैं। इस मौके पर तमिलनाडु सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी, खेल विभाग के प्रतिनिधि और प्रग्नानंद का परिवार भी मौजूद था। मुख्यमंत्री ने खेल विकास प्राधिकरण (SDAT) की ओर से ₹50 लाख का चेक भी प्रग्नानंद को सौंपा।

अनौपचारिक शतरंज मुकाबला: एक यादगार पल
समारोह के बाद जो सबसे खास और अनोखा क्षण देखने को मिला, वह था मुख्यमंत्री और ग्रैंडमास्टर के बीच एक अनौपचारिक शतरंज खेल। मुख्यमंत्री विजय ने स्वयं प्रग्नानंद को अपने चैंबर में शतरंज खेलने के लिए आमंत्रित किया। दिलचस्प बात यह रही कि यह पूरा खेल बिना किसी औपचारिक तैयारी के हुआ। मुख्यमंत्री ने खुद प्रग्नानंद से कहा कि वे शतरंज बोर्ड लेकर आएं और फिर दोनों ने मिलकर मोहरों को सजाकर खेल शुरू किया। खेल के दौरान मुख्यमंत्री पूरी तरह से मैच में डूबे हुए नजर आए। वे अपनी बड़ी मेज के पास से उठकर सोच-समझकर चाल चल रहे थे और अपने किंग की सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क दिखाई दिए। यह दृश्य काफी अनोखा और प्रेरणादायक था, जिसमें राजनीति और खेल का सुंदर संगम देखने को मिला।
प्रग्नानंद और परिवार की प्रतिक्रिया
इस पूरे अनुभव के बाद प्रग्नानंद ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि मुख्यमंत्री खुद उनके साथ शतरंज खेलेंगे। उन्होंने बताया कि यह उनके लिए एक बेहद खास और यादगार पल था। उन्होंने कहा, “मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी। मैंने पहले कभी नहीं सुना था कि मुख्यमंत्री शतरंज खेलते हैं। उन्होंने खुद मुझे बुलाया और कहा कि बोर्ड लेकर आओ। हमने तुरंत खेल शुरू किया। वह अच्छा खेल रहे थे।” प्रग्नानंद ने आगे बताया कि खेल के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि वे कब शतरंज खेलते हैं, जिस पर मुख्यमंत्री ने बताया कि वे अपने दोस्तों के साथ खेलते हैं। प्रग्नानंद ने यह भी कहा कि उन्होंने यह मैच जीता, लेकिन मुख्यमंत्री का खेल अपेक्षा से कहीं बेहतर था।
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