The Journalist News Lucknow: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कैंसर की महंगी दवाओं से जुड़े कथित घपले की जांच लगातार गहराती जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का दायरा अब और बढ़ा दिया गया है। मरीजों का इलाज करने वाले सात विभागों को जांच के दायरे में लाया गया है, जबकि पांच सदस्यीय जांच समिति अब तक तीन प्रमुख विभागों की विस्तृत पड़ताल पूरी कर चुकी है। सूत्रों के अनुसार, जांच समिति ने जनरल सर्जरी, गैस्ट्रो सर्जरी और रेडियोथेरेपी विभाग से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा की है। अब अन्य विभागों के दस्तावेजों और मरीजों के उपचार से संबंधित विवरणों की भी जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि जांच रिपोर्ट जल्द ही KGMU के कुलपति (वीसी) के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
सात विभागों तक पहुंची जांच
कैंसर मरीजों को दी जाने वाली महंगी दवाओं के उपयोग और वितरण को लेकर उठे सवालों के बाद जांच समिति ने अपना दायरा बढ़ा दिया है। अब तक सात विभागों को जांच में शामिल किया जा चुका है। समिति यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि जिन मरीजों के नाम पर दवाएं जारी की गईं, उनका वास्तविक उपयोग किस प्रकार हुआ। जांच के दौरान विभागवार दवा वितरण, मरीजों के उपचार और स्टॉक रजिस्टर का मिलान किया जा रहा है। समिति यह भी देख रही है कि कहीं दवाओं की खरीद और खपत के बीच कोई असामान्य अंतर तो नहीं है।

तीन विभागों की जांच पूरी
पांच सदस्यीय जांच समिति ने जनरल सर्जरी, गैस्ट्रो सर्जरी और रेडियोथेरेपी विभाग की प्रारंभिक जांच पूरी कर ली है। इन विभागों से संबंधित दस्तावेजों, मरीजों के रिकॉर्ड और दवा वितरण के विवरण की गहन समीक्षा की गई। सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज एकत्र किए गए हैं। समिति अब इनकी तुलना अन्य विभागों से प्राप्त जानकारी के साथ कर रही है ताकि पूरे मामले की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।
कैंसर मरीजों का विस्तृत रिकॉर्ड तलब
जांच समिति ने कैंसर मरीजों का विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया है। इसमें मरीजों की यूनिक हेल्थ आईडी (UHID), उपचार संबंधी विवरण, डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाएं और अस्पताल से जारी दवाओं का पूरा ब्योरा शामिल है। समिति मरीजों के इलाज और उन्हें उपलब्ध कराई गई दवाओं का मिलान कर रही है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रिकॉर्ड में दर्ज दवाएं वास्तव में संबंधित मरीजों को ही दी गई थीं या नहीं।

सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों पर विशेष नजर
जांच में असाध्य रोग योजना और अन्य सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के तहत लाभ पाने वाले मरीजों का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है। इन योजनाओं के माध्यम से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को महंगी दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। समिति यह जांच कर रही है कि इन योजनाओं के अंतर्गत जारी की गई दवाओं का उपयोग निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हुआ या नहीं। विशेष रूप से उन मामलों की पड़ताल की जा रही है जहां दवाओं की लागत काफी अधिक थी।
पांच हजार रुपये से अधिक कीमत वाली दवाओं पर फोकस
जांच समिति का विशेष ध्यान उन दवाओं पर है जिनकी कीमत पांच हजार रुपये से अधिक है। कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली कई दवाएं अत्यंत महंगी होती हैं और उनकी खरीद तथा वितरण प्रक्रिया को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाती है। सूत्रों के अनुसार, ऐसी दवाओं की खरीद, स्टॉक, वितरण और उपयोग से जुड़े रिकॉर्ड की अलग से समीक्षा की जा रही है। समिति यह सुनिश्चित करना चाहती है कि हर दवा का पूरा हिसाब उपलब्ध हो।
UHID और दवा उपयोग का किया गया मिलान
जांच के दौरान मरीजों की UHID संख्या, इलाज के रिकॉर्ड और दवाओं के उपयोग का आपस में मिलान किया गया है। यह प्रक्रिया यह पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है कि कहीं रिकॉर्ड में कोई विसंगति तो नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्ड और दवा वितरण के आंकड़ों का मिलान किसी भी संभावित अनियमितता को सामने लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
खरीद और खपत के दस्तावेज खंगाले गए
जांच समिति ने दवाओं की खरीद और उनकी खपत से जुड़े दस्तावेजों की भी गहन जांच की है। अस्पताल में दवाओं की आपूर्ति, स्टॉक प्रबंधन और वितरण व्यवस्था को लेकर कई स्तरों पर पड़ताल की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक समिति विभिन्न विभागों से प्राप्त जानकारी को एकत्र कर अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में जुटी हुई है। रिपोर्ट में यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों को सिफारिशें भेजी जा सकती हैं।
जल्द वीसी को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
जांच प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पांच सदस्यीय समिति अपनी रिपोर्ट KGMU के कुलपति के समक्ष पेश करेगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले पर अस्पताल प्रशासन, मरीजों और स्वास्थ्य विभाग की नजर बनी हुई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि कैंसर की महंगी दवाओं के उपयोग और वितरण में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं।
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