The Journalist News Lucknow: स्लोवाकिया में गूंजा ‘वंदे मातरम्’, भारतीय संस्कृति और परंपराओं ने जीता दिल स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा में भारत और स्लोवाकिया के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों की एक अनूठी झलक देखने को मिली। यहां आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने न केवल दोनों देशों की मित्रता को मजबूत किया, बल्कि यह भी दिखाया कि भौगोलिक दूरियां सांस्कृतिक जुड़ाव को कभी कम नहीं कर सकतीं। इस विशेष अवसर पर भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और लोक कलाओं का सुंदर संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने भारतीय और स्लोवाकियाई सांस्कृतिक विरासत के प्रति गहरा सम्मान और उत्साह व्यक्त किया।

महादेव कीर्तन प्रोजेक्ट ने बांधा समां
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण ‘प्रोजेक्ट महादेव कीर्तन प्रोजेक्ट’ रहा। इस पहल को भारत और स्लोवाकिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास माना जा रहा है। ब्रातिस्लावा में आयोजित प्रस्तुति के दौरान दर्शकों ने देखा कि यह समूह भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं, संस्कृत मंत्रों और भारतीय संस्कृति से जुड़े विभिन्न पहलुओं से कितनी गहराई से प्रेरित है। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय दर्शन और आध्यात्मिक मूल्यों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इस अवसर पर समूह के प्रमुख मारेक जिलिंका और उनकी पूरी टीम की सराहना की गई। उनके प्रयासों को भारत और स्लोवाकिया के बीच सांस्कृतिक पुल के रूप में देखा जा रहा है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उनके उज्ज्वल भविष्य और आगे की सफलताओं के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
‘वंदे मातरम्’ की गूंज से भावुक हुआ माहौल
ब्रातिस्लावा में स्वागत समारोह के दौरान स्लोवाकिया के प्रसिद्ध सांस्कृतिक समूह ‘लूचनिका’ के कलाकारों ने भारत का राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ प्रस्तुत किया। जैसे ही कलाकारों ने इस गीत को गाना शुरू किया, पूरा वातावरण भावनाओं से भर गया। भारतीय समुदाय और अन्य उपस्थित लोगों ने इस प्रस्तुति का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस प्रस्तुति का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इस समय ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने की स्मृति मनाई जा रही है। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में इस गीत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है और यह आज भी देशभक्ति तथा राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक माना जाता है।
स्लोवाकियाई लोक संस्कृति की शानदार झलक
कार्यक्रम के दौरान स्लोवाकिया के मायावा क्षेत्र के प्रसिद्ध लोक नृत्य और सांस्कृतिक समूह ‘कोपानिचियारिक’ की प्रस्तुति भी आकर्षण का केंद्र रही। इस लोक समूह ने अपने पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक प्रदर्शन के माध्यम से स्लोवाकिया की समृद्ध लोक विरासत को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। दर्शकों ने उनकी ऊर्जा, पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति की जमकर सराहना की। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी लोक परंपराएं किसी भी राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यही परंपराएं आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास और विरासत से जोड़ती हैं।
पारंपरिक ‘ब्रेड और सॉल्ट’ से हुआ स्वागत
ब्रातिस्लावा में स्वागत समारोह के दौरान एक और खास परंपरा देखने को मिली। मेहमानों का स्वागत स्लोवाकिया की पारंपरिक ‘ब्रेड और सॉल्ट’ रस्म के साथ किया गया। यह परंपरा स्लोवाकियाई संस्कृति में सम्मान, सद्भावना और मित्रता का प्रतीक मानी जाती है। इस रस्म ने वहां मौजूद लोगों को स्लोवाकिया की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की परंपराएं यह दर्शाती हैं कि किसी भी समाज की पहचान केवल उसके विकास से नहीं, बल्कि उसकी सांस्कृतिक जड़ों से भी होती है।
भारतीय समुदाय की गर्मजोशी ने जीता दिल
ब्रातिस्लावा में आयोजित शाम का स्वागत समारोह कई मायनों में यादगार साबित हुआ। वहां मौजूद भारतीय समुदाय ने अपने उत्साह, आत्मीयता और स्नेह से सभी का दिल जीत लिया। भारतीय समुदाय के सदस्यों ने जिस तरह से मेहमानों का स्वागत किया, उसने दोनों देशों के बीच मौजूद मजबूत संबंधों को और अधिक स्पष्ट कर दिया। ऐसे अवसर यह साबित करते हैं कि विदेशों में बसे भारतीय न केवल अपनी संस्कृति को जीवित रखते हैं, बल्कि भारत की सकारात्मक छवि को भी मजबूत बनाते हैं।
भारत और स्लोवाकिया के रिश्तों को मिली नई मजबूती
ब्रातिस्लावा में हुए इन सांस्कृतिक आयोजनों ने यह संदेश दिया कि भारत और स्लोवाकिया के संबंध केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, सामाजिक और मानवीय रिश्ते भी उतने ही मजबूत हैं। महादेव कीर्तन प्रोजेक्ट, वंदे मातरम् की प्रस्तुति, लोक नृत्य कार्यक्रम और पारंपरिक स्वागत समारोह जैसे आयोजन इस बात का प्रमाण हैं कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान देशों को और करीब लाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। इन आयोजनों ने न केवल भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सम्मान दिलाया, बल्कि दोनों देशों के बीच मित्रता और सहयोग के नए आयाम भी स्थापित किए।
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