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India के नए Tea Rules से Nepal में संकट! फैक्टरियां बंद, 60 हजार लोगों की रोजी-रोटी पर खतरा

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Collage of Modi waving and a man in sunglasses joining hands over a tea plantation, with a Hindi news banner about India’s new tea rules.
Source: AI
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The journalist News (Lucknow): भारत द्वारा आयातित चाय की गुणवत्ता जांच और दस्तावेज सत्यापन के नियम सख्त किए जाने के बाद नेपाल का चाय उद्योग बड़े संकट का सामना कर रहा है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि नेपाली चाय उत्पादकों ने देशभर की चाय फैक्टरियों और बागानों को गुरुवार से अनिश्चितकाल के लिए बंद करने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले से नेपाल का अरबों रुपये का चाय कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। साथ ही उद्योग से जुड़े करीब 60 हजार श्रमिकों और कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट भी खड़ा हो गया है।

Tea Board of India के नए नियम बने परेशानी की वजह

मिलावट और गुणवत्ता संबंधी शिकायतों को रोकने के लिए भारतीय चाय बोर्ड ने नया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू किया है। इसके तहत विदेशों से आने वाली प्रत्येक चाय खेप की गुणवत्ता जांच, दस्तावेज सत्यापन और मानक परीक्षण अनिवार्य कर दिया गया है। नेपाली चाय उत्पादकों का कहना है कि इन परीक्षणों की रिपोर्ट आने में दो सप्ताह या उससे अधिक समय लग जाता है। इस दौरान चाय की खेप बाजार में नहीं बेची जा सकती। यदि कोई नमूना निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो पूरी खेप को वापस लेना या नष्ट करना पड़ता है।

Source: AI

नेपाल टी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने किया बंदी का ऐलान

नेपाल टी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने झापा जिले के भद्रपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उद्योग बंद करने की घोषणा की। संगठन के महासचिव शुक्र दहल ने कहा कि भारत की नई व्यवस्था के कारण नेपाली चाय का निर्यात गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। उन्होंने बताया कि निर्यात बाधित होने से उद्योग पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है और कई उत्पादकों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।

5 अरब नेपाली रुपये का निर्यात प्रभावित

नेपाल में उत्पादित सीटीसी (CTC) और ऑर्थोडॉक्स चाय का वार्षिक कारोबार लगभग 12 से 14 अरब नेपाली रुपये का माना जाता है। इसमें से करीब 5 अरब नेपाली रुपये की चाय भारत को निर्यात की जाती है। भारत नेपाली चाय का सबसे बड़ा बाजार है। ऐसे में निर्यात में आई रुकावट ने उत्पादकों, व्यापारियों और उद्योग से जुड़े अन्य लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

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सरकार से वैकल्पिक बाजार तलाशने की मांग

चाय उत्पादकों ने नेपाल सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि बांग्लादेश, पाकिस्तान और अन्य देशों में नेपाली चाय के लिए अच्छे अवसर मौजूद हैं, लेकिन नए बाजार विकसित करने के लिए सरकारी स्तर पर व्यापारिक और कूटनीतिक प्रयास जरूरी हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि केवल भारतीय बाजार पर निर्भरता कम करने से भविष्य में ऐसे संकटों से बचा जा सकता है।

60 हजार श्रमिकों पर पड़ेगा सीधा असर

नेपाल का चाय उद्योग देश के प्रमुख कृषि आधारित उद्योगों में शामिल है। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 60 हजार लोगों को रोजगार मिलता है। उद्योग संगठनों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो हजारों श्रमिकों, परिवहन कारोबारियों और निर्यात श्रृंखला से जुड़े अन्य व्यवसायों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसके अलावा सरकार को मिलने वाला लगभग एक अरब रुपये का वार्षिक राजस्व भी प्रभावित हो सकता है।

गोरखपुर में भी दिख सकता है असर

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में भी नेपाली चाय का बड़ा बाजार है। गोरखपुर किराना कमेटी के अध्यक्ष गोपाल जायसवाल के अनुसार, स्थानीय थोक बाजार में हर महीने करीब पांच टन नेपाली चाय की खपत होती है। यह चाय पहले नेपाल से सिलीगुड़ी पहुंचती है और वहां से गोरखपुर सहित अन्य शहरों में सप्लाई की जाती है। चेंबर ऑफ ट्रेडर्स के अध्यक्ष अनूप किशोर अग्रवाल ने बताया कि गोरखपुर में नेपाली चाय का कारोबार करीब एक करोड़ रुपये का है। यहां से बिहार के सीमावर्ती जिलों समेत आसपास के क्षेत्रों में भी चाय की आपूर्ति होती है।

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