The Journalist News: बॉम्बे हाईकोर्ट ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (PoSH) कानून से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि यदि कोई कर्मचारी अपने कार्यालय आने-जाने के लिए साझा ऑटो-रिक्शा (शेयर ऑटो) का इस्तेमाल करता है और वह वाहन नियोक्ता (Employer) द्वारा उपलब्ध नहीं कराया गया है, तो उसे PoSH Act, 2013 के तहत “कार्यस्थल” (Workplace) नहीं माना जा सकता। अदालत ने इसी आधार पर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के एक कर्मचारी के खिलाफ आंतरिक शिकायत समिति (ICC) द्वारा दिए गए फैसले को रद्द कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
मामला 24 मार्च 2023 का है। याचिकाकर्ता, जो SBI में कर्मचारी हैं, अपने कार्यालय जाने के लिए एक शेयर ऑटो में सफर कर रहे थे। उसी ऑटो में एक महिला सहयात्री भी मौजूद थीं। कर्मचारी का कहना था कि ऑटो में अत्यधिक भीड़ होने के कारण महिला से उनका शारीरिक संपर्क हुआ, जो पूरी तरह अनजाने में था। वहीं महिला ने इसे जानबूझकर किया गया व्यवहार माना, जिसके बाद दोनों के बीच विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर महिला ने कथित रूप से कर्मचारी पर पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया और पुलिस को बुलाया। पुलिस ने कर्मचारी को हिरासत में लिया और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354-A के तहत FIR दर्ज की। इसके साथ ही महिला ने PoSH Act के तहत आंतरिक शिकायत समिति (ICC) में भी शिकायत दर्ज कराई।

ICC ने कर्मचारी को माना था दोषी
शिकायत की सुनवाई के बाद ICC ने SBI कर्मचारी को यौन उत्पीड़न का दोषी माना और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की। हालांकि कर्मचारी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पहले ही निर्देश दिया था कि उसकी अनुमति के बिना अपील पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जाएगा।
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हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति फिर्दोश पी. पूनीवाला और न्यायमूर्ति सुमन श्याम की खंडपीठ ने की। अदालत ने सबसे पहले यह जांच की कि कथित घटना PoSH Act की धारा 2(o) के तहत “कार्यस्थल” की परिभाषा में आती है या नहीं। कोर्ट ने पाया कि कर्मचारी कार्यालय जा रहे थे, लेकिन जिस शेयर ऑटो में वे सफर कर रहे थे, वह न तो उनके नियोक्ता और न ही महिला के नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराया गया था। खंडपीठ ने कहा कि PoSH Act की धारा 2(o)(v) के तहत केवल वही परिवहन व्यवस्था कार्यस्थल मानी जा सकती है जो नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराई गई हो। निजी या सार्वजनिक साझा परिवहन इस श्रेणी में नहीं आता।
ICC के पास नहीं था अधिकार क्षेत्र
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कथित घटना कार्यस्थल पर नहीं हुई है, तो ICC को शिकायत की सुनवाई करने का अधिकार ही नहीं है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी मामले में जांच शुरू करने से पहले ICC को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि घटना PoSH Act के तहत परिभाषित “कार्यस्थल” पर हुई है या नहीं। इसी आधार पर अदालत ने ICC के आदेश को अस्थिर और कानूनन टिकाऊ नहीं मानते हुए उसे रद्द कर दिया।
यौन उत्पीड़न के आरोपों पर नहीं दी कोई राय
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि उसने इस मामले में यह तय नहीं किया है कि वास्तव में यौन उत्पीड़न हुआ था या नहीं। अदालत ने कहा कि इस प्रश्न पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की जा रही है और यह मुद्दा अन्य सक्षम कानूनी मंचों पर विचार के लिए खुला रहेगा।
क्यों अहम है यह फैसला?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला PoSH Act की सीमाओं और अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट करता है। अदालत ने यह संदेश दिया है कि ICC केवल उन्हीं मामलों की जांच कर सकती है जो कानून में परिभाषित कार्यस्थल से जुड़े हों। इस फैसले को भविष्य में PoSH कानून से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
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