The Journalist News (Lucknow): हरियाणा के गुरुग्राम में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े कथित डीपफेक वीडियो मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो लोगों को हिरासत में लिया है। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस कई अहम पहलुओं की पड़ताल कर रही है। गुरुग्राम पुलिस के एसीपी क्राइम नवीन शर्मा ने बताया कि पुलिस को इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके आधार पर कार्रवाई करते हुए दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। दोनों से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़े तथ्यों को खंगाला जा रहा है।
NIA से कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाला साइबर एक्सपर्ट भी हिरासत में
एसीपी नवीन शर्मा के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों में एक व्यक्ति की पहचान अंकित के रूप में हुई है, जो कथित तौर पर साइबर एक्सपर्ट है और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के साथ अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर काम कर चुका है। दूसरे व्यक्ति का नाम अरुण बताया गया है। पुलिस का कहना है कि दोनों पर एक वायरल वीडियो को कथित रूप से फर्जी तरीके से तैयार करने और सोशल मीडिया पर प्रसारित करने का आरोप है।

सरकारी लैब में नहीं तैयार किया गया वीडियो
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने किसी सरकारी मान्यता प्राप्त फोरेंसिक या तकनीकी प्रयोगशाला का उपयोग नहीं किया था। पुलिस के अनुसार, वीडियो को निजी स्तर पर तैयार किया गया और फिर उसे वायरल किया गया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि वीडियो बनाने में किस तकनीक का इस्तेमाल हुआ और इसके पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था।
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पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री का वीडियो बनाने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पड़ोसी राज्य के मुख्यमंत्री से संबंधित एक वीडियो तैयार किया था, जिसे कथित तौर पर डीपफेक तकनीक के जरिए बदला गया। इस वीडियो के वायरल होने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा। डीपफेक तकनीक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज या चेहरे को डिजिटल रूप से बदलकर भ्रामक वीडियो तैयार करने की प्रक्रिया है। हाल के वर्षों में ऐसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है।
पूछताछ में बड़ा दावा
एसीपी नवीन शर्मा ने बताया कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने दावा किया है कि उन्हें यह काम करने के लिए लगभग 10 लाख रुपये दिए गए थे। इसके अलावा उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पड़ोसी राज्य के कुछ अधिकारी भी कथित रूप से इस पूरे मामले से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इन दावों की स्वतंत्र रूप से जांच और सत्यापन किया जा रहा है।
फोरेंसिक जांच होगी अहम
पुलिस का कहना है कि मामले की तकनीकी और फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। जांच के दौरान सामने आने वाले सभी डिजिटल सबूतों की विशेषज्ञों द्वारा जांच की जाएगी। एसीपी ने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हें फोरेंसिक विशेषज्ञों की राय के साथ सत्यापित किया जाएगा। फिलहाल मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
जांच जारी, कई सवालों के जवाब बाकी
इस मामले ने एक बार फिर डीपफेक तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वीडियो किसने बनवाया, इसका उद्देश्य क्या था और क्या इसमें अन्य लोगों की भी भूमिका है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और डिजिटल उपकरणों की भी जांच की जा रही है।
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