The Journalist News (Lucknow): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देश आतंकवाद को केवल किसी एक राष्ट्र की नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती मानते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों की लड़ाई साझा है, उनका संकल्प अटूट है और इस दिशा में सहयोग लगातार मजबूत होता जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत और ऑस्ट्रेलिया समान सोच वाले साझेदार के रूप में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति, स्थिरता तथा नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि दोनों देशों के बीच विश्वास, सहयोग और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों के कारण संबंध लगातार नई ऊंचाइयों तक पहुंच रहे हैं।
आतंकवाद पूरी मानवता के लिए खतरा
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया इस बात पर पूरी तरह सहमत हैं कि आतंकवाद किसी एक देश की समस्या नहीं है। यह पूरी दुनिया के सामने मौजूद एक गंभीर चुनौती है, जिसका मुकाबला वैश्विक सहयोग और मजबूत रणनीति के साथ ही किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ दोनों देशों का संकल्प पहले से अधिक मजबूत हुआ है। सुरक्षा, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को लगातार बढ़ाया जा रहा है ताकि इस वैश्विक खतरे का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

वार्ता और कूटनीति से ही निकल सकता है समाधान
प्रधानमंत्री ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी तनाव और संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि वैश्विक विवादों का समाधान केवल संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण प्रयासों के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ऐसे प्रयासों को बढ़ावा देना चाहिए, जो शांति स्थापित करें और देशों के बीच सहयोग को मजबूत बनाएं।
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इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देश समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सम्मान के पक्षधर हैं। उन्होंने कहा कि मुक्त, समावेशी और सुरक्षित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र वैश्विक आर्थिक विकास और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है। इस दिशा में भारत और ऑस्ट्रेलिया का सहयोग आने वाले समय में और मजबूत होगा।
रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई गति
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध केवल द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देश वैश्विक मुद्दों पर भी एक-दूसरे के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन और पारदर्शिता के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत बनाती है। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, तकनीक, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग और अधिक व्यापक होगा।
वैश्विक शांति के लिए साझा संकल्प
प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, आज दुनिया जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, उनसे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है। भारत और ऑस्ट्रेलिया आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रयासों, कूटनीतिक समाधान और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति व स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए मिलकर कार्य करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का उद्देश्य केवल अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना नहीं, बल्कि वैश्विक शांति, सुरक्षा और स्थिरता को भी मजबूत बनाना है। यही साझा दृष्टिकोण भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को भविष्य में नई दिशा और नई मजबूती प्रदान करेगा।
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