The Journalist News (Lucknow): बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को 5 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई तीन महीने की जेल की सजा को बरकरार रखा है। इसके साथ ही लंबे समय से चल रहे इस मामले में अदालत का फैसला अभिनेता के खिलाफ गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला वर्ष 2010 का है। आरोपों के अनुसार, राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए मुर्ली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। बताया गया कि कंपनी के मालिक माधव गोपाल अग्रवाल, जो उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के उद्योगपति हैं, ने फिल्म निर्माण के लिए यह वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई थी। हालांकि, निर्धारित समय के भीतर कर्ज की राशि वापस नहीं की जा सकी। इसके बाद राजपाल यादव की ओर से दिए गए चेक बैंक में प्रस्तुत किए गए, लेकिन वे बाउंस हो गए।

कोर्ट तक कैसे पहुंचा मामला?
चेक बाउंस होने के बाद मुर्ली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर राजपाल यादव को दोषी मानते हुए उन्हें तीन महीने की जेल की सजा सुनाई थी। ट्रायल कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए अभिनेता ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर की।
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हाईकोर्ट ने क्या कहा?
दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद राजपाल यादव की अपील को स्वीकार नहीं किया और ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। इसके साथ ही अभिनेता को सुनाई गई तीन महीने की सजा यथावत रहने का आदेश दिया गया। इस फैसले के बाद अभिनेता को इस मामले में कानूनी राहत नहीं मिल सकी।
शाहजहांपुर से है राजपाल यादव का नाता
राजपाल यादव मूल रूप से उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के बंडा क्षेत्र के कुंडरा गांव के निवासी हैं। उन्होंने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान हास्य कलाकार और चरित्र अभिनेता के रूप में बनाई है। अपने फिल्मी करियर में उन्होंने कई चर्चित फिल्मों में अभिनय किया है और उनकी कॉमिक टाइमिंग को दर्शकों ने काफी पसंद किया है।
कानूनी प्रक्रिया जारी
हाईकोर्ट द्वारा अपील खारिज किए जाने के बाद इस मामले में ट्रायल कोर्ट का फैसला प्रभावी रहेगा। आगे की कानूनी प्रक्रिया संबंधित अदालत के आदेशों और उपलब्ध कानूनी विकल्पों के अनुसार आगे बढ़ेगी। यह मामला फिल्म वित्तपोषण, चेक बाउंस और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कानूनी विवादों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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