Edited by: Shivam Awasthi
यूं तो प्रधानमंत्री मोदी देश विदेश में कई दौरे करते रहते हैं लेकिन रविवार को नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ मुख्यालय का दौरा आखिर क्यूं इतना महत्वपूर्ण बन गया और इसके क्या मायने है कि पूरे देश की नज़र प्रधानमंत्री के इस दौरे पर टिकी रही आइए बताते हैं …..
राजनीति और राष्ट्रनीति का ककहरा सीखा था
दरअसल देश भक्ति से ओत-प्रोत विचारों के जिस आंगन में पीएम मोदी ने रविवार को कदम रखा वहीं से उन्होंने राजनीति और राष्ट्रनीति का ककहरा सीखा था लेकिन यह दौरा खास इसलिए था क्योंकि RSS की स्थापना से लेकर आज तक कोई प्रधानमंत्री बतौर पद पर रहते हुए इस कार्यालय की तरफ रुख नहीं कर सका और इसका कारण संगठन पर लगे कई तरह के प्रतिबंधों को माना जाता है हालांकि स्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई ने RSS कार्यालय का दौरा किया था लेकिन उस समय वह प्रधानमंत्री के पद पर नहीं थे।
RSS मुख्यालय का दौरा कई लोगों के लिए हैरानी से भरा कदम
वहीं अगर हम राजनीतिक गलियारों की बात करें तो प्रधानमंत्री मोदी का यह RSS मुख्यालय का दौरा कई लोगों के लिए हैरानी से भरा कदम रहा यहां तक कि खुद RSS के कार्यकर्ता भी उनके इस दौरे से हैरान हैं, लोग इसे बीजेपी और RSS के बीच पिछले कुछ समय से पड़ी खटास को सुलझाने और दोनों के बीच के सम्बन्धों को सुधारने का प्रयास मान रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान यह भी चर्चा थी की आरएसएस और बीजेपी के बीच कुछ ठीक नहीं है यहां तक कि बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक सभा में यह भी कह डाला कि बीजेपी अब आत्मनिर्भर है वह अपने फैसले खुद लेने के लिए सक्षम है जिसके बाद कई इन अफवाहों को और भी हवा मिल गई वहीं जब बीजेपी को हिंदी पट्टी में सीटों का भारी नुकसान हुआ तो आरएसएस प्रमुख ने भी कई बार इशारों-इशारों में खुले मंच पर नसीहत दे डाली। हालांकि लोकसभा में झटके के बाद बीजेपी ने फिर आरएसएस को अहमियत देनी शुरू की और इसका प्रभाव हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में दिखाई दिया । वैसे प्रधानमंत्री के इस दौरे को लेकर RSS ने भी अपना पक्ष रखा है…
बीजेपी का वैचारिक मेंटॉर आरएसएस है
आरएसएस के एक सीनियर पदाधिकारी ने कहा, इसमें कोई संदेह नहीं है कि बीजेपी का वैचारिक मेंटॉर आरएसएस है। इसके बावजूद बीजेपी ने आरएसएस से दूरी ही दिखाने की कोशिश की। सरकार और संघ का काम पूरी तरह अलग होता है। कई नेता इस बात को स्वीकार करते हैं कि उनका भविष्य आरएसएस की वजह से ही तय हो पाया है। फिर भी मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि आरएसएस कभी सरकार के कामकाज में कोई दखल नहीं देता है और ना ही इसका कोई राजनीतिक एजेंडा है।
बीजेपी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की तरफ इशारा
हालांकि प्रधानमंत्री का यह दौरा कई मायनों में बीजेपी के अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की तरफ इशारा कर रहा हैं माना जा रहा है कि अगले महीने बेंगलुरु में होने वाली कार्यकारिणी की बैठक में बीजेपी नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का भी ऐलान कर सकती है। ऐसे में पीएम मोदी का आरएसएस मुख्यालय जाना अहम माना जा रहा है और इसके साथ ही बीजेपी और RSS में कुछ समय से बनी अनबन को सुलझाने का मुख्य जरिया माना जा रहा है……
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