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सोनम वांगचुक को पुलिस घसीटते हुए अस्पताल ले गई, समर्थकों ने लगाए गंभीर आरोप

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Source: ANI
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The Journalist News (Lucknow): सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से जारी अनशन के दौरान पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने की घटना के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। इस बीच, खुद को कॉकरोच जनता पार्टी का संस्थापक अध्यक्ष बताने वाले अभिजीत दिपके ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए और आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया। हालांकि, पुलिस की ओर से इस कार्रवाई के कारणों पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि सोनम वांगचुक को किस अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

20 दिनों से अनशन पर थे सोनम वांगचुक

जानकारी के अनुसार, सोनम वांगचुक पिछले 20 दिनों से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे। समर्थकों का कहना है कि लंबे समय से भोजन न करने के कारण उनकी तबीयत कमजोर हो गई थी। इसी दौरान पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई। घटना के बाद आंदोलन स्थल पर मौजूद समर्थकों में नाराजगी देखने को मिली।

अभिजीत दिपके ने लगाए गंभीर आरोप

अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि सुबह करीब 7 बजे पुलिस मौके पर पहुंची और सोनम वांगचुक को जबरन वहां से ले गई। उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें भी रास्ते में रोका तथा मारपीट की। दिपके ने दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। ये आरोप उनके व्यक्तिगत बयान हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस संबंध में संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया समाचार लिखे जाने तक सामने नहीं आई थी।

आगे पढ़िए: 17वें दिन अनशन को मिला राजनीतिक समर्थन, चंद्रशेखर आजाद आज पहुंचेंगे जंतर-मंतर

पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस ने सोनम वांगचुक को चिकित्सकीय जांच और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। लंबे समय तक भूख हड़ताल करने वाले व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए ऐसी परिस्थितियों में चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक मानी जाती है। हालांकि, पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उन्हें अस्पताल किस परिस्थिति में और किस आधार पर ले जाया गया।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

अभिजीत दिपके ने कहा कि यदि यह समझा जा रहा है कि सोनम वांगचुक को आंदोलन स्थल से हटाने से आंदोलन समाप्त हो जाएगा, तो ऐसा नहीं होगा। उन्होंने घोषणा की कि आंदोलन जारी रहेगा और 20 जुलाई को संसद तक मार्च निकालने की योजना पर भी कायम रहेंगे। उन्होंने समर्थकों से बड़ी संख्या में जंतर-मंतर पहुंचने और आंदोलन में शामिल होने की अपील की।

अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा

दिपके ने यह भी घोषणा की कि वह स्वयं उसी दिन से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा तथा लोगों से पीछे न हटने की अपील की। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी पहले की मांग केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी, लेकिन अब वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की भी मांग करेंगे। यह एक राजनीतिक मांग है और इसे आंदोलनकारी पक्ष द्वारा व्यक्त किया गया है।

आधिकारिक पक्ष का इंतजार

समाचार लिखे जाने तक दिल्ली पुलिस की ओर से अभिजीत दिपके द्वारा लगाए गए आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी। यह भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि पुलिस की कार्रवाई केवल स्वास्थ्य कारणों से की गई या इसके पीछे कोई अन्य प्रशासनिक कारण था। यदि पुलिस या संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया जाता है, तो उससे घटना की पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

मामले पर बनी हुई है नजर

जंतर-मंतर पर हुई इस घटना के बाद आंदोलन, पुलिस की कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर सभी की नजर बनी हुई है। सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति, पुलिस का आधिकारिक पक्ष और आंदोलनकारियों की आगे की रणनीति आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकती है।

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