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लखनऊ: आयुर्वेद विभाग में वित्तीय व्यवस्था बदली

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Source: SKM
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लखनऊ से एक बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आई है। आयुर्वेद विभाग में वित्त नियंत्रक (FC) के चार्ज में रहे सुभाष सिंह को हटा दिया गया है। शासन ने यह जिम्मेदारी अब डीके गुप्ता को सौंप दी है। डीके गुप्ता को आयुर्वेद विभाग का वित्त नियंत्रक का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। फिलहाल डीके गुप्ता संयुक्त निदेशक, कोषागार निदेशालय के पद पर तैनात हैं। शासन के इस फैसले को आयुर्वेद विभाग में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।

विभाग के भीतर चल रही थी तनातनी

सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से आयुर्वेद निदेशक और वित्त नियंत्रक सुभाष सिंह के बीच तनाव की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। दोनों अधिकारियों के बीच विभागीय कामकाज और बजट खर्च को लेकर मतभेद बताए जा रहे थे। कहा जा रहा है कि शासन द्वारा आयुर्वेद विभाग को जो बजट भेजा गया था, उसका बड़ा हिस्सा खर्च नहीं हो पाया। बजट उपयोग में कमी को लेकर शासन स्तर पर सवाल उठने लगे थे।

शासन तक पहुंचा मामला

बजट खर्च कम होने का मामला धीरे-धीरे शासन में ऊपर तक पहुंच गया। इसके बाद विभागीय कामकाज की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान वित्तीय प्रबंधन को लेकर नाराजगी सामने आई, जिसके बाद यह प्रशासनिक फैसला लिया गया। हालांकि, शासन की ओर से इस बदलाव को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि वित्तीय अनुशासन और बजट उपयोग में सुधार के लिए यह कदम उठाया गया है।

डीके गुप्ता को क्यों मिली जिम्मेदारी?

डीके गुप्ता वर्तमान में कोषागार निदेशालय में संयुक्त निदेशक के पद पर कार्यरत हैं और उन्हें वित्तीय मामलों का लंबा अनुभव माना जाता है। ऐसे में आयुर्वेद विभाग में वित्त नियंत्रक का अतिरिक्त चार्ज देना शासन की रणनीतिक प्रशासनिक व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि शासन चाहता है कि विभागीय बजट का बेहतर और समयबद्ध उपयोग हो, ताकि आयुर्वेद से जुड़ी योजनाओं पर असर न पड़े।

आयुर्वेद विभाग के लिए अहम समय

आयुर्वेद विभाग इस समय कई योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू करने की प्रक्रिया में है। ऐसे में वित्तीय प्रबंधन की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। विभाग के भीतर चल रही खींचतान से योजनाओं की गति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही थी। प्रशासनिक हलकों में माना जा रहा है कि नया प्रभार मिलने के बाद विभागीय कामकाज में स्थिरता आ सकती है

आगे क्या?

अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि डीके गुप्ता के चार्ज संभालने के बाद आयुर्वेद विभाग में बजट खर्च और वित्तीय व्यवस्था में क्या सुधार देखने को मिलता है। वहीं, सुभाष सिंह को हटाए जाने के बाद उनके अगले पदस्थापन को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

आगे पढ़िए: अपर्णा यादव और प्रतीक यादव के रिश्ते में आई दरार, तलाक की चर्चा तेज

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