नई दिल्ली: बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने हाल ही में एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने नया विवाद खड़ा कर दिया है। यूनुस ने पाकिस्तान के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के प्रमुख जनरल साहिर शमशाद मिर्ज़ा को एक पुस्तक भेंट की, जिसके कवर पर बांग्लादेश का एक विकृत नक्शा दिखाया गया है। इस नक्शे में भारत के असम समेत कई पूर्वोत्तर राज्यों को बांग्लादेश का हिस्सा दर्शाया गया है, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं।यह मुलाकात मिर्ज़ा की ढाका यात्रा के दौरान हुई थी। यूनुस की ओर से उनके आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा की गई तस्वीर में उन्हें ‘Art of Triumph: Bangladesh’s New Dawn’ नामक किताब भेंट करते हुए देखा गया है। इधर, हाल के developments को देखते हुए भारतीय सेना ने भी पूर्वी सीमा पर संभावित खतरे को भांप लिया है और सीमावर्ती क्षेत्रों में तीन नए रणनीतिक बेस तैयार कर लिए हैं, ताकि किसी भी चुनौती का तेजी से जवाब दिया जा सके।

‘सल्तनत-ए-बांग्ला’ का विचार, ग्रेटर बांग्लादेश
द इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि जो नक्शा विवाद का कारण बना है, वह दरअसल ढाका के कट्टरपंथी संगठन सल्तनत-ए-बांग्ला द्वारा फैलाए जा रहे ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ सिद्धांत से जुड़ा हुआ है। इस विचारधारा के तहत वे बांग्लादेश की सीमाओं को बढ़ाकर भारत के पूरे पूर्वोत्तर, पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओडिशा के कुछ क्षेत्रों, यहां तक कि म्यांमार के अराकान क्षेत्र तक को अपनी कल्पित सीमा में शामिल दिखाते हैं।
भारत के ‘चिकन नेक’ पर उठाई थी उंगली
मुहम्मद यूनुस इससे पहले भी भारत के पूर्वोत्तर को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं। अप्रैल में चीन दौरे के दौरान उन्होंने कहा था कि “भारत के सातों पूर्वोत्तर राज्य स्थल-रुद्ध हैं… उनके पास समुद्र तक पहुँचने का कोई मार्ग नहीं है।”
उनका इशारा साफ़ तौर पर सिलीगुड़ी कॉरिडोर जिसे भारत का चिकन नेक भी कहा जाता है की ओर था, जिसे कई रणनीतिक विशेषज्ञ इस बयान का ‘छिपा हुआ खतरा’ भी मानते हैं। यूनुस की इस टिप्पणी के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कड़े शब्दों में जवाब देते हुए बिम्सटेक देशों के लिए भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र की कनेक्टिविटी हब के रूप में भूमिका और उसकी सामरिक अहमियत को रेखांकित किया। बिम्सटेक में बांग्लादेश, भारत, भूटान, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड शामिल हैं।
चटगांव कॉरिडोर: 30 किलोमीटर की जीवनरेखा
DefenceStories की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चटगांव कॉरिडोर दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश की वह पतली भूमि-पट्टी है जो देश के मुख्य हिस्से को उसके सबसे बड़े और अहम बंदरगाह चटगांव से जोड़ती है। यह पट्टी भारत के त्रिपुरा के सबरूम क्षेत्र से लेकर बांग्लादेश के मिरशाराय उपजिला तक लगभग 30 किलोमीटर लंबी है। यह संकरा गलियारा बांग्लादेश की रसद व्यवस्था और अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी जैसा है। अगर कभी यह मार्ग बाधित हो जाए, तो चटगांव बंदरगाह सीधे देश से कट जाएगा जबकि यही बंदरगाह बांग्लादेश के 90% से अधिक विदेशी व्यापार का भार उठाता है। इसी के साथ यह भारत के स्थल-रुद्ध राज्य त्रिपुरा को समुद्र तक पहुँचाने वाला सबसे छोटा और व्यावहारिक स्थलीय मार्ग भी माना जाता है।
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