दिल्ली में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या और डॉग बाइट के मामलों को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। एमसीडी ने अपने आगामी बजट में 35 करोड़ रुपये विशेष रूप से आवारा कुत्तों की माइक्रोचिपिंग और टीकाकरण के लिए आवंटित किए हैं।
नगर निगम का कहना है कि इस योजना के तहत राजधानी में अगले दो से तीन महीनों के भीतर लगभग 25,000 आवारा कुत्तों को माइक्रोचिप लगाने के साथ-साथ टीका भी लगाया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य न सिर्फ कुत्तों की पहचान सुनिश्चित करना है, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा को भी मजबूत करना है।
माइक्रोचिपिंग क्या है और क्यों जरूरी?
माइक्रोचिपिंग एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें कुत्ते के शरीर के अंदर एक बेहद छोटी इलेक्ट्रॉनिक चिप लगाई जाती है। इस माइक्रोचिप में कुत्ते से जुड़ी कई अहम जानकारियां स्टोर रहती हैं, जैसे
- कुत्ते की पहचान
- टीकाकरण का पूरा रिकॉर्ड
- लोकेशन और क्षेत्र की जानकारी
एमसीडी अधिकारियों के अनुसार, यदि भविष्य में कोई कुत्ता किसी व्यक्ति को काटता है, तो माइक्रोचिप में मौजूद डेटा के जरिए उस कुत्ते को तुरंत ट्रेस और मॉनिटर किया जा सकेगा। इससे न केवल इलाज में मदद मिलेगी, बल्कि जिम्मेदारी तय करना भी आसान होगा।
टीकाकरण से कैसे बदलेगी स्थिति?
दिल्ली में डॉग बाइट के मामलों को लेकर अक्सर चिंता जताई जाती रही है। माइक्रोचिपिंग के साथ-साथ टीकाकरण अनिवार्य रूप से किया जाएगा, जिससे रेबीज जैसी गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि जब आवारा कुत्तों का बड़े पैमाने पर टीकाकरण होता है, तो संक्रमण फैलने की संभावना काफी हद तक घट जाती है। यह योजना इंसानों और जानवरों दोनों की सुरक्षा के लिहाज से अहम मानी जा रही है।

35 करोड़ रुपये कहां खर्च होंगे?
एमसीडी के मुताबिक, बजट में आवंटित 35 करोड़ रुपये का उपयोग इन प्रमुख कार्यों में किया जाएगा
- माइक्रोचिप और स्कैनिंग उपकरण
- टीकाकरण की दवाइयां
- प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों की टीम
- फील्ड सर्वे और डेटा मैनेजमेंट
- कुत्तों की पहचान और निगरानी सिस्टम
नगर निगम का कहना है कि इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा इलाकों को कवर किया जा सके।
अगले 2–3 महीने क्यों अहम?
अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती दो से तीन महीने बेहद महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि इसी दौरान 25 हजार कुत्तों को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद योजना का विस्तार दूसरे इलाकों में भी किया जा सकता है। एमसीडी यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि हर माइक्रोचिप किया गया कुत्ता एक सेंट्रल डिजिटल डेटाबेस से जुड़ा हो, जिससे किसी भी घटना के बाद तुरंत जानकारी हासिल की जा सके।
आम लोगों को क्या फायदा?
इस योजना से दिल्ली के नागरिकों को कई तरह के फायदे मिलने की उम्मीद है
- डॉग बाइट मामलों में कमी
- रेबीज और अन्य बीमारियों का बेहतर नियंत्रण
- किसी घटना में जिम्मेदारी तय करना आसान
- कुत्तों के प्रति डर और भ्रम में कमी
साथ ही, पशु प्रेमियों का भी मानना है कि माइक्रोचिपिंग से कुत्तों के साथ अमानवीय व्यवहार पर लगाम लगेगी और उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
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