नई दिल्ली, 7 अगस्त 2025
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक जनसभा में दिए गए बयान से राजनीतिक हलकों और कूटनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी,अमेरिका और भारत के बीच बढ़ते तनाव के बीच पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “मैं किसानों के हितों की रक्षा के लिए व्यक्तिगत कीमत चुकाने को भी तैयार हूं,
यह बयान उस वक्त आया है जब अमेरिका की ओर से भारत की कृषि नीति को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से चिंता जताई जा रही है, खासतौर पर भारतीय किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी और फूड सिक्योरिटी एक्ट के कुछ प्रावधान अमेरिका को WTO के नियमों के विपरीत लग रहे हैं,
कृषकों के साथ मजबूती से खड़े पीएम मोदी
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा ,देश के अन्नदाता ही भारत की आत्मा हैं, उनके हितों के साथ कोई समझौता नहीं होगा, चाहे इसके लिए मुझे व्यक्तिगत कीमत ही क्यों न चुकानी पड़े, विदेशी दबावों से हमारी नीतियां तय नहीं होंगी,
यह बयान स्पष्ट करता है कि सरकार अपने कृषि सुधारों और किसानों को राहत देने वाली नीतियों से पीछे हटने वाली नहीं है,

अमेरिका से क्या है तनाव?
बीते कुछ महीनों से भारत और अमेरिका के रिश्तों में कुछ तल्खी देखने को मिली है, अमेरिकी मीडिया और थिंक टैंक्स ने भारत की लोकलाइजेशन पॉलिसीज़, डेटा सुरक्षा कानून और खाद्य सब्सिडी पर सवाल उठाए हैं, साथ ही, भारत के ईरान और रूस के साथ व्यापारिक रिश्ते भी अमेरिका को खटक रहे हैं,

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत है, लेकिन कुछ नीतिगत पहलें वैश्विक मानकों से मेल नहीं खातीं, हमें उम्मीद है कि भारत वैश्विक नियमों का पालन करेगा,
WTO में भी हो चुकी है शिकायत
भारत द्वारा किसानों को दी जा रही एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) और फर्टिलाइज़र सब्सिडी पर अमेरिका ने WTO में आपत्ति जताई है, हालांकि भारत ने स्पष्ट किया है कि ये सब्सिडी देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों के भरण-पोषण के लिए जरूरी हैं,
किसानों ने जताया समर्थन
प्रधानमंत्री के बयान के बाद कई किसान संगठनों ने सरकार के साथ एकजुटता दिखाई है,
भारतीय किसान संघ के प्रवक्ता रामपाल सिंह ने कहा ,प्रधानमंत्री का यह बयान दिखाता है कि वह वास्तव में किसानों के हितैषी हैं, विदेशी ताकतें चाहती हैं कि भारत अपने किसानों को खुली मंडियों में झोंक दे, लेकिन सरकार ने किसानों की तरफ से आवाज बुलंद की है,

कूटनीतिक रणनीति या घरेलू राजनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है, कि यह बयान सिर्फ विदेश नीति तक सीमित नहीं है, अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट संदेश है, कि सरकार ग्रामीण वोटबैंक को साधने में लगी है,
वरिष्ठ पत्रकार अजय उपाध्याय का कहना है ,”मोदी सरकार जानती है कि गांव और किसान भारतीय चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं,, ऐसे में यह बयान दोनों मोर्चों , घरेलू राजनीति और विदेश नीति , पर असर डालेगा”,मोदी सरकार जानती है कि गांव और किसान भारतीय चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं,ऐसे में यह बयान दोनों मोर्चों घरेलू राजनीति और विदेश नीति पर असर डालेगा,
क्या है किसानों को लेकर मोदी सरकार की नीति?
पिछले 10 वर्षों में मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं,
- प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN)
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
- सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम
- ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार)
- कृषि यंत्र सब्सिडी योजना
हालांकि, कृषि कानूनों के खिलाफ हुए 2020-21 के किसान आंदोलन के बाद सरकार ने रुख नरम किया और कानूनों को वापस लिया, अब सरकार सीधे किसानों को आर्थिक सहायता देने पर ज़ोर दे रही है,

विपक्ष ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीएम मोदी के बयान को “भावनात्मक ड्रामा” करार दिया, उन्होंने ट्वीट किया,किसानों के नाम पर प्रधानमंत्री साहब अब भी नौटंकी कर रहे हैं,अगर किसानों की इतनी चिंता है तो एमएसपी गारंटी कानून क्यों नहीं लाया गया?
वहीं समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने भी कहा,किसानों को ‘व्यक्तिगत कीमत’ नहीं, MSP की कानूनी गारंटी चाहिए,बयानबाज़ी नहीं, धरातल पर काम चाहिए,
विदेश नीति में नया मोड़
प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान न केवल अमेरिका को स्पष्ट संकेत देता है, बल्कि वैश्विक मंचों पर भारत की आत्मनिर्भर नीति को भी रेखांकित करता है,
भारत अब अमेरिका, रूस, ईरान और खाड़ी देशों के बीच संतुलन साधने की कूटनीति अपना रहा है, इससे भारत की स्थिति एक “मजबूत मध्यस्थ राष्ट्र” के रूप में उभर रही है,

क्या होगा आर्थिक असर?
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका भारत पर दबाव बढ़ाता है तो ट्रेड डील्स, टेक्नोलॉजी साझेदारी और निवेश प्रभावित हो सकते हैं, हालांकि, भारत की बढ़ती घरेलू मार्केट और आत्मनिर्भरता अभियान इसे काफी हद तक संभाल सकते हैं,
आर्थिक विशेषज्ञ डॉ. नीना अग्रवाल कहती हैं,भारत अब ऐसी स्थिति में पहुंच गया है, जहां वह अपने किसानों के हितों की रक्षा करते हुए वैश्विक मंचों पर प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है,अमेरिका को भी भारत की मजबूती को समझना होगा,
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