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BJP का नया चेहरा कौन? अध्यक्ष पद को लेकर RSS–पार्टी के बीच खींचतान, संघ ने रखी अपनी शर्तें

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RSS बैठक भाजपा अध्यक्ष
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नई दिल्ली — राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक आगामी 4 जुलाई से 6 जुलाई तक दिल्ली में आयोजित की जाएगी। यह एक महत्वपूर्ण आयोजन है, जिसमें संघ की शीर्ष कार्यकारिणी — सरसंघचालक मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले, एवं छह सहसरकार्यवाह, साथ ही सभी प्रमुख प्रांत प्रचारक उपस्थित रहेंगे।

सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में संघ और भाजपा के बीच अगले राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन पर निर्णायक वार्ता हो सकती है। संघ पहले ही नए अध्यक्ष के लिए दृष्टिकोण और मानदंड भाजपा नेतृत्व के समक्ष रख चुका है — अध्यक्ष संगठन को मजबूत संवाहक होना चाहिए, न कि केवल राजनीतिक संदेशवाहक।


प्रमुख विषय: अध्यक्ष चुनने का रणनीतिक मकसद

  1. मानदंड उजागर
    संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि अध्यक्ष संगठन को मजबूत करे, जो राजनीतिक संकेत पैदा करने के बजाय लॉजिक और क्षमता पर आधारित हो
  2. राजनीतिक परिवर्तन का संकेत
    बैठक के साथ ही यह संकेत भी मिलता है कि केंद्र सरकार में भी नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी है।
  3. पार्लियामेंट्री बोर्ड में काबिज़ चेहरे
    विचार है कि अध्यक्ष पद पर वह नेता लाया जाए, जो पार्टी की सर्वोच्च निर्णायक संस्था — पार्लियामेंट्री बोर्ड — में प्रभावी भूमिका निभा सके।

संगठनात्मक बदलाव की दिशा

  • अध्यक्ष के चयन के बाद संभव है कि 50% राष्ट्रीय महासचिवों की जगह बदली जाए, और युवा नेताओं को महासचिव स्तर पर अवसर मिले।
  • अब तक, 14 राज्यों में प्रदेशाध्यक्षों के चुनाव हो चुके हैं। लेकिन गुजरात, यूपी, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में बोर्ड चुनाव अटका हुआ है।
  • 19 राज्यों में चुनाव प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है, जिसके बाद राष्ट्रीय निर्वाचन अधिकारी अपनी घोषणा देंगे।

राज्यों में अध्यक्ष चयन की जटिल परिस्थिति

उत्तर प्रदेश

  • पार्टी वरिष्ठों (राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ) के साथ विचार-विमर्श कर रही है।
  • चर्चा में ओबीसी और दलित चेहरों पर जोर: धर्मपाल सिंह, बीएल वर्मा, साध्वी ज्योति, बाबूराम निषाद, स्वतंत्र देव सिंह (ओबीसी), दिनेश शर्मा (ब्राह्मण), रामशंकर कठेरिया (दलित) आदि।
  • निर्णय सम्मानित जातिगत समीकरण व संगठन शक्ति के आधार पर अमित शाह व प्रधानमंत्री द्वारा लिया जाएगा।

कर्नाटक

  • विवादास्पद मामला: पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा का जोर विजयेंद्र (लिंगायत) पर, जबकि संगठन में अन्य समुदायों—जैसे ओबीसी व वोक्कलिंगा—के लिए भी रास्ता साफ रखा गया है।
  • चर्चा में वरिष्ठ नेता: विजयेंद्र, सुनील कुमार (ओबीसी), सीटी रवि (वोक्कलिंगा)। अनुशासन, लोकप्रियता और समाजिक संतुलन निर्णायक होंगे।

महाराष्ट्र

  • केंद्र में कार्यकारी अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण (मराठा) को पूर्ण अध्यक्ष पद मिलने की संभावना। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ समीकरण ताकत बन सकता है।

पश्चिम बंगाल

  • वर्तमान में कार्यकारी अध्यक्ष सुकांता मजूमदार — लेकिन चुनाव से पहले होगा आवश्यक बदलाव?
  • चर्चा के केंद्र में: शमिक भट्टाचार्य, शुभेंदु अधिकारी, महिला नेताओं लॉकेट चैटर्जी व अग्निमित्रा पॉल का नाम; ममता बनर्जी के खिलाफ रणनीतिक संतुलन के लिए।

मध्य प्रदेश

  • जातिगत समीकरण: ओबीसी–एससी–एसटी समुदायों में संतुलन चाहिए।
  • चर्चित नाम: गजेंद्र पटेल, फग्गन सिंह कुलस्ते, सुमेर सिंह सोलंकी (ओबीसी), लाल सिंह आर्य, प्रदीप लारिया, हरिशंकर खटीक (एससी), कविता पाटीदार (ओबीसी)। मुख्यमंत्री मोहन यादव (ओबीसी) के कारण निर्णय राजनीतिक समीकरण में टिका है।

गुजरात

  • रणनीति: मुख्यमंत्री समुदाय (कडवा पाटीदार) पहचान रखते हुए सौराष्ट्र पाटीदार चेहरा चुनाव की ओर अग्रसर।
  • चर्चित संभावित नाम: जगदीश विश्वकर्मा, मयंक नायक, देवुसिंह चौहान (ओबीसी), दिलीप संघानी, जनक पटेल (पाटीदार)।

राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव की लॉजिस्टिक प्रक्रिया

  1. 19 राज्यों में चुनाव — चुनाव अधिकारी (जैसे महाराष्ट्र के किरण रिजिजू, उत्तराखंड के हर्ष मल्होत्रा, पश्चिम बंगाल के रवि शंकर प्रसाद) की नियुक्ति।
  2. चुनाव समाप्ति — 14 राज्यों में प्रक्रिया पूरी, शेष राज्यों में भागीदारी अपेक्षित।
  3. राष्ट्रीय निर्वाचन अधिकारी की घोषणा — प्रक्रिया के पीछे पीछे मंत्रालय तय करेगा, फिर अध्यक्ष निर्वाचन किया जाएगा।

  • संघ–भाजपा तालमेल खुद को संगठन शक्ति और समाजिक संतुलन से मजबूत करना चाहता है, न कि केवल राजनीतिक संदेश देने के लिए अध्यक्ष नामांकन करना।
  • अध्यक्ष चुनाव सक्रिय चुनावी राज्यों में संगठन मजबूती के संकेत देगा — जो 2027 विधानसभा व 2029 लोकसभा की तैयारी का पुख्ता ब्योरा है।
  • यह बैठक केवल संगठन की नहीं, राजनीतिक दिशा तय करने का अवसर है — जिसमें सरकार की नेतृत्व भी प्रभावित होगी।
  • अगर संघ और भाजपा में पूर्ण ऐक्य स्थापित हुआ, तो नए अध्यक्ष के कई संकेतात्मक फल सिद्ध होंगे — जिसमें पार्टी में युवा, जातिगत प्रतिनिधित्व, राज्य-संकेतों का चयन, और राजनीतिक मजबूती शामिल होंगे।

राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए चर्चाओं में ये नाम सबसे आगे

हालाँकि भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर अभी तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन चर्चाओं का बाजार गर्म है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर सामने आ रही पोस्टों में कुछ दिग्गज नेताओं के नाम संभावित दावेदारों के रूप में सामने आए हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव, पूर्व महासचिव राम माधव, और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने हालिया बयान में यह संकेत दिया कि भाजपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष जल्द ही चुना जाएगा, जिससे अटकलों को और बल मिला है। इन चर्चाओं के बीच संघ की आगामी बैठक और पार्टी संगठन में बदलाव की संभावना पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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