Home उत्तर प्रदेश यूपी मदरसों में सैलरी रोकने का नया आधार, क्या बायोमीट्रिक हाजिरी?
उत्तर प्रदेश

यूपी मदरसों में सैलरी रोकने का नया आधार, क्या बायोमीट्रिक हाजिरी?

Share
#image_title
Share

उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुदानित मदरसों में शिक्षकों की उपस्थिति व्यवस्था पर निगरानी और कड़ी कर दी है। इसके साथ ही 2007 से 2017 के बीच हुई नियुक्तियों और सेवा नियमों की पुनः समीक्षा की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुदानित मदरसों में शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति व्यवस्था को लेकर अब कड़ा रुख अपना लिया है। मदरसा शमशुल हुदा विवाद सामने आने के बाद शासन ने पूरे तंत्र की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि बिना सत्यापित उपस्थिति किसी भी कर्मचारी को वेतन जारी नहीं किया जाएगा। इसके लिए जिला स्तर पर अधिकारियों को जांच की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।

बायोमीट्रिक हाजिरी अब अनिवार्य, फर्जी प्रमाणपत्र पर सख्त कार्रवाई
उप्र मदरसा शिक्षा परिषद ने प्रदेश के सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को पत्र भेजकर कहा है कि सभी अनुदानित मदरसों में बायोमीट्रिक हाजिरी लागू करना अनिवार्य होगा। प्रबंधन द्वारा जारी उपस्थिति प्रमाणपत्र की जांच के बाद ही वेतन स्वीकृत किया जाएगा। हाजिरी में किसी भी तरह की अनियमितता या हेरफेर पाए जाने पर संबंधित प्रबंधन और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जाएगी।

राज्य में 561 अनुदानित मदरसे, लाखों छात्र लाभान्वित
उत्तर प्रदेश में फिलहाल 561 ऐसे मदरसे संचालित हैं जिन्हें सरकार से अनुदान प्राप्त होता है। इन संस्थानों में इस समय 2.31 लाख से अधिक छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इन मदरसों में 9,889 शिक्षक और 8,367 गैर-शिक्षण कर्मचारी तैनात हैं। इतनी बड़ी संख्या में स्टाफ होने के बावजूद, उपस्थिति और सेवा शर्तों की औपचारिक जांच कई वर्षों से लंबित थी।

10 वर्षों तक नहीं हुई सेवा शर्तों की समीक्षा
2007 से 2017 के बीच नियुक्त हुए अनेक शिक्षकों और कर्मचारियों के दस्तावेज़ों तथा सेवा शर्तों का उचित सत्यापन नहीं किया गया। इसका परिणाम यह हुआ कि कई कर्मचारियों को बिना किसी जांच के वेतन वृद्धि, पदोन्नति और पेंशन तक जारी होती रही। इस गंभीर लापरवाही को ध्यान में रखते हुए, शासन ने अब सभी जिलों में व्यापक जांच शुरू कराने के निर्देश दिए हैं।

DMO करेंगे अचानक जांच, उपस्थिति रजिस्टर होगा फोकस में
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों (DMO) को अब मदरसों का औचक निरीक्षण करने का अधिकार दे दिया गया है। वे किसी भी समय संस्था में पहुँचकर प्रबंधक, प्रधानाचार्य, शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के उपस्थिति रजिस्टर की जांच करेंगे। यदि किसी कर्मचारी की मौजूदगी संदिग्ध या हाजिरी संदेहास्पद पाई जाती है, तो तत्काल रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई की जाएगी।

2007–2017 की नियुक्तियों की गहन जांच शुरू
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने साफ कहा है कि 2007 से 2017 के बीच हुए सभी नियुक्तियों की सेवा शर्तों का सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। इस जांच में नियुक्ति प्रक्रिया, शैक्षिक योग्यता, अनुभव और पुलिस सत्यापन जैसी सभी औपचारिकताओं की फिर से पुष्टि शामिल होगी। विभाग पहले ही 2007 और 2013 की नियमावलियों के तहत वेतन संरचना को निर्धारित कर चुका है।

डिजिटल पोर्टल से छात्रों की रियल-टाइम ट्रैकिंग
1 जनवरी 2017 से मदरसों में पढ़ने वाले सभी छात्रों का पूरा डेटा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। मदरसा पोर्टल पर प्रत्येक बच्चे का नाम, अभिभावक विवरण, जन्मतिथि, कक्षा, पता और मोबाइल नंबर दर्ज है, जिससे छात्रों की वास्तविक संख्या, उपस्थिति और अध्ययन की स्थिति पर रियल-टाइम निगरानी करना अब काफी आसान हो गया है।

आगे पढ़िए : भारती सिंह के बेबी शावर में टीम ‘बेबी गर्ल’ की धूम, ब्लू लुक में छाईं कॉमेडियन

Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles
Two Indian men exchange a small golden Buddha statue during a formal meeting, standing indoors.
उत्तर प्रदेशपॉलिटिक्स

पीएम मोदी से मिले डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, दिल्ली दौरे ने बढ़ाई राजनीतिक चर्चाएं

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दिल्ली दौरे ने राजनीतिक...