Home उत्तर प्रदेश यूपी में श्रम आयुक्त का पद अब भी खाली, नई नियुक्ति के बाद भी नहीं संभाला कार्यभार
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यूपी में श्रम आयुक्त का पद अब भी खाली, नई नियुक्ति के बाद भी नहीं संभाला कार्यभार

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The Journalist News (Lucknow): उत्तर प्रदेश के श्रम विभाग में शीर्ष प्रशासनिक पद श्रम आयुक्त (Labour Commissioner) पिछले लगभग एक पखवाड़े से रिक्त बना हुआ है। विभाग के पूर्व श्रम आयुक्त मार्कंडेय शाही के 30 जून को सेवानिवृत्त होने के बाद इस महत्वपूर्ण पद पर अब तक नियमित रूप से कार्यभार नहीं संभाला जा सका है। इससे विभागीय कामकाज और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। शासन ने पिछले सप्ताह इस पद पर आईएएस अधिकारी सुधा वर्मा की तैनाती का आदेश जारी किया था। हालांकि, अब तक उन्होंने श्रम आयुक्त का कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। इससे विभाग में नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

कार्यभार ग्रहण नहीं करने की चर्चा

सूत्रों के अनुसार, आईएएस सुधा वर्मा ने श्रम आयुक्त के पद पर कार्यभार संभालने को लेकर अनिच्छा जताई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने शासन से किसी अन्य पद पर तैनाती का अनुरोध किया है। हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान या आदेश जारी नहीं किया गया है। जब तक शासन की ओर से कोई नई अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक इस मामले को लेकर केवल चर्चाएं और कयास ही लगाए जा रहे हैं।

महत्वपूर्ण है श्रम आयुक्त का पद

उत्तर प्रदेश में श्रम आयुक्त का पद राज्य के श्रम विभाग का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद माना जाता है। इस पद के माध्यम से श्रमिक कल्याण योजनाओं का संचालन, औद्योगिक विवादों का समाधान, श्रम कानूनों का पालन, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों से जुड़े कार्यक्रम तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं की निगरानी की जाती है। राज्य में लाखों श्रमिकों और हजारों औद्योगिक प्रतिष्ठानों से जुड़े मामलों का समन्वय इसी कार्यालय के माध्यम से होता है। ऐसे में लंबे समय तक यह पद रिक्त रहने से विभागीय निर्णयों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

आगे पढ़िए: उत्तर प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला: अब वृद्ध और दिव्यांगों के घर पहुंचेगा राशन, वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव

श्रम विभाग की योजनाओं पर नजर

प्रदेश सरकार श्रमिकों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा, ई-श्रम पंजीकरण, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की योजनाओं और औद्योगिक विकास से जुड़े कई कार्यक्रमों को प्राथमिकता दे रही है। ऐसे में विभाग के शीर्ष पद पर स्थायी नेतृत्व का होना प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष स्तर पर नेतृत्व स्पष्ट होने से विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आती है और नीतिगत फैसलों को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।

शासन के अगले फैसले पर नजर

अब सभी की निगाहें उत्तर प्रदेश शासन के अगले निर्णय पर टिकी हैं। यदि सुधा वर्मा कार्यभार ग्रहण नहीं करती हैं, तो शासन को इस महत्वपूर्ण पद के लिए किसी अन्य अधिकारी की नियुक्ति करनी पड़ सकती है। हालांकि, अभी तक न तो शासन की ओर से किसी नई नियुक्ति की पुष्टि की गई है और न ही सुधा वर्मा के संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया गया है। ऐसे में अंतिम स्थिति केवल सरकार के औपचारिक आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।

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